जनता ने दिखाया आईना, ट्रंप पर मंडराया खतरा, चुनाव से पहले सर्वे में बुरी तरह पिछड़े; ईरान जंग ने डुबोई लुटिया
अमेरिका के मिड टर्म इलेक्शन में डोनाल्ड ट्रंप को सर्वे में हार मिलती नजर आ रही है. जिस ईरान जंग को जीतने की बात उन्होंने 7 दिन में कही थी, उसे वह 8 महीने बाद भी जीत नहीं पाए हैं. अब यूएस की जनता पूछ रही है कि आखिर जंग से क्या हासिल हुआ?
आज से 8 महीने पहले कही गई डोनाल्ड ट्रंप की बातें याद कीजिए. 28 फरवरी को ईरान पर औचक हमले के बाद ट्रंप ने क्या-क्या दावे किए थे. ट्रंप ने कहा था कि ईरान को 7 दिन के भीतर घुटनों पर ला देंगे, ईरान की कट्टरपंथी सरकार को उखाड़ फेंकूंगा. ईरान को मिट्टी में मिला दूंगा. लेकिन आज 8 महीने बाद? ईरान पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर दिख रहा है. अमेरिका के नए हमले का जवाब घातक तरीके से देने की बात कर रहा है.
अब अमेरिकी जनता ट्रंप से पूछ रही है कि ईरान जंग से अमेरिका को क्या मिला? जंग में टैक्स पेयर्स का साढ़े तीन ट्रिलियन डॉलर क्यों फूंक दिया गया? 3 नवंबर को मिड टर्म इलेक्शन से पहले अमेरिकी जनता के ये सवाल ट्रंप पर कैसे भारी पड़ रहे हैं, समझिए.
क्या ये है ट्रंप का आखिरी इलेक्शन गेम?
अमेरिका की राजनीति में क्या ये मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ये आखिरी बाजी है? अमेरिकी लोगों की जुबान में कहें, तो क्या ये आखिरी इलेक्शन गेम है? मिड टर्म इलेक्शन से 2 हफ्ते पहले ये सवाल अमेरिकी मीडिया में इसलिए चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि ट्रंप चुनाव पूर्व हुए ज्यादातर सर्वेक्षण में पीछे हैं. 10 में से 9 चुनावी सर्वे में ट्रंप पीछे चल रहे हैं. 70% अमेरिकी ट्रंप के खिलाफ हैं. मिड टर्म इलेक्शन से पहले ट्रंप को लेकर ये चुनावी आंकड़े चौंकाने वाले हैं, क्योंकि पिछले 8 महीने से ट्रंप अमेरिकी जनता को ये कहते हुए ईरान पर हमले कर रहे थे कि इसमें अमेरिका का सबसे बड़ा फायदा होने वाला है.
ईरान से जंग के गिनाए थे फायदे
पिछले 8 महीने में अलग-अलग मौकों पर ट्रंप ने ईरान से जंग के बेहिसाब फायदे गिनाए थे. ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में ईरान अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन है. ईरान के पास न्यूक्लियर बम अमेरिका के लिए खतरा है. ईरान से कट्टरपंथी सरकार का खात्मा अमेरिकी हित में है. ईरान की हार के बाद दुनिया में अमेरिका की धौंस बढ़ेगी. ईरान कमजोर होगा तो अमेरिका में तेल-गैस सस्ता होगा.
ट्रंप ने कहा था,'दुनिया के सबसे बुरे देश के पास न्यूक्लियर बम नहीं होना चाहिए. अगर इसके बदले आपको अगर तेल-गैस की कीमतें ज्यादा चुकानी पड़ रही है, तो ये छोटी सी बात है. क्योंकि सच ये है कि हमारे यहां तेल और गैस की कीमतें अभी भी ओबामा और बाइडन के शासन से कम है. लेकिन हमने वो किया, जो इन दोनों को पहले ही कर देना चाहिए था.'
तेल-गैस और इससे बढ़ी महंगाई को ट्रंप ईरान वॉर की छोटी कीमत बता रहे हैं, लेकिन अमेरिकी जनता का हाल इस छोटी कीमत से कितना बेहाल हो चुका है, इसे कुछ आंकड़ों से समझिए.
ईरान जंग के बाद कितनी महंगाई?
पेट्रोल की कीमत 4.35 डॉलर प्रति गैलन हो चुकी है. डीजल की कीमत 6.30 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई हैं. गैस के दाम 5 डॉलर प्रति गैलन तक आ गए हैं. इसका असर यह हुआ है कि 1 से दो डॉलर प्रति गैलन ज्यादा खर्च हो रहा है. ईंधन खर्च बढ़ने से महंगाई चरम पर पहुंच चुकी है.
वैसे, ईरान जंग के बदले इस तेल गैस की महंगाई, जिसे ट्रंप छोटी सी कीमत कह रहे हैं, उसका हिसाब अमेरिकी जनता महीनों से पूछ रही है. चुनाव प्रचार के पहले से ही अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. ट्रंप से लोग पूछ रहे हैं कि ईरान पर हमले से हासिल क्या होगा? ईरान से जंग का असली मकसद क्या है? जंग में अमेरिका का फायदा क्या है? टैक्स पेयर्स का 3.7 लाख करोड़ जंग में क्यों फूंका? जंग खत्म कब होगी इसमें जीत से क्या मिलेगा?
ये बात दुनिया से छिपी नहीं है कि ईरान से 8 महीने से ज्यादा की जंग अमेरिका के लिए सबसे महंगा युद्ध साबित हुआ है. इसमें 38 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम ट्रंप पहले ही फूंक चुके हैं. इसके अलावा मिडिल ईस्ट में अमेरिकी मिलिट्री बेस और कई सारे फाइट जेट्स और ड्रोन्स गंवाने पड़े वो अलग से.
अब अमेरिकी जनता ट्रंप से इन्हीं सारे खर्चों का हिसाब मांग रही है. क्योंकि ये पैसा टैक्स पेयर्स का है और ट्रंप ने इसे बिना साफ मकसद वाले जंग में क्यों फूंक दिया? अमेरिकी लोगों की ये नाराजगी वोटिंग से पहले हो रहे सर्वेक्षणों में भी साफ दिख रही है.
अगर ‘मिड टर्म’ हार गए ट्रंप?
- अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है.
- इसमें पहले 2 साल के बाद वोटिंग होती है, जिसे मिड टर्म कहते हैं.
- इसमें अमेरिकी संसद के दोनों सदनों के लिए वोटिंग होती है.
- ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी 10 में से 9 सर्वे में हारती दिख रही है.
- 62 में से 41 सीटों पर ट्रंप की पार्टी के उम्मीदवार ही उनसे असहमत हैं.
अगर विपक्षी डेमोक्रेट्स बहुमत हासिल करते हैं, तो ट्रंप की मुश्किल बढ़ सकती है.
ट्रंप संसद के कार्यकारी आदेशों से अलग अपने मन का कुछ नहीं कर सकते. ट्रंप के लिए अपने फैसले लागू करना मुश्किल होगा, उनका हर प्रस्ताव गिरेगा.ट्रंप के खिलाफ महाभियोग से लेकर कुछ मामलों की जांच भी तेज हो सकती है.
...तो कठपुतली बन जाएंगे ट्रंप!
यानी ट्रंप मिड टर्म में हार के बावजूद अमेरिका के राष्ट्रपति बने रहेंगे, लेकिन उनकी हैसियत एक कठपुतली से ज्यादा नहीं होगी. ट्रंप ना तो जंग के लिए मनमाना बजट मांग सकते हैं और ना ही इसे पास करने के लिए संसद पर दबाव बना सकते हैं.
ट्रंप को वही करना होगा, जो अमेरिका में ससंद और इसमें लोगों के चुने हुए प्रतिनिधियों का बहुमत चाहता है. और ये अमेरिका में पहली बार नहीं होगा. बल्कि पिछले 76 साल के इतिहास में 18 बार ऐसा हुआ, जब मौजूदा राष्ट्रपति को मिड टर्म में हार का सामना करना पड़ेगा.
लेकिन ट्रंप की हार के मायने सबसे अलग होंगे. क्योंकि ट्रंप के रहते ना सिर्फ दुनिया में जंग का खतरा बढ़ा है, बल्कि अमेरिकी लोगों में ये राय बनी है कि ट्रंप ने अमेरिकी की पूरी विदेश नीति का भट्ठा बैठा दिया है.