क्या सऊदी जंग से बचने के लिए पाकिस्तान ने खोला नया मोर्चा? अफगानिस्तान पर एयर स्ट्राइक को क्यों बताया जा रहा है 'बहाना'
Why Pakistan Attacking Afghanistan: क्या सऊदी जंग से बचने के लिए पाकिस्तान ने नया मोर्चा खोला है? आखिरकार अफगानिस्तान पर पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक को 'बहाना' क्यों बताया जा रहा है.
Reasons for Pakistan Attacks on Afghanistan: पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब ने इसी साल रियाद में बैठक करके मक्का डिफेंस पैक्ट किया था. इस पैक्ट में प्रावधान किया गया है कि एक मुल्क पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. लेकिन अब जब सऊदी अरब पर हूती विद्रोही धड़ाधड़ मिसाइल और ड्रोन दाग रहे हैं तो पाकिस्तान कहीं नजर नहीं आ रहा है. पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर जुबानी हमदर्दी तो खूब दिखा रहे हैं. लेकिन सऊदी की मदद के लिए वहां पर अपने सैनिक भेजने की मांग से डरे हुए हैं. तो क्या सऊदी जंग से बचने के लिए ही उसने जानबूझकर अफगानिस्तान का फ्रंट खोला है, जिससे उसे फेस सेविंग का मौका मिल जाएगा. अफगानिस्तान से आई एक रिपोर्ट तो कम से कम इसी ओर इशारा कर रही है.
मक्का समझौता दिखावा, पाकिस्तान ने दिखाया ठेंगा!
खामा प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान बार-बार अफगानिस्तान पर एयर स्ट्राइक कर रहा है. वह इसे अफगान क्षेत्र से पैदा होने वाले आतंकी खतरों के खिलाफ अपनी स्वाभाविक प्रतिक्रिया बताता है. लेकिन नागरिकों के बढ़ते जानमाल के नुकसान और और पाकिस्तान की अपनी अंदरुनी स्थितकि इस दावे पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है. रिपोर्ट का कहना है कि पाकिस्तान भले ही कुछ भी कह रहा हो लेकिन अफगानिस्तान पर हमला करने के पीछे उसके असल मकसद कुछ ओर ही हैं.
अफगानिस्तान पर एयर स्ट्राइक के मायने समझिए
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान जानता है कि अगर वह अफगानिस्तान पर हमला करेगा तो तालिबान भी उसे जवाब देगा. ऐसे में अफगानिस्तान पर एयर स्ट्राइक करके पाकिस्तान सऊदी अरब को यह संदेश दे है कि वह तो खुद जंग में फंसा हुआ है, इसलिए हूतियों के खिलाफ संघर्ष में वह उसकी कोई मदद नहीं कर सकता है. ऐसा करके वह मक्का डिफेंस पैक्ट की अपनी प्रतिबद्धता से बचने का बहाना खोज रहा है.
इसके साथ ही अफगानिस्तान पर अटैक का मकसद पाकिस्तान में बिगड़ते हालात से जनता का ध्यान हटाना है. टीटीपी और बीएलए के लड़ाके पाकिस्तानी सेना पर ताबड़तोड़ हमले बोल रहे हैं. उनके हमलों की वजह से पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में अपने ऑपरेशन बंद कर चुकी है. साथ ही ट्रांसपोर्ट भी रात में बंद रहता है. पीओके में भी हालात उसके काबू से बाहर जा रहे हैं. इससे पाकिस्तानी सेना की छवि देश में तेजी से खराब हो रही है. जिससे आर्मी चीफ आसिम मुनीर बहुत परेशान है.
बढ़ रही अफगानियों के मरने की संख्या
उसे अपनी सारी नाकामियों का हल अफगानिस्तान पर अटैक में ही दिख रहा है. पाकिस्तान के इन नापाक मंसूबों की वजह से अफगानिस्तान में मरने वाले बेगुनाहों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है.
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से 1 अक्टूबर को किए गए हवाई हमलों में अफगानिस्तान में कम से कम 10 लोग मारे गए और 9 अन्य घायल हो गए. तालिबान ने कहा है कि पाकिस्तान के हवाई हमलों में तीन नागरिक घरों को निशाना बनाया गया. जबकि पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने ये हमले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को निशाना बनाकर किए. इससे पहले भी उसने 21 सितंबर और 24 सितंबर को खोस्त, पक्तिया और कंधार में हवाई हमले किए थे. जिनमें 7 लोग मारे गए थे.
(एजेंसी IANS)