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अमेरिकी सैनिकों की हत्या के लिए चीन ने की मदद, ईरान को भेजी मिलिट्री बेस की तस्वीरें, फिर भी क्यों नरम पड़े ट्रंप?

China Helping Iran In West-Asia War: चीन पर एक बार फिर आरोप लगा है कि उसने अमेरिकी सैनिकों की हत्या के लिए ईरान को अमेरिकी मिलिट्र बेस की हाई क्वालिटी वाली सैटेलाइट तस्वीरें भेजी थीं. चीनी संस्थाओं ने इन आरोपों को खारिज दिया, लेकिन ट्रंप ने इस बात को ज्यादा अहमियत नहीं दी.

Written By Shruti Kaul
Published: Sep 14, 2026, 01:31 PM IST | Updated: Sep 14, 2026, 01:44 PM IST
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West Asia War: पश्चिम एशिया की जंग में चीन पर लगातार ईरान की मदद करने का आरोप लगा है. खासतौर से हथियारों के सप्लाई को लेकर. अब एक और दावा किया जा रहा है कि 17 जुलाई 2026 को तेहरान की ओर से किए गए मिसाइल हमले से पहले और बाद में चीनी संस्थाओं ने ईरान को जॉर्डन स्थित अमेरिकी मिलिट्र बेस की हाई क्वालिटी वाली सैटेलाइट तस्वीरें भेजी थीं. इस हमले में 3 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे. 
 
'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने इस घटना को ज्यादा अहमियत नहीं दी. उन्होंने कहा कि चीन-अमेरिका एक-दूसरे की जासूसी करते रहते हैं.  

ईरान को पहुंचाई मदद 


अमेरिकी अधिकारियों ने पश्चिम एशिया जंग में चीन की ओर से ईरान की मदद करने के आरोप में इसे अबतक का सबसे स्पष्ट सबूत बताया है. उन्होंने कहा कि संघर्ष के दौरान ईरान को चीन के समर्थन ने अमेरिकी सैनिकों की मौत में योगदान दिया. 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' के मुताबिक, अधिकारियों ने सीधे तौर पर बीजिंग के हमले में शामिल होने का आरोप नहीं लगाया. हालांकि, उन्होंने अपने चीनी समकक्षों के साथ तस्वीरों का मुद्दा उठाया, लेकिन बीजिंग ने आरोप को खारिज कर दिया और वाशिंगटन से सबूत पेश करने को कहा.

सामने आए सबूत


17 जुलाई 2026 को 24 घंटे के अंदर जॉर्डन के मुवफ्फक साल्टी एयर बेस पर 3 बार हमला हुआ. ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों ने उस रेजिडेंशियल एरिया को निशाना बनाया था, जहां अमेरिकी सैनिक सो रहे थे. इस हमले में 3 लोग मारे गए. यह अप्रैल में हुए 60 दिन के युद्धविराम समझौते के बाद ईरान जंग में ये अमेरिकी सैनिकों की पहली मौत थी. इस घातक हमले से महीनों पहले ही ईरान की ओर से चीनी तकनीक के इस्तेमाल के सबूत सामने आ चुके थे. 'फाइनेंशियल टाइम्स' ने अप्रैल 2026 में रिपोर्ट किया था कि ईरान चीन में निर्मित और लॉन्च किए गए स्पाई सैटेलाइट का इस्तेमाल कर  रहा था, जिसे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ( IRGC) के एयरोस्पेस फोर्स ने 2024 के आखिर में अर्थ आई कंपनी से खरीदा था.

ट्रंप ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया था, जिनमें कहा गया था कि 3 अमेरिकी सैनिकों की हत्या करने वाले ईरानी हमले से पहले और बाद में चीनी संस्थाओं ने तेहरान तो जॉर्डन के एक मिलिट्री बेस की सैटेलाइट तस्वीरें मुहैया कराई थीं. 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की ओर से इस रिपोर्ट को पब्लिश करने के एक दिन बाद ट्रंप ने मीडियाकर्मियों के साथ बातचीत में कहा था,'जब वे कहते हैं कि चीन हमारी जासूसी करता है, तो मैं कहता हूं कि आप सही हैं और हम भी उनकी जासूसी करते हैं. यही हम करते हैं. वे वही करते हैं जो हम करते हैं.' 

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About the Author

ज़ी न्यूज में सब एडिटर. वनस्थली विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, राजस्थान से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन. ये राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुद्दो से जुड़े विषयों पर लिखती हैं. लिखने के अलावा श्रुति को नई जगहों पर घूमना, संगीत सुनना, फिल्में देखना और फूड एक्सप्लोर करने का बेहद शौक है. 
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