भारत ने लद्दाख में 'नामकरण' पर खारिज किया चीन का ऑब्जेक्शन, कहा- झूठे दावे करने से हकीकत नहीं बदलेगी!
जो खेल अब तक चीन, भारत के साथ खेलता आया था. अब भारत वही खेल चीन के साथ खेलने लगा है. इससे ड्रैगन बुरी तरह बौखला गया है. उसने लद्दाख के 28 स्थानों का भारत की ओर से मानक नाम तय किए जाने पर विरोध जताया है.
भारत की ओर से लद्दाख क्षेत्र में 28 स्थानों के नामकरण से चीन बौखला गया है. करीब 10 दिन तक चुप रहने के बाद अब चीन ने भारत के इस स्मार्ट मूव पर अपनी भड़ास निकाली है. चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि उसने कभी भी लद्दाख पर भारत के दावे को मान्यता नहीं दी है और वह भारत की ओर से लद्दाख में मानक नाम घोषित करने का विरोध करता है.
लद्दाख पर भारत के दावे को कभी नहीं दी मान्यता- चीन
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा, 'चीन ने भारत की ओर से एकतरफा और गैर-कानूनी तरीके से बनाए गए तथाकथित लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश को कभी मान्यता नहीं दी है. वह भारत द्वारा जगहों के तथाकथित मानक नाम घोषित करने का कड़ा विरोध करता है.'
यह कदम गैर-कानूनी और अमान्य- माओ निंग
माओ भारतीय गृह मंत्रालय के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रही थीं, जिसमें उसने लद्दाख के सीमावर्ती 28 स्थानों के मानक नाम तय करके उन्हें अपनेआधिकारिक नक्शों में शामिल किया है. इस पर बौखलाहट जाहिर करते हुए माओ ने कहा, 'यह कदम गैर-कानूनी और अमान्य है. इससे यह सच्चाई नहीं बदल सकती कि चीन-भारत सीमा के पश्चिमी हिस्से में मौजूद संबंधित इलाके हमेशा से चीन का हिस्सा रहे हैं.'
लद्दाख भारत का अटूट अंग, चीन को बोलने का अधिकार नहीं- भारत
लद्दाख के 28 स्थानों के नामों के मानकीकरण पर चीन की आपत्ति को भारत ने खारिज कर दिया. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है और चीन को इस मामले में टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है. भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि लद्दाख भारत का अटूट अंग है, जिसकी स्थिति को चीन का कोई बयान बदल नहीं सकता है.
मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'यह पुनः दोहराया जाता है कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य अंग है. चीनी पक्ष द्वारा किए गए किसी भी इनकार से यह स्थापित सत्य बदल नहीं सकता. गृह मंत्रालय ने स्थानीय हितधारकों के परामर्श से लद्दाख के 28 स्थानों को भारतीय सर्वेक्षण विभाग के आधिकारिक मानचित्र में चिह्नित किया है. ऐसा करने का मकसद आम जनता के बीच उनकी सटीक पहचान और बेहतर जागरूकता को सुविधाजनक बनाना है.'
बताते चलें कि गृह मंत्रालय ने लद्दाख के स्थानीय प्रशासन के साथ चर्चा करके वहां के 28 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं के मानक नाम तय किए थे. इसके बाद 2 अक्तूबर को उन नामों को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक मानचित्र में शामिल करने की घोषणा की गई. मंत्रालय ने कहा कि जगहों के नामकरण से स्थानों की सटीक पहचान सुनिश्चित होगी. साथ ही,वहां पर पर्यटन और विकास बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
भारत की 'टिट-फॉर-टैट' वाली रणनीति
हालांकि, जियो-पॉलिटिक्स में भारत के इस कदम को 'टिट-फॉर-टैट' वाली रणनीति कहा जा रहा है. असल में यह खेल लंबे अरसे से चीन खेलता आ रहा था. वह अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के विभिन्न क्षेत्रों को मंदारिन भाषा में नया नाम देकर उन्हें अपने नक्शे में दिखाता आ रहा था. भारत ने पहले राजनयिक चैनलों से कई बार उसकी इन हरकतों पर आपत्ति जताई. लेकिन जब वह सुधरने को राजी नहीं हुआ तो वह उसी के अंदाज में जवाब देने लगा.
लद्दाख में 28 स्थानों के नामकरण से पहले भारत ने इसी साल अगस्त में अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ चर्चा के बाद वहां के सीमावर्ती 27 स्थानों के नामों का मानकीकरण किया था. इसके बाद उसने लद्दाख में 28 स्थानों को भी मानक नाम दिए. चूंकि चीन लंबे समय से यह नामकरण का खेल खेल रहा था, इसलिए भारत की यह कार्रवाई कार्टोग्राफिक जवाबी कदम मानी जा रही है.
अपनी जमीन को भूला नहीं है भारत
उसने जिन स्थानों का नामकरण किया, उसमें कई पर्वत, दर्रे, घाटियां और नदियां शामिल थीं. इनमें कनिष्क पीक, मार्तंड गिरि, जोरावर पीक, रिंछेन जांगपो, साक्यासरी गिरि, शिवा री, महेश्वरा री, करुण पीर, द्राक कारपो, शचीमिर्क पास, स्कामरी ग्लेशियार, देहरा कंपास, शमाल लुंगपा, शकोरगा घाटी, यांगपा नदी, गुरु रिंपोछे झील शामिल रहे.
खास बात ये है कि भारत ने लद्दाख क्षेत्र में जिन 28 स्थानों को मानक नाम प्रदान किए, उसमें कई भारत के कंट्रोल वाले इलाके में हैं, कई एलओसी पर और कई चीन के कब्जे वाले अक्साई चिन एरिया में हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो भारत ने अपने स्मार्ट मूव के जरिए चीन को खुले तौर पर संदेश दे दिया है कि उसने भले ही उसके इलाके पर अवैध कब्जा कर रखा हो लेकिन वह अपनी जमीन को भूला नहीं है और वक्त आने पर वह इसे अवश्य हासिल करके रहेगा.