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ड्रैगन की रपटीली डगर: बुलेट ट्रेन से लेकर मेट्रो प्रॉजेक्ट की रफ्तार रोकने में लगा चीन; TBM मशीनों पर कसा शिकंजा

चीन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए टनल बोरिंग मशीन (TBM) के निर्यात पर रोक लगा दी है. यह फैसला 18 नवंबर से प्रभावी होगा, जो भारत के लिए भी एक चिंता का विषय हो सकता है. TBM मशीनों के निर्यात पर रोक लगाने के पीछे चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया है.

Written Byabhinav tripathi
Published: Oct 22, 2026, 07:17 AM IST|Updated: Oct 22, 2026, 07:54 AM IST
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ड्रैगन की रपटीली डगर: बुलेट ट्रेन से लेकर मेट्रो प्रॉजेक्ट की रफ्तार रोकने में लगा चीन; TBM मशीनों पर कसा शिकंजा
Image Credit: चीन ने टीबीएम मशीनों के निर्यात पर रोक लगा दी है. (फोटो- एआई)

About the Author

abhinav tripathi

abhinav tripathi

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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China Export Restrictions: ड्रैगन ने एक बार फिर ऐसी चाल चली है, जिससे भारत की चिंता बढ़ सकती है. चीन की नई चाल से न केवल बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर असर सकता है, बल्कि मेट्रो रेल और हाइवे के निर्माण में भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. चीन ने पिछले दिनों एक घोषणा करते हुए टनल बोरिंग मशीन (TBM) के निर्यात पर रोक लगा दी. इन मशीनों पर रोक के कारण भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. भारत में हाईवे, मेट्रो और पहाड़ी इलाकों में निर्माण कार्य में गति लाने के लिए इन मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है.

दरअसल, ये भारी-भरकम मशीनें केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसने रणनीतिक महत्व भी हासिल कर लिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह कदम मुख्य रूप से भारत को लेकर लिया गया है. साल 2020 में गलवान झड़प के बाद भारत ने चीन की सीमा अपने बुनियादी ढांचे का काफी तेजी से बढ़ाया है. सीमा पर भारत अपनी सैन्य तैनाती करने की दिशा में बेहतर काम कर रहा है.

चीन का फैसला जानिए

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने 19 अक्टूबर को एक अहम घोषणा की. ड्रैगन ने टनल-बोरिंग मशीनों (TBM) और उससे जुड़े उपकरणों पर रोक लगा दी. चीन ने कहा कि यह नियम 18 नवंबर से लागू होंगे. बीजिंग की ओर से इस फैसले के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया गया है. बता दें कि भारत रेलवे, मेट्रो, हाईवे और अंडरग्राउंड्स प्रोजेक्ट के लिए चीन और कुछ अन्य देशों की मशीनों पर बहुत अधिक निर्भर है. इससे पहले चीन रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर प्रतिंबध लगा चुका है, जिससे भारत के मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स को झटका लगा था.

बुलेट ट्रेन और मेट्रो प्रोजेक्ट्स पर सीधा असर

जानकारी दें कि ये मशीनें 3000 टन वजनी होती हैं. यह भारत के कई प्रोजेक्ट्स की रीढ़ हैं. इनमें सबसे अहम देश का पहला 508 किलोमीटर लंबा बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर है. जिसमें कई अंडरग्राउंड सुरंगे शामिल हैं.  बता दें कि कनाडा, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों में इस्तेमाल होने वाली ये मशीने पारंपरिक विस्फोट की तुलना में सुरंग खोदने का सुरक्षित तरीका नहीं प्रदान करती हैं. ऐसे में भारत जैसा घनी आबादी के बीच से गुजरने वाले रेल प्रोजेक्ट्स के लिए ये तकनीक अहम साबित होगी.

क्या है चीन की मंशा?

रक्षा विशेषज्ञों की मानें, तो ये TBM पाबंदियां सीधे तौर पर भारत के रणनीतिक प्रोजेक्ट्स के लिए ही लगाई गई हैं. चूंकि, भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास सड़क और पुलों का निर्माण कर रहा है. ऐसे में टनलिंग की तकनीक काफी अहम हो जाती है. ऐतिहासिक रूप से भारत और चीन की कभी सीधी सीमाएं नहीं मिलीं, लेकिन चीन की विस्तारवादी नीतियों के कारण तिब्बत पर कब्जा होने से चीन भारत की सीमा से सट गया.

चीन क्यों कर रहा मनमानी

TBM उद्योग में चीन का भारी दबदबा है. यह वैश्विक बाजार का 70 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है. यानी दुनिया के किसी भी देश में इस्तेमाल होने वाली ये मशीनों में अधिकांश चीन में ही बनी होती हैं. वहीं, चीन अपने देश में इस्तेमाल होने वाली करीब 95 फीसदी मशीनें खुद बनाता है. हालांकि, कई विदेशी कंपनियां चीन में ही अपनी मशीनों को असेंबल कराती हैं. इससे चीन को फायदा मिलता है. टीबीएम काफी महंगी और जटिल मशीने होती हैं. इन्हें खास मिट्टी और भौगोलित स्थिति के हिसाब से बनाया जाता है. निर्माण शुरू होने के बाद इन्हें रोकना काफी मुश्किल हो जाता है.

भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा

भारत को पहले से ही चीन की इस मंशा का अंदेशा था. यही कारण है कि भारत खुद इन मशीनों के निर्माण की कोशिश कर रहा है.  जर्मन कंपनी हेरेनक्नेच ने चेन्नई में अपनी असेंबली सुविधा स्थापित की है. उसने जुलाई 2022 से जुलाई 2023 के बीच चेन्नई मेट्रो फे-ज-2 के लिए 10 मशीनें बनाईं. साल 2025 में उसने उत्तर चेन्नई में नया प्लांट बनाने के लिए जमीन भी खरीदी है. सरकारी BEML 6.5 मीटर चौड़ी TBM का प्रोटोटाइट तैयार कर रही है.

चीन के फैसले से भारत पर कितना असर?

विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन की नई पाबंदियों के कारण भारत के बॉर्डर प्रोजेक्ट्स पर तुरंत रोक नहीं लगेगी, लेकिन यह इस बात की चेतावन जरूर है कि आने वाला समय मुश्किलों भरा हो सकता है. भारत का अगला लक्ष्य अब अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करना और भविष्य के लिए स्वदेशी मशीनें बनाना है. भारत को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मौसम और तकनीक क कमी सेना की आवाजाही में रुकावट ने बनने पाए.

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