App

मुनीर के मुल्क में स्क्रीन के पीछे छिपे 'दरिंदे', हर साल 15 लाख बच्चे बनते हैं शिकार; अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट से नंगा हुआ पाकिस्तान

Child Exploitation In Pakistan: पाकिस्तान में एक साल में लगभग 15 लाख बच्चे ऑनलाइन यौन शोषण का शिकार बनते हैं. हैरानी की बात ये है कि बच्चे समाज की ओर से लगाए जाने वाले दाग के चलते शिकायत भी दर्ज नहीं करवा पाते हैं.

मुनीर के मुल्क में स्क्रीन के पीछे छिपे 'दरिंदे', हर साल 15 लाख बच्चे बनते हैं शिकार; अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट से नंगा हुआ पाकिस्तान

Pakistan Child Exploitation: इन दिनों खुद को शांतिदूत समझने वाले पाकिस्तान की अपने ही मुल्क में स्थिति इतनी खराब है कि वहां  एक स्कूल जाने वाला बच्चा भी हैवानों की आंखों में सुरक्षित नहीं है. यहां आए दिन कोई न कोई बच्चा यौन शोषण का शिकार बनता है. संयुक्त राष्ट्र (UN) की चिल्ड्रन एजेंसी की ओर से पब्लिश एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में एक साल में लगभग 15 लाख बच्चों का ऑनलाइन यौन शोषण किया गया है.  

'AFP' की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी किशोरी जारा शाह (बदला हुआ नाम) को कंप्यूटर गेम खेलते समय एक अजनबी ने निशाना बनाया और एक ऐसी बातचीत में उलझा दिया, जिसके चलते वह ऑनलाइन यौन शोषण के भयावह खतरे में पड़ गई. रिपोर्ट के मुताबिक, 17 साल की जारा ने कहा,' ऑनलाइन गेम खेलते हुए हमारी बातचीत शुरू हुई और वह एक दोस्त की तरह व्यवहार करने लगा. बाद में वह मुझसे मिलना चाहता था और फिर मुझसे न्यूड फोटो मांगने लगा.

पाकिस्तान में बच्चों का शोषण


जारा ने बताया कि जब उसने इस हरकत के लिए साफ मना किया, तो शख्स ने उसे धमकी दी कि वह उसके परिवार को ऑनलाइन ढूंढकर उन्हें बता देगा कि उन दोनों की बातचीत चल रही थी. UNICEF की रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 85 प्रतिशत अपराधी पीड़ितों के परिचित थे, जिनकी उम्र 12-17 साल के बीच थी. UNICEF की एनुअल रिपोर्ट के लीड ऑथर डैनियल कार्डेफेल्ट ने 'AFP' को बताया कि बच्चों के साथ शोषण एक दोस्ताना बातचीत, खेल-खेल में की जाने वाली बातचीत, गिफ्ट, पैसा या रोमांस के वादे से शुरू हो सकता है. अपराधी सोशल मीडिया पर मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल करके विश्वास बनाने में महीनों बिता सकते हैं.'    

शिकायत करने से डरते हैं बच्चे


UNICEF की रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में 71 प्रतिशत पीड़ितों ने किसी को कुछ नहीं बताया, जबकि सर्वे में शामिल किसी भी बच्चे ने पुलिस, हेल्पलाइन या सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत ऑफिशियल चैनलों के जरिए दुर्व्यवहार की सूचना नहीं दी. इस चुप्पी का मुख्य कारण कलंक, शर्म और इस बात का डर था कि उनके परिवार या समाज की क्या प्रतिक्रिया होगी. लाहौर स्थित बच्चों के अधिकारों के संगठन 'पहचान' की डायरेक्टर महेक नईम ने कहा,' रिपोर्ट किए गए दुर्व्यवहारों में से लगभग 44 प्रतिशत पूरी तरह से ऑनलाइन थे, जिनमें 'स्नैपचैट' और 'व्हाट्सएप' सबसे आम जरिए थे. उन्होंने बाताया कि रूढ़िवादी समाज में लड़कियों को यौन शोषण के ज्यादा खतरे का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनकी आवाजाही पर प्रतिबंध लग सकता है या उन्हें स्कूल से बाहर निकाला जा सकता है.  

इंटरनेट बन रहा मुसीबत? 

UNICEF के अनुमान के मुताबिक, पाकिस्तान में 12-17 साल की उम्र के लगभग 74 फीसदी बच्चे इंटरनेट यूजर्स हैं और जैसे-जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक उनकी पहुंच बढ़ रही है, वैसे-वैसे ऑनलाइन सिक्योरिटी को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं. ऐसे में यहां के पंजाब प्रातं की सरकार ने इस महीने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रस्ताव पेश किया है.हालांकि, इसका विरोध भी हुआ है.

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Shruti Kaul

Shruti Kaul

ज़ी न्यूज में सब एडिटर. वनस्थली विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, राजस्थान से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन. ये राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुद्दो से जुड़े विषयों पर लिखती हैं. लिखने के अलावा श्रुति को नई जगहों पर घूमना, संगीत सुनना, फिल्में देखना और फूड एक्सप्लोर करने का बेहद शौक है. 
Read More