सऊदी अरब में बांग्लादेश के युवक-युवती को 'मौत की सजा' मामले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है. सजा पाने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के नाम नजरुल इस्लाम अब्दुल बशीर और स्वीटी अख्तर हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों को मक्का की एक मस्जिद में कथित रूप से 'आपत्तिजनक हरकत' करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था और 'मौत की सजा' सुनाई गई थी. सऊदी प्रशासन ने 14 अक्टूबर को उन्हें फांसी दे दी. 19 अक्टूबर को दोनों के शव स्वदेश लाए गए. हालांकि, सऊदी अरब की ओर से अभी तक दोनों बांग्लादेशी नागरिकों के नाम का खुलासा नहीं किया गया और ना ही ये बताया कि उन्हें किस अपराध में फांसी दी गई. वहीं, मीडिया में पहले दोनों (युवक-युवती) को कपल बताया जा रहा था, लेकिन अब मृतक युवक-युवती के परिवार ने इन दावों का खंडन किया है. मृतक नजरुल इस्लाम के पिता ने साफ कहा कि उनके परिवार का स्वीटी अख्तर से कोई संबंध नहीं था. उन्होंने बताया कि नजरुल अविवाहित था और सिर्फ स्वीटी अख्तर के साथ काम करता था. बूढ़े मां-बाप ने कहा कि सऊदी प्रशासन ने उनके बेटे को बिना सुनवाई के ही मार दिया. परिवार ने बांग्लादेशी सरकार से इंसाफ की गुहार लगाई है.
नजरुल के बूढ़े मां-बाप का दर्द
नजरुल इस्लाम के पिता ने कहा कि 4 भाई-बहनों में नजरुल सबसे बड़ा था. वह 10 नवंबर 2022 को सऊदी अरब गया था और वहां सफाईकर्मी की नौकरी करता था. पीड़ित पिता ने बताया कि 6 महीने बाद ही उसे (नजरुल) मक्का की एक मस्जिद में एक महिला के साथ 'अनैतिक कृत्य' करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था. उसके साथ गिरफ्तार की गई महिला भी बांग्लादेशी थी. नजरुल की मां ने बताया कि वह हर रविवार को जेल से फोन करता था. पिछले कुछ दिनों से फोन आना बंद हो गया था. अब मीडिया के जरिए उन्हें पता चला कि उनके बेटे को सऊदी में फांसी दे दी गई है. उन्होंने बताया कि सऊदी प्रशासन की ओर से हमें फांसी के बारे में पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी. नजरुल के पिता ने बताया कि उनकी बहन ने जब नजरुल को फांसी दिए जाने की खबर सुनी तो उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई. उन्होंने बताया कि उन्होंने 7 लाख टका उधार लेकर नजरुल को सऊदी भेजा था. अब कर्ज देने वाले लोग भी दबाव बना रहे हैं.
अगर मेरे बेटे को बिना उचित कारण के फांसी दी गई है, तो उन्हें इंसाफ चाहिए.- अब्दुल बशीर, नजरुल इस्लाम के पिता
स्वीटी के परिवार को भी इंसाफ का इंतजार
नजरुल इस्लाम के परिवार की तरह स्वीटी अख्तर के परिवार का भी रो-रोकर बुरा हाल हो रखा है. स्वीटी अख्तर के पिता फजल मियां ने बताया कि लगभग 4 साल पहले उन्होंने 1.5 लाख टका लेकर स्वीटी को सऊदी भेजा था. तंगैल के रहने वाले इस दिहाड़ी को अभी तक अपनी छोटी बेटी से जुड़ी कोई खबर का इंतजार है. परिवार ने बताया कि उन्हें लोगों से पता चला है कि उसे सऊदी अरब में फांसी दे दी गई है. हालांकि, उनको अभी तक किसी भी आधिकारी ने यह सूचना नहीं दी है. फजल मियां ने मीडिया को बताया कि सऊदी से वह पैसा भेजा करती थी. एक दिन उसने फोन किया और हमें बताया कि उसे जेल भेज दिया गया है. फजल मियां ने बताया कि बेटी स्वीटी ने महिला सहकर्मी के साथ बहस के मामले में जेल भेजने की बात कही थी. इसके बाद करीब एक साल तक उससे कोई संपर्क नहीं हो सका. उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले उसने फिर से फोन करना शुरू कर दिया था. वह महीने में एक-दो बार फोन करती थी, लेकिन कभी भी अपने मुकदमे या सजा के बारे में जिक्र नहीं किया.
फजल ने आगे बताया कि स्वीटी ने उनसे 2 महीने में रिहा किए जाने की बात कही थी. 15 दिन पहले भी जब बात हुई थी, तो भी सजा के बारे में कोई जिक्र नहीं किया था. उन्होंने स्थानीय न्यूज चैनल से रोते हुए कहा कि 2 दिन पहले ही परिवार को उसे फांसी दिए जाने की जानकारी मिली है, लेकिन बांग्लादेश सरकार की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. स्वीटी की मां जोहुरा ने बताया कि उनकी बेटी का तलाक हो चुका था और उसकी चार साल की एक बेटी है. उन्होंने बताया कि जब से स्वीटी सऊदी अरब चली गई, तब से उसकी बड़ी बहन ब्यूटी बी बच्ची की परवरिश कर रही है.
हमें नहीं पता मेरी बेटी के साथ क्या हुआ, वह जिंदा भी है या नहीं. हमने बस कुछ अफवाहें सुनी हैं.- फजल अली, स्वीटी के पिता
बांग्लादेशी सरकार पर भी उठ रहे सवाल
इस पूरी घटना को लेकर बांग्लादेश के विपक्षी नेता और जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने बांग्लादेश की सरकार पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते कहा कि सऊदी अरब में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक रहते हैं. हमारे दूतावास के अधिकारी वहां रहने वाले अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करते हैं. उन्होंने पूछा कि क्या इस मामले में हमारे दूतावास ने अपनी जिम्मेदारियां सही से निभाई थीं? उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि क्या दोनों बांग्लादेशियों को सऊदी में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान हमारे दूतावास की ओर से सहायता मिली या नहीं? उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी सरकार और हमारे दूतावास का यह कर्तव्य है कि वे इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करें. उन्होंने कहा कि हमें इस मामले से विदेशों में अपने नागरिकों की सुरक्षा की समीक्षा करनी चाहिए.