'भावनाओं की कोई जगह नहीं, कानून से लाएंगे वापस...', भारत से शेख हसीना को ले जाने के लिए बांग्लादेश ने चली बड़ी चाल
बांग्लादेश सरकार अब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से वापस लाने की कोशिशों में जुट गई है. बांग्लादेश ने भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण (वापस भेजने) की ऑफिशियल मांग की है. आइए जानते हैं पूरा मामला...
भारत में रह रहीं शेख हसीना इन दिनों चर्चा में हैं. कुछ दिन पहले उन्होंने दिसंबर में अपने देश बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया था, हालांकि तारीख नहीं बताई थी. अब बांग्लादेश ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण के लिए भारत से औपचारिक अनुरोध किया है. इस बात की जानकारी बांग्लादेश के कानून मंत्री मोहम्मद असदुज्जमान ने दी है. उन्होंने हसीना को सजायाफ्ता अपराधी बताते हुए कहा कि ढाका कानूनी रास्तों के जरिए उन्हें वापस लाने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए जरूरी कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं.
bdnews24 के अनुसार, कानून मंत्री मोहम्मद असदुज्जमान ने कहा, 'मेरे लिए वह एक अपराधी हैं. हमारे ट्रिब्यूनल द्वारा दोषी करार दी गई अपराधी, हमारे लिए यही उनकी पहचान है.' उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्यर्पण का यह मामला गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसे भारत व बांग्लादेश के बीच हुई संधि के अनुसार संभाला जाएगा.
सरकारी समाचार एजेंसी BSS के मुताबिक, असदुज्जमान ने कहा, 'कानून मंत्रालय सीधे तौर पर इस मामले में शामिल नहीं है, लेकिन गृह मंत्रालय इससे जुड़ा है, क्योंकि यह भारत के साथ प्रत्यर्पण संधि से संबंधित है. इस मामले को कानून के अनुसार निपटाया जाएगा, जिसमें भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं है. हमने संधि के तहत और उचित प्रक्रिया के जरिए उनके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया है.'
bdnews24 के अनुसार उन्होंने आगे कहा, 'यह भारत सरकार का मामला है. हमने उनसे प्रत्यर्पण संधि के तहत अनुरोध किया है, अगर वे उन्हें हमें सौंपते हैं, तो हम कानून के तहत जरूरी उचित प्रक्रिया के मुताबिक उन्हें अपनी हिरासत में ले लेंगे.'
भारत ने की है अनुरोध मिलने की पुष्टि
भारत पहले ही यह कन्फर्म कर चुका है कि उसे शेख हसीना को वापस भेजने (प्रत्यर्पण) के लिए बांग्लादेश की तरफ से रिक्वेस्ट मिली है, हालांकि इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि इन अनुरोधों की तय नियमों और प्रक्रिया के तहत जांच की जा रही है.
ट्रिब्यूनल ने सुनाई थी मौत और उम्रकैद की सजा
बता दें कि 5 अगस्त 2024 को हुए भारी जनविद्रोह के बाद शेख हसीना का 15 साल का शासन खत्म हो गया था और वह भारत आ गई थीं. इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस की अगुवाई में एक अंतरिम सरकार ने कामकाज संभाला.
नवंबर 2025 में बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने जुलाई-अगस्त 2024 के विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए हसीना को दोषी ठहराया. उनकी गैरमौजूदगी में चले मुकदमे में उन्हें एक आरोप में मौत की सजा और दूसरे आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.
इसके बाद इस साल फरवरी में बांग्लादेश में संसदीय चुनाव हुए, जिसमें तारिक रहमान की अगुवाई वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने सरकार बनाई.
दिसंबर में लौटने के बयान पर भड़का था ढाका
बीती 5 अगस्त को शेख हसीना ने नई दिल्ली में एक ऑडियो-ओनली वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इस दौरान उन्होंने कहा था कि जेल जाने या मारे जाने के डर के बावजूद वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का इरादा रखती हैं. उनके इस बयान पर ढाका ने कड़ा ऐतराज जताया था. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह इस बात से नाराज है कि हसीना को मीडिया से बात करने की इजाजत दी गई. वहीं, भारत ने इस कार्यक्रम से खुद को अलग करते हुए साफ किया था कि इसका आयोजन एक प्राइवेट मीडिया संस्थान ने किया था और इसमें सरकार का कोई रोल नहीं था.
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