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ऑस्ट्रिया में 14 साल से कम उम्र की लड़कियों के हिजाब पर बैन, नियम तोड़ा तो 87 हजार जुर्माना; कोर्ट जाने की तैयारी

ऑस्ट्रिया में हिजाब को लेकर विवाद पैदा हो गया है. सरकार ने स्कूलों में 14 साल से कम उम्र की बच्चियों के स्कार्फ पहनने पर पाबंदी लगा दी है. जिसको लेकर मुस्लिम संगठन विरोध कर रहे हैं.

Written By Tahir Kamran
Published: Sep 08, 2026, 03:57 PM IST | Updated: Sep 08, 2026, 04:16 PM IST
Image Credit: AI के जरिए बनाई गई तस्वीर
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ऑस्ट्रिया ने बड़ा फैसला लेते हुए 14 वर्ष से कम उम्र लड़कियों के लिए स्कार्फ पर पाबंदी लगा दी है. यह फैसला नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में लिया है, जो देशभर के सभी स्कूलों में लागू किया जाएगा. ऑस्ट्रिया में यह कानून तीन पार्टियों (रूढ़िवादी ÖVP, सोशल डेमोक्रेट्स (SPÖ) और उदारवादी Neos) की गठबंधन सरकार ने लागू किया है. फैसले को लेकर रूढ़िवादी पीपुल्स पार्टी (OVP) से आने वाली इंटीग्रेशन मंत्री क्लाउडिया बाउअर का कहना है कि हिजाब दमन का प्रतीक और बचपन से ही लड़कियों को अपने कंट्रोल में करने का एक जरिए बन चुका है. हालांकि कई स्तर पर इस फैसले की आलोचना भी हो रही है.

फैसले को लेकर सरकार ने तर्क दिया है कि यह कानून लैंगिंग समानता को बढ़ावा देता और इस फैसले का मकसद कम उम्र की लड़कियों के अधिकारों की रक्षा करना है. हालांकि इससे पहले ऑस्ट्रिया की संवैधानिक अदालत ने 2020 में प्राथमिक स्कूलों में हिजाब पर लगाई गई पिछली पाबंदी को रद्द कर दिया था. अदालत ने कहा था कि इस तरह की पाबंदी देश की धार्मिक सिद्धांत के खिलाफ है. सरकार के अनुमान के मुताबिक ऑस्ट्रिया में 14 साल से कम उम्र की करीब 12000 मुस्लिम छात्राएं नए हिजाब प्रतिबंध से प्रभावित होंगी. 2019 में यह संख्या करीब 3000 आंकी गई थी.

कैसे लागू होगा नया नियम?

BBC ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अगर टीचर किसी छात्रा को स्कूल में हिजाब पहने देखता है तो, उसे नए कानून को लागू करना होगा. इसके लिए पहले बच्ची और उसके अभिभावकों के साथ कई दौर की बातचीत की जाएगी. इसके बावजूद बार-बार नियमों का उल्लंघन होता है तो बाल सेवाओं को इस बारे में सूचित किया जाएगा. इसके बावजूद अगर कोई छात्रा फिर भी स्कार्फ पहनकर आती है तो, उसके अभिभावकों पर 800 यूरो (87000 से ज्यादा भारतीय रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

इस्लामिक संगठन कर रहे विरोध

हालांकि सरकार के इस कदम का विरोध भी हो रहा है. ऑस्ट्रिया के आधिकारिक इस्लामिक संगठन IGGÖ से संबंध रखने वाली कार्ला अमीना बघाजाती ने BBC से कहा कि संगठन 'इस पाबंदी का पूरी तरह विरोध करता है.' उन्होंने आगे कहा,'हमारा मानना है कि यह कानून धार्मिक आजादी के मौलिक अधिकार को गलत तरीके से सीमित करता है और इसका असर मुस्लिम लड़कियों पर पड़ रहा है.' अमीने ने कहा,'बच्चों की सुरक्षा करने के बजाय, यह कानून एक खास धार्मिक प्रथा को निशाना बना रहा है.' IGGÖ ने कहा है कि वह उन लड़कियों और उनके परिवारों की कानूनी लड़ाई में मदद करेगा, जिन्हें लगता है कि सरकार का यह कदम उनके मौलिक अधिकारों के खिलाफ है.

टीचर्स के बीच भी चिंता

इस फैसले को लेकर टीचर्स में भी काफी चिंता जाहिर की जा रही है. शिक्षकों का आरोप है कि वो पहले से ही बहुत ज्यादा दबाव में हैं और शिक्षा मंत्री अपनी अन्य जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्हें पुलिस अधिकारियों का रोल निभाने के लिए मजबूर करना चाहते हैं.

फ्रांस में भी धार्मिक प्रतीकों पर प्रतिबंध

यह पहली बार नहीं है, जब किसी देश में इस तरह की पाबंदी लगी हो. इससे पहले फ्रांस के स्कूलों में भी पहनावे से जुड़े धार्मिक प्रतीकों पर पाबंदी लगी हुई है. फ्रांस में 20 साल से ज्यादा समय से स्कूलों में हिजाब, पगड़ी और यहूदी धर्म की किप्पा शामिल हैं. हालांकि ऑस्ट्रियाई सरकार का फैसला सिर्फ स्कार्फ यानी हिजाब से जुड़ा है. 

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About the Author

Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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