ऑस्ट्रेलिया में बदलने वाला है आबादी का गणित! 2060 तक 85+ उम्र वालों की संख्या होगी तीन गुना
ऑस्ट्रेलिया में घटती जन्मदर और बढ़ती उम्रदराज आबादी के बीच 2060 के दशक में पहली बार जन्म से ज्यादा मौतें होने का अनुमान है. सरकार को घटते माइग्रेशन, बढ़ते बुजुर्गों और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव के बीच अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां दिख रही हैं.
ऑस्ट्रेलियाई सरकार की एक रिपोर्ट ने पूरे देश के होश उड़ा दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले दशकों में ऑस्ट्रेलिया जनसांख्यिकीय बदलाव की तरफ बढ़ रहा है. रिपोर्ट में दावा किया गया कि 2060 के दशक में यहां पर जन्म लेने वाले बच्चों की तादाद से ज्यादा मरने वाले लोगों की संख्य होगी. इसका असर ना सिर्फ पॉपुलेशन पर पड़ेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था, बाजार, स्वास्थ्य सुविधाएं भी प्रभावित होंगी. यह दावे ऑस्ट्रेलियाई ट्रेजरी की तरफ से सोमवार को जारी इंटरजनरेशनल रिपोर्ट में किए गए हैं. रिपोर्ट में AI, भू-राजनीतिक विभाजन, ऊर्जा परिवर्तन, बढ़ती उम्र की आबादी और सर्विस सेक्टर के विस्तार को देश के भविष्य को प्रभावित करने वाले 5 अहम वजहों के तौर पर गिनाया है.
ऑस्ट्रेलिया पहले से ही जन्मदर में काफी पिछड़ा देश है. उसे अपनी आबादी बढ़ाने के लिए इमिग्रेशन का सहारा लेना पड़ता है. हालांकि, अब नेट ओवरसीज माइग्रेशन यानी देश में आने वाले और देश छोड़ने वाले लोगों के बीच का अंतर भी धीरे-धीरे कम होने का अनुमान है. सरकार ने अनुमान लगाकर बताया है कि अगले 40 वर्षों में ऑस्ट्रेलिया की आबादी औसतन 0.9 फीसदी सालाना की दर से बढ़ेगी. यह पिछले 40 वर्षों की औसत 1.4 फीसदी सालाना इजाफे से बहुत कम है. इन्हीं आंकड़ों को लेकर ऑस्ट्रेलिया के ट्रेजरर जिम चाल्मर्स का कहना है कि पहली बार 2060 के दशक में देश में मौतों की संख्या जन्मों से ज्यादा होने का अनुमान है. एक रिपोर्ट के मुताबिक 1994-95 में ऑस्ट्रेलिया के अंदर जन्म और मौत के बीच करीब 1.33 लाख का फर्क था. 2024-25 में यह अंतर घटकर करीब 1.14 लाख रह गया.
किन-किन चीजों पर पड़ेगा असर
इसकी सबसे अहम वजह देश के अंदर बुजुर्ग लोगों की तादाद ज्यादा होना बताई जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक 2066 तक 85 साल से ज्यादा उम्र के ऑस्ट्रेलियाई लोगों की तादाद तीन गुना हो सकती है. बुजुर्गों की संख्या में इजाफा होने के चलते स्वास्थ्य सिस्टम पर भारी असर पड़ना तय है. रिपोर्ट में बताया गया कि अस्पतालों, स्वास्थ्य सेवाओं और aged-care सेक्टर की मांग में धीरे-धीरे इजाफा होगा. वहीं, बुजुर्ग आबादी वाले क्षेत्रों में डॉक्टरों, नर्सों और देखभाल से जुड़े कर्मचारियों की कमी भी बढ़ सकती है. युवाओं की तादाद कम होने के चलते, कामकाजी उम्र की आबादी में भी कमी देखने को मिलेगी. जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यस्था पर देखने को मिल सकता है.
लगातार कम हो रहा NOM
ऑस्ट्रेलिया की आबादी में पिछले कुछ दशकों में अहम रोल रहा है. जिसे नेट ओवरसीज माइग्रेशन यानी NOM भी कहा जाता है. एक साल में ऑस्ट्रेलिया के अंदर वाले प्रवासियों की तादाद में से देश छोड़कर जाने वालों की संख्या घटाने के बाद जो संख्या बची रहती है, उसे NOM कहते हैं. बड़ी बात यह है कि 2005-06 के बाद NOM ऑस्ट्रेलिया की सालाना आबादी वृद्धि का प्राकृतिक वृद्धि से बड़ा स्रोत बन गया. पिछले 30 वर्षों का औसत देखें तो कुल आबादी इजाफे में NOM का योगदान 56% था, जबकि जन्म और मौत के अंतर यानी नेचुरल इंक्रीज का योगदान 44 फीसद रहा.
अस्थायी वीजा पर आने वालों की तादाद ज्यादा
2024-25 में प्रवासी के रूप में आने वाले लोगों में अधिकतर टेम्परेरी वीजा होल्डर्स थे. कुल 5.68 लाख लोगों में तकरीबन 3.63 लाख लोग अस्थायी वीजा पर आए. इनमें अंतरराष्ट्रीय छात्र सबसे ज्यादा थे. छात्रों की तादाद तकरीबन करीब 1.57 लाख थी. इसी अवधि में स्थायी वीजा पर आने वालों की तादाद सिर्फ 88 हजार रही. 2024-25 की अवधि में आने-जाने वाले लोगों के जन्मस्थान के लिहाज से भारत टॉप 5 देशों में है. चीन, ऑस्ट्रेलिया, भारत, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड शीर्ष पांच में थे.