उस कैप्टन की कहानी जिसने पहली बार ध्वनि से भी तेज स्पीड में उड़ाया विमान, दुनिया में रच दिया इतिहास
14 अक्टूबर 1947 को कैप्टन चक येजर ने बेल एक्स-1 विमान से साउंड बैरियर को तोड़ा था. ध्वनि से भी तेज स्पीड में विमान उड़ाने वाले वह पहले शख्स बने. अपने इस एक्सपीरियंस को लेकर वह कहते थे कि यह बहुत मजेदार सफर था. बिल्कुल ऐसा लग रहा था जैसे किसी तेज रफ्तार कार में सवारी कर रहा हूं.
तारीख- 14 अक्टूबर 1947, दिन- मंगलवार... अमेरिकी वायुसेना के कैप्टन चार्ल्स ई. चक येजर ने जो कारनामा किया, उससे पूरी दुनिया हैरान रह गई. अपने विमान (जेट) के साथ अक्सर हवा में बातें करने वाले कैप्टन चक येजर ने 14 अक्टूबर 1947 को इतनी तेज उड़ान भरी कि ध्वनि की गति को भी तोड़ दिया. सुपरसोनिक उड़ान भरने वाले वह दुनिया के पहले इंसान बन गए. इससे पहले ऐसा करना नामुमकिन समझा जाता था. उस वक्त के पायलटों का मानना था कि मनुष्य ध्वनि की गति से अधिक तेज उड़ान भरने के लिए नहीं बना है. पायलट मानते थे कि साउंड बैरियर तोड़ने से विमान के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे. हालांकि, कैप्टन चक येजर इन धारणाओं में विश्वास नहीं करते थे. उन्हें कुछ नया करने की आदत थी. उनका कहना था, 'जब आप किसी ऐसी चीज के साथ काम कर रहे हों जिसके बारे में आपको ज्यादा जानकारी न हो, तो मन में थोड़ी घबराहट तो होती ही है, लेकिन आप उसका असर अपने काम पर असर ना पड़ने दें.'
हासिल की 'ऐस इन अ डे' की उपलब्धि
जानकारी के मुताबिक, पी-51 मस्टैंग फाइटर प्लेन के साथ कैप्टन चक येजर ने करीब 64 युद्ध अभियानों में हिस्सा लिया था. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने अपने पी-51 मस्टैंग फाइटर प्लेन से करीब 13 जर्मन विमानों को मार गिराया था. 12 अक्टूबर 1944 के दिन जब कैप्टन चक येजर ने आसमान से मोर्चा संभाला, तो हिटलर की हालत खराब हो गई. इस दिन कैप्टन चक येजर ने अकेले ही 5 जर्मन विमानों को तबाह करके 'ऐस इन अ डे' की उपलब्धि हासिल की. वायुसेना में जब कोई पायलट अपने पूरे कैरियर में दुश्मन के कम से कम 5 विमान मार गिराता है तो उसे 'फाइटर ऐस' कहा जाता है. वहीं, कैप्टन चक येजर ने इस कारनामे को एक ही दिन में कर दिखाया था, इसीलिए उन्हें 'ऐस इन अ डे' से नवाजा से है.
कब और कैसे रचा था इतिहास?
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बेल एयरक्राफ्ट कंपनी की ओर से निर्मित प्रायोगिक बेल एक्स-1 रॉकेट विमान की उड़ान के लिए उन्हें चुना गया था. इस टेस्ट पर ही भविष्य के लड़ाकू विमानों की स्पीड का फैसला होना था. कैप्टन चक येजर ने 14 अक्टूबर 1947 को दक्षिणी कैलिफोर्निया में रोजर्स ड्राई लेक के ऊपर बेल एक्स-1 उड़ाया था. उनके विमान को पहले बी-29 विमान की मदद से 25 हजार फीट की ऊंचाई तक ले जाया गया और फिर बम बे के जरिए वहां से छोड़ा गया.
इसके बाद कैप्टन चक येजर ने बेल एक्स-1 को 662 मील प्रति घंटे से अधिक की गति से उड़ाया और 40 हजार फीट ऊंचाई तक ले कर गए. इस उड़ान के एक्सपीरियंस को बयां करते हुए कैप्टन येजर कहते थे, 'यह बहुत मजेदार सफर था. बिल्कुल ऐसा लग रहा था जैसे किसी तेज रफ्तार कार में सवारी कर रहा हूं.' कहते हैं कि कैप्टन चक येजर ने विमान को उड़ाने से पहले इसका नाम अपनी पत्नी के नाम पर 'ग्लैमरस ग्लेनिस' रखा था.
टेक्नीशियन के तौर पर ज्वाइन की थी USAF
कैप्टन चक येजर के पायलट बनने का किस्सा भी बड़ा दिलचस्प है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना में वह टेक्नीशियन के तौर पर भर्ती हुए थे. शुरुआत के कई वर्षों तक विमान की रिपेयरिंग करते रहे. विमानों के बारे में उनकी जानकारी को देखते हुए द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उन्हें फाइटर जेट उड़ाने की इजाजत दी गई थी. पायलट के तौर पर उन्होंने अमेरिकी वायुसेना में अपना अलग मुकाम हासिल किया. बता दें कि 13 फरवरी 1923 को मायरा वेस्ट वर्जीनिया में जन्मे कैप्टन चक येजर का 7 दिसंबर 2020 को 97 वर्ष का आयु में निधन हो गया था.