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अल्बानिया में 'फ्लेमिंगो क्रांति': ट्रंप के दामाद के लग्जरी रिसॉर्ट पर बवाल, जानिए क्यों PM के इस्तीफे की मांग पर अड़ गई जनता?

अल्बानिया के लोगों के गुस्से की एक नहीं, बल्कि 3 बड़ी वजहें हैं. इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि अल्बानिया में जनता मौजूदा सरकार पर क्यों भड़की है, साजान और ज़्वेर्नेक असल में क्या हैं और वहां क्या बनने वाला है?

Written By Bhoopendra Rai
Published: Oct 23, 2026, 06:54 PM IST | Updated: Oct 23, 2026, 08:47 PM IST
Image Credit: अल्बानिया में क्यों भड़का सरकार विरोधी आंदोलन (फोटो क्रेडिट AI)
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यूरोप के कई देश इस वक्त सुलग रहे हैं. फ्रांस से लेकर अल्बानिया तक कम से कम 9 देशों में सरकार विरोधी लहर चल रही है. अलग अलग मुद्दों को लेकर जनता सड़कों पर है. सबसे विस्फोटक हालात अल्बानिया में बन चुके हैं. यहां पिछले 13 साल से देश की सत्ता संभाल रहे प्रधानमंत्री एदी रामा के खिलाफ जनता सड़कों पर उतर आई है. राजधानी तिराना की सड़कों पर दंगा-रोधी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधी भिड़ंत हो रही है. 

इस आंदोलन के भड़कने की एक बड़ी वजह बना है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर का एक अरबों डॉलर का विवादित प्रोजेक्ट, जो 2 बड़े आइलैंड की तस्वीर बदलने जा रहा है. यहां हम जानेंगे कि आखिर यह मेगा प्रोजेक्ट क्या है और क्यों इसके अल्बानिया में लोग इसके विरोध में सड़कों पर उतरे हुए हैं.

क्या है यह मेगा प्रोजेक्ट?

अल्बानिया डेली न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अल्बानिया की सरकार ने एड्रियाटिक तट पर व्लोरा शहर के पास दो बड़े सुपर-लग्जरी टूरिज्म प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी है. इनका जिम्मा डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और बेटी इवांका ट्रंप की कंपनी 'Affinity Partners' के पास है. करीब 4 अरब यूरो (लगभग 36 हजार करोड़ रुपये) के इस भारी-भरकम प्रोजेक्ट के तहत संरक्षित द्वीपों साजान द्वीप और  ज्वर्नेक कोस्टल आइलैंड में वर्ल्ड-क्लास होटल्स, प्राइवेट विला और लग्जरी रिसॉर्ट्स खड़े किए जाने हैं.

शुरुआत में यह सिर्फ पक्षियों और पर्यावरण को बचाने की मुहिम थी, लेकिन 15 से 19 अक्टूबर के बीच छात्रों के जुड़ने से यह भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और पीएम एदी रामा के इस्तीफे की मांग वाले बड़े जनांदोलन में बदल गया.

विरोध की 3 बड़ी वजहें?

1. 'फ्लेमिंगो' का घर छिनने का डर: जिस इलाके में यह प्रोजेक्ट बनाने की तैयारी है वहां हजारों गुलाबी फ्लेमिंगो पक्षियों, समुद्री कछुओं और दुर्लभ सील का प्राकृतिक ठिकाना (वेटलैंड्स) है। इसीलिए 'गुलाबी फ्लेमिंगो' इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है.

2. जमीन हड़पने का सीधा आरोप: स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रिसॉर्ट के नाम पर उनकी पुश्तैनी जमीनों को धोखे और गैर-कानूनी हथकंडों से छीना गया है.

3. 'टेलर-मेड' कानून और छल-कपट: यूरोपीय संसद से लेकर स्थानीय एक्टिविस्टों का आरोप है कि सरकार ने कुशनर को फायदा पहुंचाने के लिए पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर कानून में मनमाने बदलाव किए हैं.

1. साजान द्वीप क्या है और प्रोजेक्ट के तहत यहां क्या बनेगा?

यह शीतयुद्ध के दौर का एक पूर्व सैन्य अड्डा है, यहां हजारों बंकर और खुफिया सुरंग हैं.  प्रोजेक्ट के तहत इसे अल्ट्रा-लग्जरी इको-रिसॉर्ट में तब्दील करने की तैयारी है, जिसमें 5-स्टार और 7-स्टार स्तर के बुटीक होटल, प्राइवेट विला, स्पा, यॉट मरीना और हाई-एंड डाइनिंग स्पेस होंगे. प्रोजेक्ट के तहत यहां करीब 1.4 अरब डॉलर (लगभग 13,280 करोड़ रुपये) इन्वेस्ट होंगे. यह अल्बानिया का सबसे बड़ा द्वीप और मरीन नेशनल पार्क का हिस्सा है, जो लगभग 5.7 वर्ग किमी फैला हुआ है.

2. ज्वर्नेक कोस्टल आइलैंड क्या है और यहां क्या होगा?

यह व्लोरा तट के पास स्थित एक तटीय क्षेत्र है, जो संवेदनशील नारता लैगून से सटा हुआ है. यहां 1,000 से अधिक लग्जरी रेजिडेंशियल विला, बड़े ब्रांडेड होटल्स, गोल्फ कोर्स, सर्विस अपार्टमेंट्स, मरीना और रिटेल शॉपिंग हब बनाने की तैयारी है. इस इलाके में  1 अरब डॉलर से लेकर करीब 4.7 अरब डॉलर तक निवेश किया जाएगा. यह इलाका13 लाख वर्ग मीटर में फैला हुआ है.

सरकार का पक्ष क्या है?

इन 2 प्रोजेक्ट को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर एदी रामा सरकार की अपनी दलीलें हैं. सरकार का कहना है कि यह प्रोजेक्ट पूरी तरह कानूनी है और इससे देश की अर्थव्यवस्था और विकास को बड़ा फायदा होगा. प्रधानमंत्री एडी रामा का कहना है कि अल्बानिया को सिर्फ कम बजट वाले 'सस्ते बैकपैकर्स' की मंजिल नहीं बने रहना चाहिए, देश की तिजोरी भरने के लिए दुनिया के रईसों और लग्जरी टूरिस्ट्स को खींचना जरूरी है.

सरकार की तरफ से भी दावा किया गया है कि अरबों डॉलर के इन प्रोजेक्ट्स से देश में हजारों नई नौकरियां निकलेंगी और सड़कें-बुनियादी ढांचा सुधरेगा, उनका कहना है कि ये आधुनिक 'इको-रिसॉर्ट्स' होंगे, जो पर्यावरण और विकास के बीच तालमेल बनाकर काम करेंगे.  सरकार भले ही इन प्रोजेक्ट के जरिए टूरिस्म को बढ़ावा देने की बात कह रही है, लेकिन आलोचकों का सीधा आरोप है कि सरकार ने खास तौर पर डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर को जमीन सौंपने के लिए उनकी जरूरत के हिसाब से कानून में बदलाव किया और प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी.

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पत्रकारिता में 9 साल से सक्रिय भूपेंद्र कुमार राय Zee News में सीनियर सब एडिटर के तौर पर न्यूज टीम का हिस्सा हैं, देश विदेशी की खबरें कवर करते हैं. 2017 में ETV Bharat (हैदराबाद) से करियर की शुरुआत करने के बाद वे 2020 में Zee News पहुंचे, जहां 2022 तक काम किया. 2023 में News24 की स्पोर्ट्स टीम को लीड करने का मौका मिला. इसके बाद India Daily Live में बतौर चीफ सब एडिटर स्पोर्ट्स टीम के साथ जुड़े. 2024 में दोबारा News24 लौटे और नई स्पोर्ट्स वेबसाइट लॉन्चिंग का अहम हिस्सा रहे. अक्टूबर 2025 में News24 से अलविदा लेकर एक बार फिर Zee News पहुंचे हैं. खेलों में गहरी रुचि रखते हैं और क्रिकेट वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स, ओलंपिक गेम्स, हॉकी वर्ल्ड कप समेत बड़े खेल इवेंट को कवर करने का अनुभव है. ब्रेकिंग न्यूज, क्रिकेट एनालिसिस और किस्से-कहानियों पर अच्छी पकड़ है. जी न्यूज में खेल से जुड़ी खबरों के बाद अब न्यूज टीम के साथ रियलटाइम न्यूज पर काम कर रहे हैं. एक्सप्लेनर और किसी भी मुद्दे पर रिसर्च के साथ उसे आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं. आप Bhoopendra.Rai@zeemedia.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facebook से जुड़ सकते हैं.
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