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4 बीवी, 58 मासूमों वाला परिवार, गरीबी की मार से बेहाल; अब्बा को याद नहीं सारे बच्चों के नाम

अफगानिस्तान में एक पिता को अपने बच्चों को पालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन उसके परिवार में 5-6 नहीं बल्कि 58 बच्चे और 4 पत्नियां हैं. इस शख्स का नाम मोहम्मद सादिक है और वह एक कार डीलरशिप पर काम करते हैं.

4 बीवी, 58 मासूमों वाला परिवार, गरीबी की मार से बेहाल; अब्बा को याद नहीं सारे बच्चों के नाम
Image Credit: गरीबी के कारण परिवार का हाल बेहाल है.

4 बीवियां और 58 बच्चे. पढ़कर चौंक गए ना. यहां बात किसी फिल्म की नहीं बल्कि रियल लाइफ की हो रही है. इस परिवार में 63 लोग हैं. यानी एक पति, उसकी 4 पत्नियां और 58 बच्चे. परिवार पर गरीबी की मार इतनी ज्यादा है कि कई बच्चों को भूखा ही सोना पड़ता है. ये कहानी है 57 साल के अफगानिस्तानी नागरिक मोहम्मद सादिक की, जो अपने इतने बड़े परिवार के साथ उरुजगन प्रांत में रहते हैं. बीबीसी से बातचीत में मोहम्मद सादिक ने कहा कि उनको अपने सारे बच्चों तक के नाम भी याद नहीं हैं. उनको बच्चों का पेट भरने और इतना बड़ा परिवार पालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

सादिक ने खोए 14 बच्चे

उन्होंने बताया कि कभी-कभी परिवार के साथ खाना खाते समय जब वे बच्चों को गिनते हैं, तो पाते हैं कि कोई एक बच्चा कम है, क्योंकि वह कहीं और रह रहा होता है. रिपोर्ट के मुताबिक, सादिक और उनकी पत्नियों ने पिछले कुछ वर्षों में अपने 14 बच्चों को भी खो दिया है.

सादिक एक कार डीलरशिप पर काम करते हैं. उनका कहना है कि एक गाड़ी बिकने पर उन्हें करीबी 1,000 अफगानी मिलते हैं. उन्होंने बताया कि यह कमाई परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए काफी नहीं है, इसलिए घर चलाने में मदद करने के लिए उनके कुछ बच्चे भी काम करते हैं. कुछ बच्चे ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने के लिए कागज़ और प्लास्टिक इकट्ठा करते हैं.

दो महिलाएं पकाती हैं बच्चों के लिए खाना

इस परिवार में आमतौर पर दिन में दो बार खाना बनाता है. एक नाश्ता और दूसरा रात का खाना. खाना पकाने की जिम्मेदारी परिवार की दो महिलाओं की होती है. सर्दियों में, परिवार के सदस्य अपने कमरों के अंदर एक साथ बैठकर खाना खाते हैं, जबकि गर्मियों में वे आंगन में इकट्ठा होते हैं. सोने की जगह बहुत तंग है; कभी-कभी छह या सात लोग एक ही पतले कंबल में गुजारा करते हैं.

बीबीसी की रिपोर्ट में उस घर का भी जिक्र है, जहां यह परिवार रहता है.इस घर के कमरों में आम दरवाज़े और खिड़कियां नहीं हैं. दरवाज़ों की जगह वहां पतले पर्दे लगे हैं, जिसकी ओट लेकर नहाया जाता है. वहीं कपड़े और बर्तन भी धोए जाते हैं, और कभी-कभी उस जगह का इस्तेमाल शौचालय के रूप में भी होता है. इन मुश्किल हालात के बावजूद, सादिक ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को स्कूल भेजने की कोशिश की है, हालांकि पढ़ाई का खर्च एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.

'पैगंबर के अनुयायियों की संख्या बढ़ाना था मकसद'

सादिक ने BBC को बताया कि उनका बड़ा परिवार रखने का मकसद पैगंबर मुहम्मद के अनुयायियों की संख्या बढ़ाना था. उन्होंने इतने सारे बच्चे होने के व्यावहारिक नतीजों के बारे में भी बताया. उन्होंने एक वाकया याद करते हुए कहा कि एक बार शादी समारोह के दौरान, उन्होंने गलती से एक मौलवी को अपनी एक बेटी का गलत नाम बता दिया था. उन्होंने बताया कि वे अक्सर अपने बच्चों को 'बेटा' या 'बच्चा' कहकर बुलाते हैं, क्योंकि उन्हें हमेशा हर बच्चे का नाम याद नहीं रहता.

बीबीसी के मुताबिक, सादिक की चारों पत्नियों ने उनसे तब शादी की थी, जब उनकी उम्र 13 से 16 साल के बीच थी. सादिक ने बताया कि अपनी पहली पत्नी से शादी करते समय वे 20 साल के थे. उन्होंने यह भी बताया कि हर शादी से पहले, उन्हें मेहर चुकाने के लिए पैसे बचाने पड़ते थे, जिसमें समय लगता था.

'मुझे पढ़ना-लिखना नहीं आता'

किशोरावस्था में शादी करने और गर्भवती होने वाली लड़कियों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है, जबकि बार-बार गर्भवती होने से माताओं के स्वास्थ्य पर ज्यादा बोझ पड़ता है. अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों में, खास तौर पर दूर-दराज के इलाकों में मेडिकल सर्विस तक पहुंच आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. सादिक ने बताया कि वे पढ़-लिख नहीं सकते. उन्होंने अपने परिवार की मदद के लिए सरकार, सहायता संगठनों और कारोबारियों से गुहार लगाई है. उन्होंने बताया कि उनकी दो मुख्य उम्मीदें हैं. पहली बच्चों को शिक्षा और दूसरा भरपेट खाना.
 

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About the Author

Rachit Kumar

Rachit Kumar

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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