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ठंड की दस्तक के साथ ही उत्तराखंड का आसन वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व इन दिनों खूबसूरत रंग-बिरंगे विदेशी मेहमानों की चहचहाहट से गुलजार हो उठा है. साइबेरिया समेत मध्य एशिया के बर्फीले इलाकों से लगभग 5,000 मील का कठिन सफर तय करके हजारों प्रवासी पक्षी यहां पहुंच रहे हैं. देहरादून से महज 38 किलोमीटर दूर स्थित यह वेटलैंड इन दिनों पर्यटकों और बर्ड वॉचर्स के लिए किसी जन्नत से कम साबित नहीं हो रहा.
आसन बैराज 440 हेक्टेयर में फैला हुआ है, जिसने 2005 में भारत का पहला वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व बनने का गौरव हासिल किया. अपनी समृद्ध जैव विविधता और अनुकूल वातावरण के कारण यह जगह पक्षियों की पहली पसंद माना जाता है. यहां हर साल अक्टूबर से मार्च तक लगभग 6 से 8 हजार प्रवासी पक्षी प्रवास के लिए आते हैं.
इस शीतकालीन सत्र के शुरुआती दौर में ही अब तक अलग-अलग प्रजाति के करीब 2,000 पक्षी इस खूबसूरत झील में उतर चुके हैं.
आसन वेटलैंड में लगभग 240 प्रजातियों के देशी और विदेशी पक्षी देखे जाते रहे हैं. यहां पहुंचने वालों में सुरखाब, सीखपर, लाल चौंच, गुडगुडा, कुर्चिया बत्तख, सुर्खिया बगुला, बयारी बत्तख, बड़ा पन्कौआ, मलग बगुला, करचिया बगुला जैसी प्रजातियां शामिल हैं.
इन सबसे अलग यहां पहुंचने वाले देश विदेश के पर्यटकों के लिए साइबेरियन पक्षियों को देखना किसी सपने से कम नहीं है. इन विदेशी मेहमानों की आवाज से पूरा इलाका गुलजार दिख रहा है. ठंड खत्म होते ही इन पक्षियों का यहां से पलायन शुरू हो जाएगा.
यहां झील के शांत पानी पर तैरते और अठखेलियां करते इन साइबेरियन मेहमानों को करीब से देखना पर्यटकों के लिए बेहद रोमांचक अनुभव है. पर्यटक बोटिंग के जरिए या झील किनारे बैठकर इन सुंदर पक्षियों को निहार रहे हैं. पर्यटक दूर-दूर से इन्हें देखने के लिए आ रहे हैं. विदेशी मेहमानों की आमद को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद हो चुका है, ताकि इन मेहमानों की सुरक्षा में कोई चूक न हो.
(विकासनगर से मो. मुजम्मिल की रिपोर्ट)