दूसरे राज्यों का चक्कर खत्म! हल्द्वानी से चमकेंगे खेल सितारे, जानिए उत्तराखंड की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की खासियत
Uttarakhand First Sports University: हल्द्वानी के गौलापार में करीब 90 एकड़ भूमि पर उत्तराखंड की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का शुभारंभ और पहले शैक्षणिक सत्र का आगाज हो गया है. अब राज्य के एथलीटों को एडवांस ट्रेनिंग के लिए पटियाला या दिल्ली जैसे दूसरे राज्यों में नहीं भटकना पड़ेगा. उत्तराखंड खुद एक बड़ा 'स्पोर्ट्स हब' बनने जा रहा है. जानिए इसकी खासियत...
Uttarakhand First Sports University: उत्तराखंड के खिलाड़ियों को अब विश्वस्तरीय कोचिंग, हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पोर्ट्स साइंस की ट्रेनिंग के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा. राष्ट्रीय खेल दिवस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जिले के हल्द्वानी में राज्य के पहले खेल विश्वविद्यालय (Uttarakhand's first sports university) का औपचारिक शुभारंभ कर दिया है.
इसके साथ ही इसके पहले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत भी हो गई है और प्रथम चरण के निर्माण कार्यों का शिलान्यास व भूमि पूजन भी हो चुका है.
एक ही छत के नीचे मिलेंगी इंटरनेशनल स्तर की सुविधाएं
हल्द्वानी के गौलापार स्थित अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम परिसर में करीब 90 एकड़ (32 हेक्टेयर) भूमि पर यह स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी आकार ले रही है. अब तक राज्य के प्रतिभावान एथलीटों को आधुनिक सुविधाओं और एडवांस कोचिंग के लिए पटियाला, दिल्ली या बेंगलुरु जैसे बड़े खेल केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब देवभूमि के युवाओं को अपने ही राज्य में यह तमाम सुविधाएं उपलब्ध होंगी.
खिलाड़ियों को आधुनिक खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पोर्ट्स साइंस लैब और विश्वस्तरीय कोचिंग एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी. यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट तैयार करने में रीढ़ की हड्डी साबित होगा.
यूनिवर्सिटी की खासियतों पर एक नज़र
32 हेक्टेयर में फैला अत्याधुनिक कैंपस: वन भूमि हस्तांतरण की मंजूरी के साथ विश्वविद्यालय के विस्तार का रास्ता साफ हो चुका है.
₹43.50 करोड़ का शुरुआती बजट: पहले चरण में हॉस्टल और अन्य आधुनिक खेल सुविधाओं के निर्माण पर यह राशि खर्च की जाएगी.
स्पोर्ट्स साइंस और हाई-टेक कोचिंग: खिलाड़ियों को केवल पारंपरिक ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स साइंस लैब और 23 नई हाई-टेक खेल अकादमियों के जरिए आधुनिक खेल तकनीक से जोड़ा जाएगा.
स्थायी प्रशासनिक ढांचा: विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन के लिए कुलपति सहित 94 नियमित पदों को स्वीकृति दी जा चुकी है.
'देवभूमि' से 'खेल भूमि' की ओर ऐतिहासिक कदम
कार्यक्रम में खेल मंत्री रेखा आर्या और सांसद अजय भट्ट की उपस्थिति में राज्य का नाम रोशन करने वाले एथलीटों को सम्मानित भी किया गया. मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस खेल विश्वविद्यालय की शुरुआत से उत्तराखंड अब 'देवभूमि' और 'वीरभूमि' के साथ-साथ 'खेल भूमि' के रूप में अपनी नई पहचान बनाएगा. यह यूनिवर्सिटी न केवल उत्तराखंड के युवाओं के लिए पलायन रोकने का काम करेगी, बल्कि आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के नए चैंपियंस तैयार करने का मुख्य केंद्र बनेगी.
उत्तराखंड का यह पहला खेल विश्वविद्यालय न केवल राज्य की खेल प्रतिभाओं के लिए पलायन रोकने का मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि यह 'देवभूमि' के युवाओं को विश्व पटल पर 'खेल चैंपियंस' के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक क्रांति की शुरुआत है.