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Sundardhunga Valley Rare Bird Discovery: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित सुंदरढूंगा घाटी से प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई थी. अपनी अद्भुत प्राकृतिक खूबसूरती और ऊंचे ग्लेशियरों के लिए मशहूर इस घाटी में पहली बार अति-दुर्लभ पक्षी सटायर ट्रैगोपैन की उपस्थिति दर्ज की गई थी. यह पक्षी हिमालयी तीतरों की सबसे सुंदर और शर्मीली प्रजातियों में से एक माना जाता है. इस खोज ने न केवल पक्षी वैज्ञानिकों बल्कि पूरी दुनिया के पर्यावरण प्रेमियों को झूमने का मौका दे दिया था.
कैमरा ट्रैप अभियान और मिली सफलता
वन विभाग की टीम ने क्षेत्र में हिम तेंदुए की मौजूदगी का पता लगाने और वन्यजीवों की गणना के लिए पिंडारी, कफनी और सुंदरढूंगा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में 55 अत्याधुनिक कैमरा ट्रैप लगाए थे. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य तो हिम तेंदुए को खोजना था, लेकिन कैमरों में कैद हुई तस्वीरों ने सभी को चौंका दिया. सटायर ट्रैगोपैन के अलावा इन कैमरों में एक और शर्मीला पक्षी कोकलास तीतर भी दिखाई दिया. इससे पहले इसी अभियान के दौरान इस उच्च हिमाचली क्षेत्र में बंगाल टाइगर की उपस्थिति भी दर्ज की जा चुकी थी, जो इस पूरे मिशन की एक ऐतिहासिक सफलता था.
सटायर ट्रैगोपैन की खासियत और पहचान
सटायर ट्रैगोपैन अपने गहरे लाल और नारंगी रंग के चमकीले शरीर पर बने सफेद धब्बों के कारण बेहद आकर्षक लगता है. यह पक्षी मुख्य रूप से मध्य और पूर्वी हिमालय के 2400 से 4200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित घने और नम जंगलों में रहता है. इसका स्वभाव बेहद शर्मीला होता है और यह इंसानी आहट से बहुत दूर रहता है, जिसके कारण इसे आम तौर पर देख पाना लगभग नामुमकिन होता है. अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने इसे 'निकट संकटग्रस्त' श्रेणी में रखा है. बागेश्वर क्षेत्र में पहली बार इसका मिलना यह साबित करता है कि यहां का पर्यावरण बेहद समृद्ध है.
संरक्षण का संदेश और उज्ज्वल भविष्य
किसी भी क्षेत्र में दुर्लभ पक्षियों का दिखाई देना वहां के संतुलित और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतीक होता है. ई-बर्ड रिकॉर्ड के अनुसार इससे पहले यह पक्षी उत्तराखंड के मुनस्यारी क्षेत्र में देखा गया था, लेकिन बागेश्वर की सुंदरढूंगा घाटी में इसकी मौजूदगी वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से एक बहुत बड़ा और सकारात्मक कदम है. जलवायु परिवर्तन और इंसानी दखल के इस दौर में इन ग्लेशियर क्षेत्रों का सुरक्षित रहना इन प्रजातियों के अस्तित्व के लिए संजीवनी का काम कर रहा है. वन विभाग अब इस घाटी में और अधिक गहन अध्ययन चलाने की तैयारी कर रहा है, ताकि इन अनमोल पक्षियों और जीवों को बेहतर सुरक्षा प्रदान की जा सके.