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शुद्धीकरण विवाद पर नितिन नबीन का कांग्रेस पर हमला: रजवी बोले- दलित नेतृत्व की अनदेखी सही; राहुल को ‘विदेशी कल्चर’ बयान से असहमति

Haldwani Manch Shuddhikaran: हल्द्वानी में कांग्रेस रैली के मंच शुद्धीकरण विवाद के बीच मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने दलितों-मुसलमानों की उपेक्षा की. इसी वजह से दोनों वर्ग उससे दूर हुए, हालांकि उन्होंने राहुल गांधी को विदेशी बताने वाले भाजपा बयान को खारिज कर दिया.

Written By Jyoti Kumari
Published: Sep 10, 2026, 12:32 PM IST | Updated: Sep 10, 2026, 12:38 PM IST
Image Credit: Haldwani Manch Shuddhikaran
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Muslim and Dalit Vote Bank: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के समापन के बाद भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा मंच का शुद्धीकरण करने की घटना ने राज्य की राजनीति में नया तूल पकड़ लिया है. इस वाकये के बाद सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई.  इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के हल्द्वानी दौरे के दौरान दिए गए बयानों ने इस राजनीतिक विवाद को और गहरा दिया है.  नितिन नबीन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए उन्हें विदेशी कल्चर से प्रभावित बताया और कांग्रेस पार्टी पर दलितों की उपेक्षा करने का बड़ा आरोप लगाया.

ऐतिहासिक संदर्भ में दलित नेतृत्व की अनदेखी

भाजपा अध्यक्ष के इस बयान पर आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी की प्रतिक्रिया सामने आई है.  पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मौलाना रजवी ने कहा कि यदि इतिहास के पन्नों को निष्पक्षता से देखा जाए, तो नितिन नबीन का यह दावा सही साबित होता है कि कांग्रेस ने दलित नेतृत्व को पनपने नहीं दिया.

मौलाना ने ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी के बाद डॉ. भीमराव अंबेडकर ने 1952 में नॉर्थ बॉम्बे से अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था.  वहां कांग्रेस के उम्मीदवार ने उन्हें हरा दिया था.  इसके बाद 1954 में महाराष्ट्र के भंडारा जिले में हुए उप-चुनाव में भी डॉ. अंबेडकर का सामना कांग्रेस प्रत्याशी से हुआ और उन्हें फिर से हार का सामना करना पड़ा.  मौलाना के अनुसार, यह सोचने वाली बात है कि कांग्रेस चाहती तो डॉ. अंबेडकर का समर्थन करके उन्हें आसानी से संसद पहुंचा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया.

दलितों और मुसलमानों का कांग्रेस से मोहभंग

मौलाना रजवी ने आगे कहा कि कांग्रेस की कुछ नीतियों और रवैये के कारण दलित और मुस्लिम समुदाय उससे धीरे-धीरे दूर होते चले गए.  जब दलित समाज ने इस उपेक्षा को महसूस किया, तब कांशीराम जैसी महान शख्सियत का उभार हुआ.  उन्होंने दलितों को एकजुट करने की एक व्यापक मुहिम चलाई, जिसमें उन्हें बड़ी सफलता मिली और दलितों को अपना स्वतंत्र राजनीतिक मंच मिला.

दूसरी ओर, 1987 में वी.पी. सिंह ने कांग्रेस छोड़कर जन मोर्चा बनाया, जो बाद में जनता दल बना.  मुसलमानों की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और रोजगा​री की समस्याओं पर कांग्रेस द्वारा ध्यान न दिए जाने के कारण मुस्लिम समुदाय भी कांग्रेस का साथ छोड़कर वी.पी. सिंह और जनता दल के साथ जुड़ गया. इसके चलते देश में दलितों और मुसलमानों की एक नई राजनीतिक लामबंदी हुई, जिससे कांग्रेस की पकड़ कमजोर होती चली गई.  मौलाना ने निष्कर्ष निकाला कि इस इतिहास को देखते हुए नितिन नबीन का यह कथन पूरी तरह दुरुस्त है.

राहुल गांधी पर नितिन नबीन के बयान से असहमति

हालांकि, मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने राहुल गांधी को लेकर दिए गए नितिन नबीन के बयान को खारिज कर दिया.  उन्होंने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी पूरी तरह से भारतीय संस्कृति से जुड़े व्यक्ति हैं, जिनका पालन-पोषण और विकास इसी देश की मिट्टी में हुआ है.  इसलिए राहुल गांधी पर विदेशी कल्चर का आरोप लगाना सही नहीं है और वे इस बात से बिल्कुल इत्तेफाक नहीं रखते हैं.

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About the Author

ज्योति कुमारी डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सितंबर 2025 से काम कर रही हैं. ज्योति मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर तथ्य-आधारित, विश्लेषणात्मक और निष्पक्ष डिजिटल खबरें लिखती हैं. जेंडर से जुड़े संवेदनशील विषयों और जनसरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना उनकी पत्रकारिता का मुख्य केंद्र रहा है.ज़ी मीडिया से जुड़ने से पहले, ज्योति ने स्वतंत्र लेखक के रूप में कार्य किया. इस दौरान उन्होंने लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय, महिलाओं के अधिकारों और जेंडर से जुड़े मुद्दों पर गहन और विश्लेषणात्मक लेख लिखे. ज्योति के पास यूपी-उत्तराखंड की राजनीति, प्रशासनिक फैसलों, सामाजिक घटनाक्रमों और ट्रेंडिंग मुद्दों पर दैनिक डिजिटल कवरेज, विश्लेषण और तथ्य-जांच पर पकड़ है.ज्योति ने देश के अग्रणी शिक्षण संस्थान जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. जामिया में उनकी अकादमिक पृष्ठभूमि ने उनकी रिसर्च, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और मीडिया एथिक्स (पत्रकारिता के मूल्यों) को मजबूत किया. पत्रकारिता और लेखन के अलावा, ज्योति को पुस्तकें और साहित्य पढ़ने का गहरा शौक है। समसामयिक विषयों, सामाजिक इतिहास और विभिन्न विधाओं की किताबें पढ़ना उनकी विश्लेषणात्मक सोच और लेखन शैली को और अधिक समृद्ध बनाता है.ज्योति कुमारी से आप jktiwari1998@gmail.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप ज्योति कुमारी से एक्स (ट्विटर), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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