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गांधी जी के सुकून का 'स्विट्जरलैंड': कौसानी की वादियों में आज भी गूंजती है बापू की 'अनासक्ति', जानें क्यों उमड़ते हैं पर्यटक?

Gandhi Jayanti Special: 1929 में महात्मा गांधी केवल 2 दिन के लिए कौसानी आए थे, लेकिन यहां की खूबसूरती से प्रभावित होकर 14 दिन रुके. उन्होंने कौसानी को 'भारत का स्विट्जरलैंड' कहा और यहीं अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'अनासक्ति योग' की भूमिका लिखी. इतना ही नहीं, बापू ने कौसानी प्रवास के दौरान कुमाऊं में आजादी की अलख जगाई. आज सुकून भरे माहौल और होम-स्टे में पहाड़ी व्यंजनों के आनंद के लिए यह पर्यटकों की पहली पसंद है.

Written By Pooja Singh
Published: Oct 02, 2026, 02:05 PM IST | Updated: Oct 02, 2026, 02:08 PM IST
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Gandhi Jayanti Special: बर्फ से ढकी हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियां, चाय के हरे-भरे बागान और वादियों में पसरी अद्भुत शांति...यह खूबसूरती है उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में बसे कौसानी की. साल 1929 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जब महज दो दिन के लिए इस पहाड़ी गांव में आए थे, तो यहां के मुग्ध कर देने वाली खूबसूरती में ऐसे रमे कि 14 दिनों तक यहीं के होकर रह गए. कौसानी की इसी अलौकिक सुंदरता से अभिभूत होकर बापू ने इसे 'भारत का स्विट्जरलैंड' नाम दिया था. आज भी यह जगह न सिर्फ प्रकृति प्रेमियों के लिए जन्नत है, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सुनहरे इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए है.

जब कौसानी बनी 'अनासक्ति योग' की तपोभूमि
कौसानी प्रवास के दौरान ही महात्मा गांधी ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'अनासक्ति योग' की भूमिका लिखी थी. जिस स्थान पर वे ठहरे थे, वह आज 'अनासक्ति आश्रम' (गांधी आश्रम) के नाम से जाना जाता है. यहां बापू से जुड़ी कई दुर्लभ तस्वीरें और ऐतिहासिक पांडुलिपियां आज भी संजोकर रखी गई हैं.

ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ चले सफल कुली बेगार आंदोलन से प्रभावित होकर गांधी जी ने पूरे कुमाऊं क्षेत्र में आजादी की अलख जगाई थी. अपनी 22 दिवसीय कुमाऊं यात्रा के दौरान उन्होंने छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों पर करारा प्रहार किया. आंदोलन के लिए दान में मिले 24 हजार रुपये उन्होंने हरिजन कोष में समर्पित कर दिए. इसी यात्रा में बागेश्वर प्रवास के दौरान स्थानीय निवासी जीत सिंह टंगड़िया ने बापू को एक खास चरखा भेंट किया था, जो कम समय में अधिक ऊन कातता था. गांधी जी ने इसे 'बागेश्वरी चरखा' नाम दिया और वर्धा आश्रम में भी इसे मंगवाया.

प्रकृति का अद्भुत नजारा, पर्यटन आकर्षण
महानगरों की चिलचिलाती धूप और भागदौड़ से दूर कौसानी पर्यटकों के लिए सुकून की सबसे मुफीद जगह है. मौसम साफ होने पर यहां से नंदा देवी, त्रिशूल और नंदाकोट जैसी हिमालयी श्रृंखलाएं चांदी की तरह चमकती नजर आती हैं. इसके अलावा, सोमेश्वर, गरुड़ और बैजनाथ कत्यूरी की सुंदर घाटियों का दृश्य पर्यटकों का मन मोह लेता है.

कौसानी में आप मशहूर चाय बागानों की सैर कर सकते हैं, ऐतिहासिक अनासक्ति आश्रम में वक्त बिता सकते हैं और स्थानीय पहाड़ी व्यंजनों का लुत्फ उठा सकते हैं. जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग पर्यटकों के लिए बेहतर होम-स्टे और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है.

कौसानी कैसे पहुंचे?
सड़क मार्ग: कौसानी दिल्ली, अल्मोड़ा, रानीखेत और नैनीताल से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा है. राज्य परिवहन और निजी बसें आसानी से उपलब्ध हैं.
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम (132 किमी) है, जो दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता से सीधा जुड़ा है. स्टेशन से टैक्सी या बस ले सकते हैं.
हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर (162 किमी) है, जहां से कौसानी के लिए सीधी टैक्सी सेवाएं मिलती हैं.

कौसानी महज एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि इतिहास और कुदरत का एक अनूठा संगम है. अगर आप भी हिमालय की बर्फीली चोटियों का दीदार करते हुए बापू के विचारों और मानसिक शांति को महसूस करना चाहते हैं, तो इस वीकेंड या छुट्टियों में कौसानी की हसीन वादियों का रुख जरूर करें.

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About the Author

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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