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3 महीने बाद उत्तराखंड लौटे हरीश रावत: नारसन से हरिद्वार तक जुटी समर्थकों की भीड़, चुनावी सरगर्मी बढ़ी

Uttarakhand News: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गाजे बाजे के साथ स्वागत किया. हरीश रावत के उत्तराखंड लौटने पर सियासी हलचल मच गई है.

3 महीने बाद उत्तराखंड लौटे हरीश रावत: नारसन से हरिद्वार तक जुटी समर्थकों की भीड़, चुनावी सरगर्मी बढ़ी
Image Credit: Harish Rawat

राम अनुज/देहरादून: करीब तीन महीने का लंबा समय बीतने और स्वास्थ्य लाभ लेने के बाद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत रविवार को राज्य वापस लौट आए हैं. उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश बॉर्डर 'नारसन' पहुंचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गाजे-बाजे और नारों के साथ उनका स्वागत किया. हालांकि, यह स्वागत सिर्फ उनके स्वास्थ्य लाभ लेकर लौटने की खुशी तक सीमित नहीं था, इसे पूरी तरह से एक बड़े राजनीतिक 'शक्ति प्रदर्शन' के तौर पर देखा जा रहा है.

तीन महीने बाद उत्तराखंड लौटे हरीश रावत 
​दरअसल, बीते दिनों हरीश रावत के बेहद करीबी और पूर्व ओएसडी (OSD) चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की कार्रवाई की थी, जिसमें कई दस्तावेज और सामान बरामद किए जाने का दावा किया गया. इस कार्रवाई के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में तमाम तरह की चर्चाएं गर्म थीं और हरीश रावत के देहरादून न पहुंचने को लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े किए जा रहे थे.

नारसन से लेकर हरिद्वार तक भारी भीड़ 
​इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए हरीश रावत जब सीमा पर पहुंचे, तो नारसन से लेकर हरिद्वार और देहरादून तक समर्थकों भीड़ देखी गई. उनके स्वागत में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, विधायक ममता राकेश, विधायक हरीश धामी, विधायक अवधेश चौधरी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे. ​हरिद्वार पहुंचने पर पूर्व मुख्यमंत्री ने मां गंगा को दूध अर्पित कर पूजा-अर्चना की. मीडिया से बात करते हुए हरीश रावत ने भावुक लहजे में कहा कि उनके खिलाफ जिस तरह की साजिश रची जा रही है, उससे मां गंगा ही उनकी रक्षा करेंगी.

निष्पक्ष कमीशन से जांच कराने की मांग 
उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी निष्पक्ष कमीशन से कराई जानी चाहिए ताकि 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो सके. इसके साथ ही उन्होंने अपने पूर्व ओएसडी के खिलाफ हुई ED की कार्रवाई को शुद्ध रूप से राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया. ​हरीश रावत के इस कदम को पार्टी नेताओं का भी पूरा समर्थन मिल रहा है. कांग्रेस विधायक आदेश चौधरी ने कहा कि हरीश रावत के उत्तराखंड लौटने से पार्टी को मजबूत नेतृत्व मिलेगा और कांग्रेस 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव में और बेहतर प्रदर्शन करेगी.

पूर्व मुख्यमंत्री को फंसाने की कोशिश की जा रही 
वहीं, कांग्रेस उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि हरीश रावत केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक दलों में एक सर्वमान्य नेता हैं और उनका कद किसी भी शक्ति प्रदर्शन से कहीं बहुत बड़ा है. पार्टी के आम कार्यकर्ताओं का भी यही मानना है कि एक सुनियोजित साजिश के तहत पूर्व मुख्यमंत्री को फंसाने की कोशिश की जा रही है.
​हरीश रावत का यह शक्ति प्रदर्शन जहां उनके समर्थकों का उत्साह बढ़ा रहा है. वहीं, इससे प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का एक अलग चेहरा भी सामने आया है. पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी का मुख्य नेतृत्व नदारद रहा. स्वागत कार्यक्रमों में न तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नजर आए और न ही पार्टी के अन्य दिग्गज विधायक.

कांग्रेस के भीतर अपनी अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की होड़
​ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रदेश कांग्रेस का मौजूदा नेतृत्व हरीश रावत के इस आक्रामक रुख और नेतृत्व के साथ खड़ा होगा? इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि राज्य में कांग्रेस के भीतर अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन बचाने और अपनी जगह तलाशने की होड़ अब भी बदस्तूर जारी है. 

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About the Author

Amitesh Pandey

Amitesh Pandey

अमितेश कुमार पांडेय डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले अमितेश को मीडिया जगत में 8 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.अमितेश के पास डेस्क एडिटिंग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी व्यावहारिक अनुभव है. अमितेश ने उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों- लखनऊ, प्रयागराज और गाज़ियाबाद में जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है. स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ पेपर अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान में काम करने का अनुभव है. अमितेश ने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रयागराज से की है.अमितेश पांडेय से आप amitesh.pandey@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप अमितेश से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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