NEET काउंसलिंग में फर्जीवाड़ा: फ्रीडम फाइटर के नाम पर 4 छात्राओं ने MBBS में लिया दाखिला, ऐसे हुए बेनकाब
Dehradun News: देहरादून में स्वतंत्रता संग्राम सेनीनी कोर्ट से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर एमबीबीएस में प्रवेश पाने का मामला सामने आया है. 4 छात्राओं ने एक ही फ्रीडम फाइटर का अपना पूर्वज बताकर फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लिया.
राम अनुज/देहरादून: देहरादून में नीट काउंसलिंग के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के जरिए एमबीबीएस (MBBS) सीटों पर दाखिला लेने का एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. दून मेडिकल कॉलेज समेत राज्य के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में यह पूरा खेल खेला जा रहा था.
डीएम ने बैठाई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के डीएम आशीष चौहान ने संयुक्त जांच समिति का गठन किया. राजस्व विभाग द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में खुलासा हुआ कि सरकारी मूल पंजिका में दर्ज पतों और स्वतंत्रता सेनानियों के नामों का कोई वजूद ही नहीं था.
फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया
जांच समिति ने पाया कि तृप्ति, खुशी, परी और स्वाति जैसी छात्राओं ने 'धर्मवीर वर्मा' नाम के व्यक्ति को अपना पूर्वज बताते हुए फर्जी प्रमाण पत्र पेश किए थे. चौंकाने वाली बात यह रही कि इसी एक नाम का इस्तेमाल करके करीब 6 अभ्यर्थियों ने सीटें हथियाने की कोशिश की थी.
फर्जी पाए गए पते
इसके अलावा, प्रमाण पत्रों में दिए गए देहरादून के आवासीय पते पूरी तरह फर्जी निकले और जमा किए गए शपथ पत्र भी अधूरे पाए गए, जब सरकारी रिकॉर्ड खंगाला गया, तो जिला प्रशासन के पास इस नाम के किसी स्वतंत्रता सेनानी का कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं मिला. देहरादून के डीएम का कहना है कि पूरे मामले को लेकर जांच सेटअप कर दी गई है.
आरोपी छात्राओं के MBBS प्रवेश रद्द किए गए
फर्जीवाड़ा साबित होते ही चिकित्सा शिक्षा विभाग और एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया. चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने तत्काल प्रभाव से आरोपी चारों छात्राओं के एमबीबीएस दाखिले रद्द कर दिए और इन सीटों को आगामी काउंसलिंग के लिए दोबारा रिक्त घोषित कर दिया.
क्लेमेंट टाउन और रायपुर थानों में एफआईआर दर्ज
इसके साथ ही देहरादून के क्लेमेंट टाउन और रायपुर थानों में आरोपी छात्राओं और उनके परिजनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज कराए गए हैं. आरटीआई एक्टिविस्ट प्रदीप बहुगुणा का कहना है कि उन्हें शक हुआ था और उन्होंने आरटीआई के जरिए कई मामलों का खुलासा किया कि किस तरह से एक गिरोह काम कर रहा है, जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए फ्रीडम फाइटर का प्रमाण पत्र बनवा रहा है.
पुलिस प्रशासन कड़ियों को जोड़ने में जुटा
अब पुलिस और प्रशासन इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुट गए हैं. मोबाइल नंबर, ईमेल और आईपी एड्रेस की डिजिटल ट्रेल खंगाली जा रही है, जिससे इस बात का गहरा अंदेशा जताया जा रहा है कि इसके पीछे फर्जी दस्तावेज बनाने वाला कोई बड़ा संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है. फर्जीवाड़े का दायरा बढ़ता देख जिला प्रशासन अब अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य आरक्षित श्रेणियों के तहत जमा किए गए सभी संदेहास्पद प्रमाण पत्रों की भी गहनता से जांच कर रहा है.