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NEET काउंसलिंग में फर्जीवाड़ा: फ्रीडम फाइटर के नाम पर 4 छात्राओं ने MBBS में ​लिया दाखिला, ऐसे हुए बेनकाब

Dehradun News: देहरादून में स्वतंत्रता संग्राम सेनीनी कोर्ट से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर एमबीबीएस में प्रवेश पाने का मामला सामने आया है. 4 छात्राओं ने एक ही फ्रीडम फाइटर का अपना पूर्वज बताकर फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लिया.

Written By Amitesh Pandey
Published: Sep 17, 2026, 05:34 PM IST | Updated: Sep 17, 2026, 05:37 PM IST
Image Credit: AI Image
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राम अनुज/देहरादून: देहरादून में नीट काउंसलिंग के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के जरिए एमबीबीएस (MBBS) सीटों पर दाखिला लेने का एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. दून मेडिकल कॉलेज समेत राज्य के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में यह पूरा खेल खेला जा रहा था.

डीएम ने बैठाई जांच 
मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के डीएम आशीष चौहान ने संयुक्त जांच समिति का गठन किया. राजस्व विभाग द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में खुलासा हुआ कि सरकारी मूल पंजिका में दर्ज पतों और स्वतंत्रता सेनानियों के नामों का कोई वजूद ही नहीं था.

फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया
​जांच समिति ने पाया कि तृप्ति, खुशी, परी और स्वाति जैसी छात्राओं ने 'धर्मवीर वर्मा' नाम के व्यक्ति को अपना पूर्वज बताते हुए फर्जी प्रमाण पत्र पेश किए थे. चौंकाने वाली बात यह रही कि इसी एक नाम का इस्तेमाल करके करीब 6 अभ्यर्थियों ने सीटें हथियाने की कोशिश की थी.

फर्जी पाए गए पते 
इसके अलावा, प्रमाण पत्रों में दिए गए देहरादून के आवासीय पते पूरी तरह फर्जी निकले और जमा किए गए शपथ पत्र भी अधूरे पाए गए, जब सरकारी रिकॉर्ड खंगाला गया, तो जिला प्रशासन के पास इस नाम के किसी स्वतंत्रता सेनानी का कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं मिला. देहरादून के डीएम का कहना है कि पूरे मामले को लेकर जांच सेटअप कर दी गई है.

आरोपी छात्राओं के MBBS प्रवेश रद्द किए गए 
​फर्जीवाड़ा साबित होते ही चिकित्सा शिक्षा विभाग और एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया. चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने तत्काल प्रभाव से आरोपी चारों छात्राओं के एमबीबीएस दाखिले रद्द कर दिए और इन सीटों को आगामी काउंसलिंग के लिए दोबारा रिक्त घोषित कर दिया.

क्लेमेंट टाउन और रायपुर थानों में एफआईआर दर्ज 
इसके साथ ही देहरादून के क्लेमेंट टाउन और रायपुर थानों में आरोपी छात्राओं और उनके परिजनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज कराए गए हैं. आरटीआई एक्टिविस्ट प्रदीप बहुगुणा का कहना है कि उन्हें शक हुआ था और उन्होंने आरटीआई के जरिए कई मामलों का खुलासा किया कि किस तरह से एक गिरोह काम कर रहा है, जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए फ्रीडम फाइटर का प्रमाण पत्र बनवा रहा है. ​

पुलिस प्रशासन कड़ियों को जोड़ने में जुटा 
अब पुलिस और प्रशासन इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुट गए हैं. मोबाइल नंबर, ईमेल और आईपी एड्रेस की डिजिटल ट्रेल खंगाली जा रही है, जिससे इस बात का गहरा अंदेशा जताया जा रहा है कि इसके पीछे फर्जी दस्तावेज बनाने वाला कोई बड़ा संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है. फर्जीवाड़े का दायरा बढ़ता देख जिला प्रशासन अब अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य आरक्षित श्रेणियों के तहत जमा किए गए सभी संदेहास्पद प्रमाण पत्रों की भी गहनता से जांच कर रहा है. 
 

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About the Author

अमितेश कुमार पांडेय डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले अमितेश को मीडिया जगत में 8 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.अमितेश के पास डेस्क एडिटिंग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी व्यावहारिक अनुभव है. अमितेश ने उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों- लखनऊ, प्रयागराज और गाज़ियाबाद में जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है. स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ पेपर अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान में काम करने का अनुभव है. अमितेश ने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रयागराज से की है.अमितेश पांडेय से आप amitesh.pandey@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप अमितेश से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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