कौन हैं प्रो. संगीता श्रीवास्तव: इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की कुलपति का दूसरी बार बढ़ा कार्यकाल
Allahabad University: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव का कार्यकाल दूसरी बार 5 साल के लिए बढ़ा दिया है.
मोहम्मद गुफरान/प्रयागराज: इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव को बड़ी सौगात मिली है. राष्ट्रपति व विश्वविद्यालय की विजिटर द्रौपदी मुर्मु ने प्रो. संगीता श्रीवास्तव का कार्यकाल दूसरी बार 5 साल के लिए बढ़ा दिया है. उनका नया कार्यकाल 16 सितंबर से प्रभावी माना जाएगा. खास बात यह है कि उनका कार्यकाल इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के 139वें स्थापना दिवस के मौके पर बढ़ाया गया है.
दूसरी बार पांच साल का कार्यकाल बढ़ा
प्रो. संगीता श्रीवास्तव इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पहली महिला कुलपति हैं. अब प्रो. संगीता श्रीवास्तव के नाम एक और रिकॉर्ड दर्ज हो गया है. वह इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की पहली कुलपति बन गई हैं, जिनका लगातार दूसरी बार पांच साल का कार्यकाल बढ़ाया गया है. शिक्षा मंत्रालय की ओर से 22 सितंबर 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि प्रो. संगीता श्रीवास्तव का दूसरा कार्यकाल 70 वर्ष की आयु या पांच साल तक, जो पहले हो तक होगा.
कौन हैं प्रो. संगीता श्रीवास्तव?
बता दें कि प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने 30 नवंबर 2020 को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की पहली महिला कुलपति बनाई गई थीं. उनका पहला कार्यकाल 30 नवंबर 2020 से 29 नवंबर 2025 तक पांच साल का रहा. वहीं, नए कुलपति के चयन की प्रक्रिया पूरी होने तक नवंबर 2025 में उनका कार्यकाल अग्रिम आदेशों तक बढ़ा दिया गया था. इससे पहले वह 25 जून 2018 को प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) यूनिवर्सिटी की कुलपति नियुक्त की गई थीं. प्रो. संगीता श्रीवास्तव की पढ़ाई लिखाई प्रयागराज से ही हुई है.
प्रयागराज से हुई है पढ़ाई लिखाई
उन्होंने सेंट मैरीज कॉन्वेंट से 12वीं की पढ़ाई की है. इसके बाद वह एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट नैनी से BSc की पढ़ाई की. फिर वह मध्य प्रदेश चली गईं. वहां जबलपुर विश्वविद्यालय से MSc किया. इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से PhD की. शिक्षिका के रूप में उनका करियर इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शुरू हुआ. उन्होंने गृह विज्ञान विभाग में लेक्चरर के रूप में शिक्षण कार्य शुरू कीं. उस समय गृह विज्ञान, बायोकेमिस्ट्री विभाग का हिस्सा था. 2002 में गृह विज्ञान विभाग अलग विभाग बना तो वह इसकी विभागाध्यक्ष बनाई गईं.