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त्योहारों के बीच 'सियासी' दिवाली: यूपी में 26 सीटों पर शह-मात का खेल, बसपा शून्य तो बीजेपी का पलड़ा भारी; पढ़ें पूरा समीकरण

UP Elections: उत्तर प्रदेश में नवंबर महीने में दीपों के साथ सियासी दलों के समीकरण भी सजने लगेंगे. प्रदेश में 2 महीने के भीतर राज्यसभा की 10 सीटों और विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव हैं. इसको लेकर सियासी दलों में गुणा-गणित तेज हो गया है. जानिए यूपी में राज्यसभा और MLC चुनावों का पूरा राजनीतिक गणित...

Written By Pooja Singh
Published: Sep 22, 2026, 10:33 AM IST | Updated: Sep 22, 2026, 11:22 AM IST
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UP Elections/ विशाल रघुवंशी: उत्तर प्रदेश में पितृपक्ष खत्म होते ही जहां एक तरफ दुर्गापूजा, दीपावली और छठ जैसे त्योहारों की रौनक देखने को मिलेगी, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों में बैठकों और सियासी तालमेल का दौर चरम पर पहुंचने वाला है. वजह साफ है आगामी दो महीनों के भीतर प्रदेश से उच्च सदनों की कुल 26 सीटों पर नए प्रतिनिधियों का चुनाव होना है. जिनमें राज्यसभा की 10 और विधान परिषद की 16 सीटें हैं.

25 नवंबर को राज्यसभा की 10 सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. यूपी में राज्यसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने अधिसूचना जारी कर दी है. उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटें और उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट मिलाकर कुल 11 सीटों पर 16 अक्टूबर को चुनाव होने वाले हैं. वहीं, यूपी में 11 एमएलसी सीट पर चुनाव का ऐलान हो गया है. 23 अक्टूबर को एमएलसी चुनाव की वोटिंग होगी और 29 सिंतबर से नामांकन शुरू होंगे.

किनका कार्यकाल हो रहा है समाप्त?
वर्तमान में जिन 10 सीटों पर कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें से 8 सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP), 1 सीट समाजवादी पार्टी (SP) और 1 सीट बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पास हैं. बीजेपी के सदस्यों में पूर्व डीजीपी बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बी. एल. वर्मा शामिल हैं. इसके अलावा डॉ. दिनेश शर्मा की सीट भी खाली हुई है, जिन्होंने अंडमान और निकोबार का उपराज्यपाल बनने के बाद इस्तीफा दे दिया था.

वहीं समाजवादी पार्टी से पार्टी के राष्ट्रीय मुख्य महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी से रामजी गौतम का कार्यकाल खत्म हो रहा है.  

7 सीटें पक्की, 8वीं पर भी मजबूत दावा
बीजेपी के पास अपने विधायकों के अलावा सहयोगी दलों (अपना दल एस, निषाद पार्टी, रालोद) और समर्थित निर्दलीय विधायकों का मजबूत साथ है. इस संख्या बल के आधार पर एनडीए अपने 7 प्रत्याशियों को बहुत आसानी से राज्यसभा भेज सकती है. 7 सीटें सुरक्षित करने के बाद भी बीजेपी गठबंधन के पास जो अतिरिक्त वोट बचेंगे, वे 10वीं सीट (बीजेपी के दावे वाली 8वीं सीट) के लिए दूसरी वरीयता की गिनती में बेहद अहम साबित होंगे. इन अतिरिक्त वोटों की बदौलत अंतिम सीट पर भी बीजेपी का ही पलड़ा भारी रहने के पूरे आसार हैं.

समाजवादी पार्टी और विपक्ष, 2 सीटें सुरक्षित
समाजवादी पार्टी के अपने विधायकों और मुख्य विपक्षी सहयोगियों के बल पर पार्टी दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों की जीत तय मानकर चल रही है. दो सीटें आराम से निकालने के बाद सपा के पास भी कुछ अतिरिक्त वोट बचेंगे, लेकिन वे तीसरी सीट हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे. यही वजह है कि सपा अपने मुख्य दो चेहरों को ही प्राथमिकता के साथ उच्च सदन में भेजने पर फोकस करेगी.

शून्य पर सिमटने की कगार पर बसपा
विधानसभा में विधायकों की संख्या बहुत कम होने के कारण बसपा इस चुनाव में मुकाबला करने की स्थिति में नहीं है. राज्यसभा में अपने इकलौते सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से संसद के उच्च सदन में बसपा का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा.  

विधान परिषद की 16 सीटों का समीकरण
राज्यसभा चुनावों के ठीक बाद 6 दिसंबर को विधान परिषद में स्नातक कोटे की 5 और शिक्षक कोटे की 11 सीटों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. रिक्त होने वाली स्नातक सीटों में वाराणसी, इलाहाबाद-झांसी, लखनऊ, आगरा और मेरठ खंड शामिल हैं. वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में गोरखपुर-फैजाबाद, आगरा, बरेली-मुरादाबाद, लखनऊ, मेरठ और वाराणसी सीटें चुनावी अखाड़े का हिस्सा होंगी.

अक्टूबर में ही होंगे चुनाव
शिक्षक प्रतिनिधियों का चुनाव शिक्षक एवं स्नातक प्रतिनिधियों का चुनाव स्नातक करेंगे. चुनाव कार्य में बीएलओ से लेकर पीठासीन अधिकारी तक की भूमिका में शिक्षक ही लगाए जाते हैं. प्रदेश में 1 दिसंबर से 4 जनवरी तक जनगणना होगी, इसमें भी 5.5 लाख से अधिक शिक्षक, कर्मचारी जुटेंगे. इसलिए, एमएलसी के चुनाव की प्रक्रिया इससे पहले पूरी करनी होगी. ऐसे में इन सीटों पर भी अक्टूबर में ही चुनाव होंगे.

7-8 दिन तक चलती है नामांकन प्रक्रिया
राज्यसभा की अधिसूचना से लेकर मतगणना तक की प्रक्रिया में अमूमन 20 दिन लगते हैं. अधिसूचना जारी होने के बाद 7-8 दिन तक नामांकन प्रक्रिया चलती है. नामांकन खत्म होने के अगले दिन पर्चों की स्क्रूटनी और उसके दो दिन बाद नाम वापसी का मौका होता है. नाम वापसी के लगभग 7 दिन बाद मतदान की तारीख होती है और उसी दिन शाम को नतीजे घोषित कर दिए जाते हैं. 25 नवंबर को कुल खाली होने वाली 11 सीटों में से 10 यूपी और एक उत्तराखंड की हैं.  

शून्य पर सिमट जाएगी बसपा?
यूपी विधानसभा में 403 सीटें हैं. पिछले एक साल के भीतर विधानसभा के 6 सदस्यों का निधन हो चुका है. इसलिए 397 सदस्य ही राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चेहरे चुनेंगे. राज्यसभा की एक सीट का कोटा= [कुल विधायक ÷ (रिक्त सीटें + 1)] + 1 के आधार पर तय करता है. इस आधार पर प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए 37 वोटों की जरूरत होगी. विधानसभा में बसपा शून्य हो चुकी है. राज्यसभा में उसके इकलौते सदस्य का कार्यकाल खत्म होने के बाद पार्टी वहां भी शून्य पर पहुंच जाएगी.

जानिए कौन देगा किसका साथ?
सपा के पास 101 विधायक हैं. ऐसे में 2 सीटें वह आसानी से जीत जाएगी और 7 वोट अतिरिक्त बचेंगे. कांग्रेस के 2 विधायकों का साथ मिला तो 9 अतिरिक्त वोट होगें. बीजेपी के पास अपने 256 विधायक हैं. सहयोगी दलों की संख्या 33 है. ऐसे में यह संख्या 239 पहुंच जाती है. 3 असंबद्ध सदस्य और राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो विधायक भी बीजेपी का ही साथ देते आए हैं. इनके साथ के बाद बीजेपी की अगुआई वाली एनडीए के पास सदस्य संख्या 294 पहुंच जाती है. हालांकि, सुभासपा के 2 विधायकों की निष्ठा सपा की ओर है.

किसकी होगी सीधी भूमिका?
292 की संख्या के आधार पर बीजेपी और उसके सहयोगियों का 7 सीटें जीतना तय है और 33 वोट उनके पास अतिरिक्त बचेंगे. ऐसे में 10 सीट पर उनका ही दावा मजबूत होगा, क्योंकि दूसरी वरीयता के वोटों पर वे भारी पड़ेगे. दिल्ली के साथ ही यूपी में भी उच्च सदन की सीटों पर सियासी समीकरण साधे जाने है. हालांकि, इसमें सीधी भूमिका जनप्रतिनिधियों के बजाय स्नातकों और शिक्षकों की होगी.

राजनीतिक दलों की पकड़ की परीक्षा 
कुलमिलाकर, उत्तर प्रदेश का आगामी त्योहारी सीजन केवल धार्मिक और सांस्कृतिक उल्लास ही नहीं, बल्कि भारी राजनीतिक गहमागहमी भी लेकर आ रहा है. एक तरफ जहां राज्यसभा का सियासी समीकरण विधानसभा के भीतर दलों के तालमेल और शक्ति-परीक्षण के दरवाजे खोलता है, वहीं दूसरी तरफ स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव राज्य के बुद्धिजीवी वर्ग के बीच राजनीतिक दलों की पकड़ की परीक्षा लेंगे.

भाजपा जहां अपनी 8 सीटों के दबदबे को बरकरार रखने की रणनीति बना रही है, वहीं सपा अपने दो मजबूत स्तंभों को दिल्ली भेजने के साथ-साथ विपक्षी गोलबंदी को परखने के मूड में है. बसपा के लिए यह चुनाव एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होगा, जहाँ वह उच्च सदन के मंच से बाहर हो जाएगी. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि अक्टूबर के मध्य में जब चुनाव आयोग का बिगुल बजेगा, तब कौन सा दल अपने राजनीतिक समीकरणों को कितनी मजबूती से जमीन पर उतार पाता है.

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About the Author

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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