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'नाम का चक्रव्यूह': बिना सिंबल वाले MLC चुनाव में फंसे दिग्गज, हमनाम प्रत्याशियों ने बढ़ाई BJP-SP की धड़कनें!

UP MLC Election 2026: उत्तर प्रदेश में होने वाले एमएलसी चुनाव को लेकर प्रत्याशियों को एक अजीबो-गरीब समस्या का सामना करना पड़ रहा है. यह समस्या है एक ही नाम के कई प्रत्याशी का उम्मीदवारी करना. नाम एक जैसे होने की वजह से प्रत्याशी के सामने संकट खड़ा हो गया है.

Written By Pooja Singh
Published: Oct 12, 2026, 01:10 PM IST | Updated: Oct 12, 2026, 01:13 PM IST
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UP MLC Election 2026/ विशाल रघुवंशी: चुनावी मैदान में जीत का रास्ता आसान नहीं होता. रणनीति, संगठन और जनसंपर्क के साथ प्रत्याशियों को कई चुनौतियों से जूझना पड़ता है. लखनऊ खंड स्नातक और खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में भाजपा और सपा के प्रत्याशियों के सामने एक अनोखी चुनौती खड़ी हो गई है. यहां मुकाबला सिर्फ राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से ही नहीं, बल्कि उनसे मिलते-जुलते नाम वाले निर्दलीय प्रत्याशियों से भी है. ऐसे में दलीय उम्मीदवार 'नाम व्यूह' में फंस गए हैं. चिंता है कि नामों में उलझकर उनके मतदाताओं के वोट दूसरे प्रत्याशियों के खाते में न चले जाएं.

क्यों गहराया है 'नाम का भ्रम'?
दरअसल इस चुनाव में किसी को चुनाव चिह्न आवंटित नहीं होता है. लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा ने अवनीश कुमार सिंह को प्रत्याशी बनाया है. उनके सामने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी सपा की कांति सिंह के अलावा नाम की समानता भी चुनौती बनकर खड़ी हो गई है. अवनीश नाम के चार निर्दलीय प्रत्याशी (अवनीश सिंह, अवनीश कुमार पांडेय, अवनीश कुमार पटेल और एक अन्य अवनीश सिंह) भी चुनाव मैदान में हैं. ऐसे में मतपत्र पर एक जैसे नामों की मौजूदगी मतदाताओं के लिए भ्रम पैदा कर सकती है.

कांति और सुशील... 'नाम व्यूह' में सब फंसे
इसी निर्वाचन क्षेत्र में सपा प्रत्याशी कांति सिंह के सामने भी मिलते-जुलते नाम का संकट है. निर्दलीय कांति देवी की मौजूदगी से मतदाताओं के भ्रमित होने की आशंका बनी हुई है. दोनों नामों में समानता होने के कारण प्रत्याशियों को अपनी अलग पहचान स्थापित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं. खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है. यहां सपा के सुशील कुमार चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि इसी नाम के एक अन्य निर्दलीय प्रत्याशी ने भी ताल ठोंक दी है.

44 उम्मीदवारों का गणित और समय सीमित 
खंड शिक्षक व खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से कुल 29 उम्मीदवार हैं. खंड शिक्षक से 13 व खंड स्नातक क्षेत्र से 19 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. 23 अक्टूबर को मतदान होना है. ऐसे में दलीय प्रत्याशियों के पास मतदाताओं के बीच अपनी पहचान स्पष्ट करने के लिए सीमित समय है.

जरा-सी चूक से भ्रमित हो सकते हैं मतदाता
प्रत्याशी के लिए मिलते जुलते नाम मुश्किल तो पैदा कर ही रहे है, साथ ही खासकर उन मतदाताओं के लिए मुश्किल है, जो प्रत्याशी के नाम के आधार पर अपनी पसंद तय करते हैं. चुनौती केवल मतदाताओं तक अपना संदेश पहुंचाने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि मतदाता उनके नाम और पहचान को ठीक से समझें. 

चुनाव प्रचार के दौरान समर्थकों को भी में मतदाताओं के बीच यह स्पष्ट करना पड़ रहा है कि पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी कौन है. जरा-सी चूक से मतदाता भ्रमित हो सकते हैं और इसका असर वोटों के गणित पर पड़ सकता है.

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About the Author

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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