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अजय राय आउट, आराधना इन: क्यों फेल हुआ 'भूमिहार कार्ड' और कांग्रेस ने 2027 के लिए क्यों चुना 'ब्राह्मण + मुस्लिम' फॉर्मूला?

Social Engineering Formula for 2027: 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव किया है. अजय राय की जगह आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. इस नई टीम को कांग्रेस के सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. आखिर इस बदलाव के पीछे क्या रणनीति है और अजय राय की जगह मोना को कमान देने के सियासी मायने क्या हैं?

Written By Preeti Chauhan
Published: Oct 03, 2026, 10:59 AM IST | Updated: Oct 03, 2026, 11:04 AM IST
Image Credit: UP Congress Social Engineering
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UP Congress: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से करीब डेढ़ साल पहले कांग्रेस आलाकमान ने संगठन में बहुत बड़ा शल्य-चिकित्सा (Surgical Overhaul) किया है.  पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की छुट्टी कर प्रतापगढ़ की रामपुर खास से तीन बार की विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' को प्रदेश कमान सौंपी गई है, जबकि सहारनपुर सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. राजनीतिक विश्लेषक इस फेरबदल को केवल चेहरा बदलना नहीं, बल्कि 2027 के लिए कांग्रेस का 'सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला 2.0' मान रहे हैं. आइए इस लेख के जरिए समझते हैं कि आखिर क्यों फेल हुआ अजय राय का भूमिहार कार्ड और कांग्रेस ने क्यों दांव पर लगाया 'ब्राह्मण + मुस्लिम' समीकरण.

यूपी में कांग्रेस का नया नेतृत्व
आराधना मिश्रा
रामपुर खास से तीन बार की विधायक आराधना मिश्रा मोना को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है. 
इमरान मसूद: पश्चिमी यूपी पर भी जोर
कांग्रेस ने सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है.
देवेंद्र निषाद, आलोक प्रसाद को भी बड़ी जिम्मेदारी
प्रदेश संगठन में बदलाव के तहत कांग्रेस ने देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुक्त किया है.चौधरी वीरेंद्र सिंह को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाया गया है

क्यों फेल हुआ 'भूमिहार कार्ड'?
2023 में जब अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, तब कांग्रेस का मकसद पूर्वांचल में बीजेपी के सवर्ण कोर वोट बैंक में सेंध लगाना और एक आक्रामक नेता के जरिए जमीनी कार्यकर्ताओं में जोश भरना था.

सीमित वोट बैंक
यूपी में भूमिहार मतदाता कुल आबादी का 1 से 1.5% के बीच हैं, जो कुछ ही सीमित सीटों (वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, बलिया) पर सिमटे हुए हैं.

लोकसभा 2024 के नतीजे
हालांकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 6 सीटें जीतीं, लेकिन इसका श्रेय ज्यादातर राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा', संविधान बचाओ विमर्श और अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कैडर को गया. अजय राय का अपना सवर्ण आधार कांग्रेस के पाले में शिफ्ट नहीं हो सका.

संगठनात्मक आक्रामकता में कमी
चुनाव के बाद राज्य स्तर पर कोई बड़ा जनांदोलन खड़ा करने में पूर्वांचल लॉबी विफल रही, जिसके चलते आलाकमान को चेहरा बदलने पर मजबूर होना पड़ा.

'ब्राह्मण + मुस्लिम': कांग्रेस का पारंपरिक कोर वोट बैंक
90 के दशक से पहले उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का राज 'ब्राह्मण + मुस्लिम + दलित' के त्रिकोण पर टिका था.  मंडल-कमंडल की राजनीति के बाद यह वोट बैंक क्रमशः बीजेपी, सपा और बसपा में बिखर गया। अब आराधना मिश्रा और इमरान मसूद के जरिए कांग्रेस इसी खोए हुए आधार को वापस हासिल करना चाहती है.

आराधना मिश्रा के जरिए 'ब्राह्मण कार्ड'
आराधना मिश्रा 9 बार के विधायक प्रमोद तिवारी की बेटी हैं और राज्य के सवर्ण/ब्राह्मण समाज में उनकी अच्छी साख है. बीजेपी में मौजूदा समय में ब्राह्मण नेतृत्व को लेकर अंदरूनी असंतोष की चर्चाओं के बीच कांग्रेस ने एक बड़ा ब्राह्मण चेहरा आगे कर बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक पर डोरे डाले हैं. 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' अभियान का चेहरा रहीं आराधना के जरिए महिला मतदाताओं को भी साधने का प्रयास है.

इमरान मसूद के जरिए 'मुस्लिम लीडरशिप'
पश्चिमी यूपी में इमरान मसूद की पहचान एक आक्रामक और जनाधार वाले मुस्लिम नेता की है.  2024 में सहारनपुर से उनकी बड़ी जीत ने साबित किया कि वे मुस्लिम वोटों को एकमुश्त गोलबंद कर सकते हैं.

सपा के पारंपरिक 'माय' (मुस्लिम-यादव) समीकरण में मुस्लिम मतदाता हमेशा एक मजबूत विकल्प की तलाश में रहता है. इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने सपा को संदेश दिया है कि 2027 के सीट बंटवारे में कांग्रेस बैकफुट पर नहीं रहेगी.

'PDA' के समानांतर 'सोशल इंजीनियरिंग'
केवल ब्राह्मण और मुस्लिम ही नहीं, बल्कि कांग्रेस ने उपाध्यक्ष पदों पर देवेंद्र निषाद (OBC) और आलोक प्रसाद (दलित) को बैठाकर अखिलेश यादव के PDA के मुकाबले अपना 'समानुपातिक सामाजिक मॉडल' खड़ा करने की कोशिश की है.

2027 के लिए क्या हैं इस फॉर्मूले के मायने?
सपा पर दबाव: 2027 के विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे के दौरान कांग्रेस अब 2022 जैसी लाचार स्थिति में नहीं दिखेगी. 100 से 150 सीटों पर दावेदारी ठोकने के लिए यह मजबूत सामाजिक आधार तैयार किया जा रहा है.

पश्चिमी और पूर्वी यूपी का संतुलन
पश्चिमी यूपी से इमरान मसूद और अवध/पूर्वांचल बेल्ट से आराधना मिश्रा को लाकर क्षेत्रीय संतुलन साधने का काम भी किया गया है.

अजय राय की विदाई यह साफ करती है कि कांग्रेस अब केवल 'प्रतीकात्मक आक्रामकता' के भरोसे नहीं रहना चाहती.  2027 की लड़ाई में उतरने से पहले पार्टी अपने उस पुराने 'सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले' की तरफ लौट आई है, जिसने कभी यूपी पर दशकों तक कांग्रेस का परचम लहराया था.

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About the Author

प्रीति चौहान जीन्यूज में पत्रकार हैं, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड डिजीटल टीम में  ब्रेकिंग, हाइपरलोकल, क्राइम, और अन्य मुद्दों को लेकर खबरें लिखती हैं. 
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