मदरसे के चंदे से क्रिप्टो-टेरर फंडिंग: 6 दिन की रिमांड में खुला जैश के जफर का पाकिस्तानी नेटवर्क, नेपाल के रास्ते भागने का था प्लान
Lucknow News: आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के लिए फंडिंग करने वाला जफर नेपाल के रास्ते पाकिस्तान भागने की फिराक में था. वहां पर उसको आतंक की ट्रेनिंग दी जानी थी. जांच में क्रिप्टो फंडिंग और पाकिस्तानी जेहादी ग्रुप से कनेक्शन भी सामने आया है.
प्रीति श्रीवास्तव/लखनऊ: प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के लिए काम करने वाले संदिग्ध आतंकी मोहम्मद जफर से पूछताछ में उत्तर प्रदेश एटीएस (UP ATS) को कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं. एटीएस की कस्टडी रिमांड के दौरान हुई पूछताछ और उसके मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में यह बात सामने आई है कि जफर नेपाल के रास्ते पाकिस्तान भागने की योजना बना रहा था, ताकि वहां जाकर आतंकी ट्रेनिंग हासिल कर सके.
कब हुई थी जफर की गिरफ्तारी?
यूपी एटीएस ने जफर को 17 अगस्त 2026 को मेरठ की एक मस्जिद से गिरफ्तार किया था. इसके बाद कोर्ट से मिले 6 दिन के रिमांड के दौरान उससे सघन पूछताछ की गई.पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी ने वर्ष 2017 से लेकर 2022 तक मेरठ के कोतवाली स्थित गुदड़ी बाजार में ही मदरसा दारुल उलूम शाही जामा मस्जिद मेरठ में पढ़ाई की थी.
जांच में हुए प्रमुख खुलासे
नेपाल के रास्ते पाकिस्तान का प्लान: जफर भारतीय एजेंसियों से बचकर नेपाल के रास्ते सीमा पार कर पाकिस्तान जाने वाला था. जफर को वहां आतंक की ट्रेनिंग दी जानी थी.
क्रिप्टो और डिजिटल टेरर फंडिंग
जफर सीधे बैंक खातों के अलावा क्रिप्टोकरेंसी (Binance / USDT) के जरिए भी पाकिस्तान स्थित अपने आकाओं को पैसे ट्रांसफर करने की कोशिश और फंडिंग कर रहा था.
चंदे के नाम पर उगाहता था रकम: वह मदरसों और मस्जिदों के विकास के नाम पर लोगों से चंदा जुटाता था और इस रकम का इस्तेमाल जिहादी गतिविधियों व जैश-ए-मोहम्मद को फंडिंग देने में करता था.
पाकिस्तानी जेहादी व्हाट्सएप ग्रुप: आरोपी के मोबाइल से कई पाकिस्तानी हैंडलर्स और जेहादी व्हाट्सएप ग्रुप्स के सुराग मिले हैं. वह सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भड़काने और जिहादी साहित्य फैलाने में भी शामिल था. आरोपी खुद भी मास्क लगाकर जेहाद और खिलाफत की वीडियो सोशल मीडिया पर डाल रहा था.
एटीएस की फॉरेंसिक टीम उसके मोबाइल डेटा और डिजिटल फुटप्रिंट्स की गहराई से छानबीन कर रही है. आशंका जताई जा रही है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बिहार में उसके इस नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य संदिग्धों पर भी जल्द कार्रवाई हो सकती है.
नेपाल कनेक्शन की जांच
एटीएस अब नेपाल कनेक्शन की जांच में भी लगी है. जफर को नेपाल जाने के बाद इमरान और एक अन्य से मुलाकात करनी थी, जो पाकिस्तान जाने में मदद करने वाले थे. एटीएस अब इन्हीं लोगों छानबीन में लगी है.
संदिग्ध आतंकी मोहम्मद जफर के बैंक खातों की पड़ताल में यूपी एटीएस को कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं. जांच के अनुसार, जफर ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए सबसे ज्यादा जकात की रकम पश्चिमी उत्तर प्रदेश (वेस्ट यूपी) से उगाह कर जुटाई थी. वह धार्मिक कार्यों और चंदे के नाम पर आम लोगों से पैसे इकट्ठा करता था और बाद में उस रकम को आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करता था.