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Ganga Expressway Waterlogging/ ज्ञानेंद्र प्रताप: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में पिछले 36 घंटों से हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है. लगातार बारिश से जिले के कई निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति बन गई है. वहीं, प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शुमार गंगा एक्सप्रेसवे की निर्माण प्रणाली पर भी इस बारिश ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सोनिक थाना क्षेत्र में बने सोनिक टोल प्लाजा के पास तीन फीट तक पानी भर जाने के कारण यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
करोड़ों की परियोजना पर पानी, यातायात पर लगा ब्रेक
मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाले इस हाई-टेक गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण इसी साल 29 अप्रैल को हुआ था. हालांकि, निर्माण के कुछ ही महीनों के भीतर आई इस भारी बारिश ने जलनिकासी (ड्रैनेज) की लचर व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. प्रयागराज से मेरठ जाने वाली लेन पर सोनिक टोल के निकट तीन फीट गहरा पानी भर गया है, जिससे एक्सप्रेसवे किसी तालाब की भांति नजर आ रहा है.
पानी के अत्यधिक जमाव के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले छोटे-बड़े वाहनों की रफ्तार पर पूरी तरह से ब्रेक लग गया है. कई गाड़ियां पानी में फंसकर बंद हो गईं, जिसके चलते वाहन चालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
औद्योगिक गलियारा बना तालाब, बशीरतगंज में आवागमन बाधित
सिर्फ एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि बशीरतगंज के पास भी भारी जलभराव के कारण राहगीरों और स्थानीय लोगों का आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया है. इसके अलावा, औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridor) से सटी सर्विस रोड की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है. सर्विस रोड पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है, जिससे पैदल चलने वाले लोगों और स्थानीय श्रमिकों का निकलना दूभर हो गया है.
प्रशासन और टोल प्रबंधन की सफाई
टोल लेन में जलभराव की स्थिति पर सोनिक टोल के मैनेजर गौरव शर्मा ने बताया कि भारी बारिश की वजह से पानी का भराव तेजी से हुआ है. उन्होंने कहा कि सड़क पर भरे पानी को बाहर निकालने के लिए पंपसेट की व्यवस्था की जा रही है और जल्द ही स्थिति पर काबू पा लिया जाएगा।" सड़क की ऊंचाई न बढ़ाए जाने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि टोल क्षेत्र के ठीक ऊपर से हाईटेंशन बिजली की लाइन गुजर रही है, जिसकी वजह से इस जगह पर सड़क की ऊंचाई बढ़ाना तकनीकी रूप से संभव नहीं है।
फिलहाल, 36 घंटे से जारी बारिश ने जिले के इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को उजागर कर दिया है और यात्रियों को जलभराव से कब तक राहत मिलेगी, यह मौसम के मिजाज पर निर्भर करता है.