स्वाइन फ्लू के खिलाफ यूपी में 'सुरक्षा चक्र', जानिए अस्पतालों की तैयारी, लक्षण और बचाव के उपाय
UP Swine Flu Alert: उत्तर प्रदेश में स्वाइन फ्लू और मौसमी बुखार के बढ़ते मामलों को देखते हुए शासन ने पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में हाई-अलर्ट जारी कर दिया है. हर अस्पताल में 10 से 20 बेड और लखनऊ के प्रमुख अस्पतालों में 25-25 बेड के विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार किए गए हैं.
UP Swine Flu Alert/ विशाल रघुवंशी: उत्तर प्रदेश में मौसमी बुखार और स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से पैर पसार रहे हैं. जिसके चलते योगी सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है. लखनऊ में नए मरीजों की पुष्टि और बलरामपुर अस्पताल में हुई मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं. स्वाइन फ्लू को लेकर प्रदेश में तमाम अस्पताल में अलर्ट जारी कर दिया गया है. तमाम सरकारी अस्पताल में स्वाइन फ्लू वार्ड में बेड भी आरक्षित कर दिए गए हैं. सीएम योगी ने किसी भी तरह की कोई लापरवाही ना बरतने के निर्देश दिए हैं.
अस्पतालों में क्या हैं खास इंतजाम?
मरीजों को तत्काल और बेहतर इलाज मिले, इसके लिए प्रदेश सरकार ने अस्पतालों की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों, सीएमओ (CMO) और पैरामेडिकल स्टाफ की छुट्टियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है. हर सरकारी अस्पताल में 10 से 20 बिस्तरों का आइसोलेशन वार्ड अनिवार्य रूप से तैयार किया गया है. वहीं, लखनऊ के बड़े अस्पतालों में 25-25 बेड के स्पेशल वार्ड एक्टिव कर दिए गए हैं.
निजी लैब की कड़ी निगरानी
इतना ही नहीं प्राइवेट अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब को हिदायत दी गई है कि स्वाइन फ्लू का कोई भी पॉजिटिव केस सामने आने पर तुरंत शासन को सूचित करें. दिल्ली-एनसीआर से सटे इलाकों में मरीजों की यात्रा की जानकारी जुटाई जा रही है और स्वास्थ्य अधिकारी रोजाना अस्पतालों का निरीक्षण कर दवाओं व बिस्तरों की स्थिति पर रिपोर्ट सौंप रहे हैं.
ये हैं स्वाइन फ्लू (H1N1) के लक्षण
यह इन्फ्लूएंजा ए (H1N1) वायरस से फैलने वाला सांस का संक्रमण है. शुरुआती चरण में इसके लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे दिखते हैं. डॉक्टर्स का कहना है कि मरीज को बहुत तेज बुखार आता है और ठंड महसूस होती है. गले में तेज खराश, खांसी के साथ-साथ छाती में भारीपन या सांस फूलने की समस्या होना. मांसपेशियों में तेज दर्द, सिरदर्द और शरीर में टूटन महसूस होना. कुछ मामलों में उल्टी, दस्त या पेट में मरोड़ की शिकायत भी हो सकती है.
खुद को और परिवार को कैसे बचाएं?
स्वाइन फ्लू से सुरक्षित रहने के लिए दैनिक दिनचर्या में इन सावधानियों को अपनाना जरूरी है:
मास्क का प्रयोग: भीड़भाड़ वाली जगहों, सार्वजनिक परिवहन और अस्पतालों में जाते समय एन-95 या सामान्य मेडिकल मास्क जरूर लगाएं.
हाथों की सफाई: हाथों को बार-बार साबुन और पानी से धोएं। बिना हाथ धोए अपनी आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें.
इम्युनिटी और दूरी: फ्लू के लक्षण वाले व्यक्ति से कम से कम 1 मीटर की दूरी बनाएं। छींकते या खांसते वक्त मुंह पर रुमाल या टिश्यू रखें.
ससमय डॉक्टरी सलाह: लक्षण महसूस होते ही बिना देरी के नजदीकी सरकारी अस्पताल में जांच कराएं और खुद को घर पर आइसोलेट कर लें.
मौसम के इस बदलाव और बढ़ते मामलों के बीच घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है. शासन और स्वास्थ्य महकमा अपनी तरफ से पूरी तैयारी में जुटा है, लेकिन इस सुरक्षा चक्र को मजबूत बनाने में हमारी समझदारी ही सबसे बड़ा हथियार है. किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें, समय पर डॉक्टर से संपर्क करें और बचाव के नियमों का पालन करें.