'डिजिटल अरेस्ट' की खौफनाक दास्तान: 10 दिन कैद रहीं समाजसेविका, CBI के नाम पर ₹9 लाख उड़ाए, फिर अमेरिका से यूं आई मदद
Lucknow Digital Arrest Case: लखनऊ की 65 वर्षीय समाजसेविका को शातिर ठगों ने CBI अधिकारी बनकर 10 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' रखा. गिरफ्तारी का डर दिखाकर पीड़ित महिला से ₹9 लाख दो खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए. ठगों की ओर से ₹15 लाख और डिमांड होने पर महिला ने अमेरिका में रह रहे बेटे से बात की, जिसने फ्रॉड पकड़ा गया. लखनऊ साइबर थाने में FIR दर्ज हो गई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है.
Lucknow Digital Arrest Case/ नंदन श्रीवास्तव: इन दिनों साइबर अपराधी ठगी के नए और खौफनाक हथकंडे अपना रहे हैं. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) का एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां शातिर ठगों ने खुद को सीबीआई (CBI) अधिकारी बताकर 65 वर्षीय एक बुजुर्ग समाजसेविका को पूरे 10 दिनों तक उनके ही घर में 'डिजिटल अरेस्ट' रखा. कानून और गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर जालसाजों ने महिला से ₹9 लाख हड़प लिए और ₹15 लाख की अतिरिक्त मांग करने लगे.
1 सितंबर का वो कॉल और खौफ की शुरुआत
कहानी शुरू होती है 1 सितंबर की शाम से, जब पीड़ित महिला के फोन पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया. फोन करने वाले ने खुद को सीबीआई का बड़ा अफसर बताया. उसने पीड़ित महिला को बताया कि उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों में FIR दर्ज हो चुकी है और अरेस्ट वारंट जारी हो गया है. कानूनी कार्रवाई और लोक-लाज के डर से बुजुर्ग महिला बुरी तरह घबरा गईं. इसके बाद आरोपियों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए उन्हें लगातार नजरबंद रखा. ठगों की सख्त हिदायत थी कि फोन का कैमरा हर वक्त चालू रहेगा और वह किसी से भी संपर्क नहीं करेंगी.
10 दिन का मानसिक टॉर्चर और ₹9 लाख पार
10 दिनों तक चले इस मनोवैज्ञानिक दबाव (Psychological Pressure) के दौरान ठगों ने महिला के बैंक खातों की पूरी जानकारी हासिल कर ली. 10 सितंबर के आसपास कथित 'जांच और केस रफा-दफा करने' के नाम पर महिला से दो अलग-अलग खातों में ₹9 लाख ट्रांसफर करवा लिए गए.
अमेरिका में बैठे बेटे ने बचा ली बड़ी गाढ़ी कमाई
₹9 लाख ऐंठने के बाद भी जब जालसाजों का लालच खत्म नहीं हुआ, तो उन्होंने ₹15 लाख की और डिमांड रख दी. इतनी बड़ी रकम के लिए परेशान बुजुर्ग महिला ने हिम्मत जुटाकर अमेरिका में रह रहे अपने बेटे से संपर्क किया. बेटे को पूरी बात सुनते ही माजरा समझ आ गया और उसने तुरंत मां को समझाया कि वह 'साइबर फ्रॉड' की शिकार हो चुकी हैं.
मणिपुर से जुड़े ठगी के तार
बेटे की सतर्कता के बाद तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई. 16 सितंबर को लखनऊ के साइबर क्राइम थाने में औपचारिक FIR दर्ज हुई. शुरुआती जांच में पता चला है कि ऐंठी गई रकम मणिपुर के बैंक खातों में भेजी गई है. फिलहाल पुलिस मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल के आधार पर साइबर अपराधियों के नेटवर्क को खंगाल रही है.