मीरजापुर के विंध्याचल में मां कात्यायनी की अलौकिक पूजा! उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, जानें धाम की महिमा
Maa Katyayani Puja 2026: नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है. ये मां दुर्गा का छठा रूप हैं और इन्हें साहस, शक्ति और जीत की प्रतीक माना जाता है. भक्त आज के दिन मां से सुख-शांति और अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं. मीरजापुर के विंध्याचल धाम में इस मौके पर भारी भीड़ है, दूर-दूर से लोग मां विंध्यवासिनी के दर्शन को आ रहे हैं.
राजेश मिश्र/मीरजापुर: शारदीय नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी शक्ति, साहस और विजय की प्रतीक हैं. भक्त उनकी आराधना कर सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मांगते हैं. मीरजापुर के विंध्याचल धाम में मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. नवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्तों की आस्था और भक्ति का विशेष नजारा देखने को मिलता है. जानें मां के स्वरूप, पौराणिक मान्यताओं और मीरजापुर के विंध्याचल धाम में मां विंध्यवासिनी के दर्शन की महिमा.
मां कात्यायनी का स्वरूप और धार्मिक महत्व
आदिशक्ति जगत जननी माँ विंध्यवासिनी की नवरात्र में नौ रूपों की आराधना की जाती है. आदिशक्ति का छठवें दिन सिंह पर सवार चार भुजा वाली माता "कात्यायनी" के रूप में पूजन किया जाता है. मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यन्त दिव्य और स्वर्ण के समान चमकीला है. यह अपनी प्रिय सवारी सिंह पर विराजमान रहती हैं. इनकी चार भुजायें भक्तों को वरदान देती हैं, इनका एक हाथ अभय मुद्रा में है, तो दूसरा हाथ वरदमुद्रा में है, अन्य हाथों में तलवार तथा कमल का फूल है. प्रत्येक प्राणी को सदमार्ग पर प्रेरित वाली वाली माँ का "कात्यायनी" स्वरूप सभी के लिए अराधनीय है. देवी कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं इनकी पूजा अर्चना द्वारा सभी संकटों का नाश होता है.
विंध्याचल धाम में मां विंध्यवासिनी के दर्शन का महत्व
मां कात्यायनी दानवों तथा पापियों का नाश करने वाली हैं. देवी कात्यायनी जी के पूजन से भक्त के भीतर शक्ति का संचार होता है. इस दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित रहता है. योग साधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है. साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित होने पर उसे सहजभाव से मां कात्यायनी के दर्शन प्राप्त होते हैं. साधक इस लोक में रहते हुए अलौकिक तेज से युक्त रहता है. माता कात्यायनी का पूजन दर्शन करने से धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति के साथ ही भक्त, रोग, शोक, संताप से मुक्ति प्राप्त करता है.
माता कात्यायनी की आराधना करने से मनचाहा पति व स्त्री की प्राप्ति भी होती है. विन्ध्य और माँ गंगा के तट पर विराजमान माँ विंध्यवासिनी कात्यायनी का दिव्य रूप धारण कर भक्तों का कष्ट दूर करती है.इस गृहस्थ जीवन में जिस जिस वस्तुओं की जरूरत प्राणी को होता है वह सभी प्रदान करती है. माता कात्यायनी बड़ी दयालू हैं. भक्त जिस कामना पूजन अर्चन कर उनके मंत्रों का जप करते हैं, वह उन्हें प्रदान करती है. धाम में आने पर ममता बरसाने वाली माता का दर्शन पाकर भक्त विभोर हो जाते हैं. माता के ममतामयी छवि को निहार वह इस कदर निहाल होते हैं कि उन्हें सब कुछ मिल जाता है.
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पढ़िए पौराणिक कथा
देवी कात्यायनी जी के संदर्भ में एक पौराणिक कथा प्रचलित है जिसके अनुसार, एक समय कत नाम के प्रसिद्ध ऋषि हुए तथा उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए, उन्हीं के नाम से प्रसिद्ध कात्य गोत्र से, विश्वप्रसिद्ध ऋषि कात्यायन उत्पन्न हुए थे. देवी कात्यायनी जी देवताओं, ऋषियों के संकटों को दूर करने लिए महर्षि कात्यायन के आश्रम में उत्पन्न होती हैं. महर्षि कात्यायन जी ने देवी पालन पोषण किया था. जब महिषासुर नामक राक्षस का अत्याचार बहुत बढ़ गया था, तब उसका विनाश करने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने अपने तेज़ और प्रताप का अंश देकर देवी को उत्पन्न किया था और ऋषि कात्यायन ने भगवती जी की कठिन तपस्या, पूजा की, इसी कारण से यह देवी कात्यायनी कहलाई, माता कात्यायनी पूजन से आद्या चक्र जागृत होता है.
मां कात्यायनी की पूजा से जुड़ी मान्यताएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा करने से साधक को शक्ति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है. योग परंपरा में इस दिन साधना का संबंध आज्ञा चक्र से बताया जाता है. मां की आराधना को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति की कामना से भी जोड़ा जाता है. विंध्याचल धाम में मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालु मां के कात्यायनी स्वरूप की महिमा का गुणगान करते हैं. भक्तों के लिए मां की आराधना केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और मानसिक शांति का भी माध्यम है.
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विद्वान पुरोहित अखिलेन्द्र मिश्रा का कहना है कि देश के कोने कोने से श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए लंबी लंबी कतारों में खड़े होकर जयकारा लगाते हुए दर्शन पाने के लिए बेताब रहते हैं. श्रद्धालु का कहना है कि मां की ममता सभी पर बरसती है, दर्शन करने से सुखद अनुभूति और जिस आनंद की अनुभूति होती उसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता.
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