नकली सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश: सहारनपुर में 1.28 लाख के नकली सिक्के बरामद
Saharanpur News: सहारनपुर में नकली सिक्से बनाने वाले नेटवर्क का खुलासा किया गया है. ये नेटवर्क पंजाब से लेकर बिहार तक फैला था. करीब 70 करोड़ रुपये के सिक्के गिरोह ने बाजार में खपा दिए.
नीना जैन/सहारनपुर: सहारनपुर में नकली सिक्के बनाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार करते हुए भारी मात्रा में नकली सिक्के, सिक्के बनाने की मशीनें, डाई और अन्य उपकरण बरामद किए हैं.
1 लाख रुपये के नकली सिक्के बरामद
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह निवासी मोहाली पंजाब, हिमांशु उर्फ गुल्लू निवासी सहारनपुर, कुलदीप निवासी मुजफ्फरनगर, संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन निवासी मधुबनी बिहार और अनुराग पाल उर्फ लंकेश निवासी भदोही के रूप में हुई है. आरोपियों के कब्जे से 20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के, यानी कुल 1 लाख 28 हजार रुपये के नकली सिक्के, 10 हजार रुपये नकद, आठ मोबाइल फोन, सिक्के बनाने की पांच लोहे की डाई, छह मशीनें, डाई पॉलिश करने की मशीन, घिसाई के पत्थर, हथौड़े, रेती, रिंच, पेचकश, प्लास, वर्नियर कैलिपर्स, इलेक्ट्रॉनिक कांटा, ओवन, अधबने सिक्के, सात हिसाब-किताब रजिस्टर/पैड और चेकबुक बरामद की गई है.
20 रुपये के नकली सिक्के तैयार करते थे
इसके अलावा पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से स्विफ्ट डिजायर और ईको स्पोर्ट कार भी बरामद की हैं. पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे मशीनों और डाई की मदद से 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार कर उन्हें बाजार, सरकारी शराब के ठेकों, टोल टैक्स और छोटी दुकानों पर चलाते थे. आरोपियों ने पुलिस को यह भी बताया कि अब तक करीब 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के बाजार में चलाए जा चुके हैं. यह दावा पुलिस पूछताछ में सामने आया है, जिसकी जांच की जा रही है.
सबका काम बंटा हुआ था
एसएसपी अभिनंदन ने बताया कि इस गिरोह की एक लंबी चेन थी. गिरोह के सदस्य अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते थे. कुछ लोग नकली सिक्कों की मैन्युफैक्चरिंग करते थे, कुछ प्लांट लगाने में मदद करते थे, कुछ फाइनेंस और लॉजिस्टिक सपोर्ट देते थे, जबकि आगे छोटे कस्टमर्स, शराब के ठेकों और दुकानों के माध्यम से नकली सिक्कों को बाजार में चलाया जाता था.
पंजाब का रहने वाला है मुख्य सरगना
एसएसपी के मुताबिक, इस गिरोह का मुख्य सरगना उपकार लूथरा है, जो मोहाली पंजाब का रहने वाला है. पुलिस के अनुसार, वह करीब वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के धंधे में सक्रिय रहा है. बताया गया कि वह पहले सुनार का काम करता था और बाद में कुछ लोगों के संपर्क में आने के बाद नकली सिक्के बनाकर मुनाफा कमाने के काम में शामिल हो गया.
रोजाना 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार करते थे
एसएसपी अभिनंदन ने बताया कि गिरोह के सदस्य बेहद आधुनिक और व्यवस्थित तरीके से अपना सेटअप चलाते थे. पुलिस के मुताबिक, आरोपी औसतन प्रतिदिन 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार करने की क्षमता रखते थे. उनके पास से सिक्के बनाने के लिए प्रेस, रोलर्स और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के कुछ सदस्य पहले दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं.
पंजाब, सहारनपुर, बदायूं और बिहार तक फैला नेटवर्क
एसएसपी के अनुसार, गिरोह के कुछ सदस्यों की आपस में मुलाकात जेल में हुई थी और इसके बाद उनका नेटवर्क धीरे-धीरे बढ़ता गया. एसएसपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों का नेटवर्क पंजाब, सहारनपुर, बदायूं, भदोही और बिहार के मधुबनी तक फैला होने की जानकारी मिली है. पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है, ताकि गिरोह से जुड़े दूसरे लोगों की पहचान की जा सके. पुलिस के मुताबिक, गिरोह की योजना सहारनपुर में भी नकली सिक्कों का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शुरू करने की थी, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.
मुख्य सरगने का लंबा आपराधिक इतिहास निकला
एसएसपी अभिनंदन ने बताया कि मुख्य सरगना के खिलाफ पहले से लंबा आपराधिक इतिहास सामने आया है। दिल्ली पुलिस की ओर से उसके ऊपर इनाम घोषित होने की जानकारी भी मिली है, जिसकी पुलिस जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि गिरोह से जुड़े सभी लोगों तक पहुंचने के लिए लिंक विकसित किए जा रहे हैं. यदि जांच में अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति का पता चलता है तो उस पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गिरोह का नेटवर्क केवल नकली सिक्कों तक सीमित था या नकली नोटों से भी इनका कोई संबंध रहा है. एसएसपी के मुताबिक, अभी तक की जांच में नकली नोट चलाने से जुड़ी कोई जानकारी सामने नहीं आई है और गिरोह का मुख्य फोकस नकली सिक्कों के निर्माण और कारोबार पर ही पाया गया है.