SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

13 साल चली जांच के बाद गिरी गाज!₹4000 करोड़ के जमीन घोटाले में PCS हरीश चंद्र बर्खास्त

राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए नोएडा के करीब 4000 करोड़ रुपये के भूखंड घोटाले में वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र को बर्खास्त कर दिया है. हरीश चंद्र वर्तमान में पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थानिक प्रतिनिधि, खाद्य एवं रसद विभाग के पद पर तैनात थे.

Edited By Preeti Chauhan
Published: Sep 29, 2026, 10:55 AM IST | Updated: Sep 29, 2026, 10:56 AM IST
Image Credit: CM Yogi action
Join

मयूर शुक्ला/लखनऊ: राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ PCS अधिकारी हरीश चंद्र को सेवा से बर्खास्त कर दिया है. यह कार्रवाई नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) में तैनाती के दौरान करीब ₹4,000 करोड़ मूल्य की 3.81 लाख वर्गमीटर से अधिक जमीन के अवैध 'लीज बैक' (Lease Back) और गंभीर अनियमितताओं के मामले में की गई है.

प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) एम. देवराज ने सोमवार को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किए.  बर्खास्तगी के समय हरीश चंद्र कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे.

मामले की मुख्य बातें 
अधिकारी का नाम: हरीश चंद्र (वरिष्ठ PCS अधिकारी)
कार्रवाई: सेवा से बर्खास्तगी एवं विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई का समापन
मामला: नोएडा प्राधिकरण में तैनाती के दौरान ₹4,000 करोड़ का लीज बैक घोटाला
प्रभावित क्षेत्र: ग्राम शहदरा के सेक्टर 140-ए, 141, 142 एवं 143
अनियमितता का दायरा: कुल 3,81,527 वर्गमीटर अर्जित जमीन का नियमों के विपरीत लीज बैक

जांच में सामने आई मुख्य अनियमितताएं
जांच रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम शहदरा की आबादी के निस्तारण और सर्वे प्रक्रिया में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं. आबादी का सटीक निर्धारण सैटेलाइट इमेज के आधार पर किया जाना अनिवार्य था, लेकिन सर्वे में इसका इस्तेमाल नहीं किया गया. सर्वे रिपोर्ट में मूल काश्तकारों के बजाय कई अन्य भू-मालिकों, निजी कंपनियों और गांव के बाहर के अपात्र लोगों को शामिल किया गया. जांच में करीब 4,00,447 वर्गमीटर जमीन को अनियमित तरीके से आवंटित किए जाने की बात सामने आई. इस जमीन का बाजार मूल्य करीब 4000 करोड़ रुपये आंका गया। जांच रिपोर्ट में हरीश चंद्र को तथ्यों को छिपाने और नियमों के विपरीत भ्रामक रिपोर्ट पेश करने के मामले में प्रथमदृष्टया दोषी माना गया.

अधूरी व भ्रामक रिपोर्ट
सर्वे रिपोर्ट के कॉलम नंबर-9 में मूल काश्तकार का नाम दर्ज नहीं किया गया. कॉलम नंबर-13 में विनियमितीकरण समिति को संदर्भित क्षेत्रफल का उल्लेख नहीं किया गया.

उच्च स्तर पर तथ्य छुपाना
लीज बैक के लिए डीएम, एसएसपी एवं नोएडा प्राधिकरण बोर्ड की संयुक्त समिति के सामने भ्रामक और गलत तथ्य पेश किए गए, जिससे निजी कंपनियों व बाहरी लोगों के पक्ष में अवैध लीज बैक का रास्ता साफ हो सका.

2013 से 2026: मामले की पूरी समयरेखा (Timeline)
अनुशासनिक कार्रवाई की सिफारिश
27 सितंबर 2013 को प्रारंभिक जांच के बाद अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति करते हुए मामला मेरठ के मंडलायुक्त को सौंपा गया.

लोक सेवा आयोग की सहमति
6 जनवरी 2022 को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (प्रयागराज) ने विभागीय जांच के आधार पर बर्खास्तगी की सहमति प्रदान की गई.

इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश
3 सितंबर 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मामले के तथ्यों पर कड़ा रुख अपनाया, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय का रास्ता साफ हुआ.

सेवा से बर्खास्तगी
सितंबर 2026 को प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज ने बर्खास्तगी का अंतिम आदेश जारी किया.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

प्रीति चौहान जीन्यूज में पत्रकार हैं, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड डिजीटल टीम में  ब्रेकिंग, हाइपरलोकल, क्राइम, और अन्य मुद्दों को लेकर खबरें लिखती हैं. 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES