Explainer: बसपा के कमजोर होते गढ़ में BJP की एंट्री, नितिन नबीन के दौरे से क्या बदलेगा समीकरण?
Nitin Nabin: बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन सहारनपुर दौरे पर थे. नितिन नबीन का ये दौरा काफी चर्चा में रहा. वह दलित कार्यकर्ता के घर पर खाना खाया. संत रविदास मंदिर में पूजा अर्चना की. आइए जानते हैं पश्चिमी यूपी के दौरे से बीजेपी का दलित कनेक्ट कितना मजबूत होगा?.
Nitin Nabin Saharanpur Tour: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन सहारनपुर दौरे से दिल्ली लौट गए हैं. नितिन नबीन का सहारनपुर दौरा यूपी विधानसभा चुनाव के लिहाज से काफी अहम रहा. नितिन नबीन का पश्चिमी यूपी दौरा संगठन और चुनावी तैयारियों की समीक्षा से जुड़ा रहा. पश्चिमी यूपी को कभी बसपा का गढ़ माना जाता था, आज बीजेपी की एंट्री से सियासी हलचल तेज हो गई है. आइए जानते हैं नितिन नबीन के पश्चिमी यूपी दौरे से क्या समीकरण बदलेगा?.
दलित कार्यकर्ता के घर पर खाना खाया
नितिन नबीन ने मेरठ और सहारनपुर दौरे से चुनावी शंखनाद कर दिया है. बीजेपी की नजर वेस्ट यूपी की 71 सीटों पर है. साथ ही दलित वोट बैंक पर भी है. इसका अंदाजा बीजेपी अध्यक्ष के सहारनपुर दौरे से लगा सकते हैं. नितिन नबीन सहारनपुर में प्रवेश करने के बाद दलित कार्यकर्ता अजब सिंह के घर पहुंचे. यहां करीब 25 मिनट तक रुके. इतना ही नहीं नितिन नबीन ने दलित कार्यकर्ता अजब सिंह के घर पर खाना भी खाया. नितिन नबीन ने अजब सिंह के घर पर अरहर की दाल, रोटी, पुलाव, आलू की सूखी सब्जी, रायता और आइसक्रीम खाई. उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मौजूद रहे.
रविदास मंदिर में पूजा की
इससे पहले नितिन नबीन संत शिरोमणि गुरु रविदास मंदिर पहुंचे. यहां उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना की. स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत करते हुए संत रविदास की मूर्ति और पुस्तक भेंट की. सहारनपुर दौरे पर उन्होंने किसी भी कार्यकर्ता की उपेक्षा नहीं होने दी. कार्यकर्ता और पदाधिकारियों की बैठक में नबीन ने सबकी सुनी. किसी को बोलने से रोका नहीं गया. यही वजह रही कि कार्यकर्ता और पदाधिकारी अपने बॉस से सीधा संवाद कर गदगद हो गए.
सहारनपुर की 7 सीटों पर रही नजर
भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन की नजर सहारनपुर की 7 विधानसभा सीटों पर थी. पिछले चुनाव की बात करें तो यहां बीजेपी 5 सीटें जीती थीं. भाजपा ने नकुड़, सहारनपुर नगर, देवबंद, रामपुर मनिहारन और गंगोह में जीत हासिल की थी. वहीं, बेहट और सहारनपुर विधानसभा सीट पर सपा से हार का सामना करना पड़ा था. 2027 के चुनाव में बीजेपी 7 सीटें जीतने का प्लान कर रही है.
वेस्ट यूपी में दलित वोटर कितना?
पूरे प्रदेश की बात करें तो यूपी में दलित वोटर 21 से 22 फीसदी है. वेस्ट यूपी के विभिन्न जिलों में दलित वोटर लगभग आधा हैं. करीब 11 से 12 फीसदी दलित वोटर पश्चिमी यूपी में है. ऐसे में सियासी दलों की नजर वेस्ट यूपी के दलित वोटरों पर रहती है. पिछले चुनावों में बसपा का खराब प्रदर्शन भी बड़ी वजह रही है. बसपा के खराब प्रदर्शन के बाद दलित वोटर पर अन्य दलों की नजर पड़ती गई. अब 2027 के चुनाव में बीजेपी की नजर है.
किस जिले में कितने फीसदी वोटर?
वेस्ट यूपी के मेरठ जनपद की बात करें तो यहां लगभग 14 से 15 प्रतिशत वोटर दलित है. रामपुर में लगभग 13 प्रतिशत वोटर है. बागपत और शामली में लगभग 11 प्रतिशत वोटर हैं. सहारनपुर, बिजनौर, आगरा में यह आबादी 20% से भी अधिक है, जहां दलित मतदाता हार-जीत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं.
लगातार शिफ्ट हो रहा दलित वोट
बसपा प्रमुख मायावती ने साल 2007 में बहुमत लाकर अपनी सरकार बनाई. इसके ठीक 7 साल बाद 2014 में दलित वोट शिफ्ट होता गया. वेस्ट यूपी में 24 जिले आते हैं, इसमें 126 विधानसभा सीटें हैं. 2022 में बीजेपी ने इन 126 सीटों में 85 सीटें जीती थीं, जबकि सपा और आरएलडी ने मिलकर 41 सीटें जीतीं. 2017 की बात करें तो बीजेपी ने यहीं से 100 सीटें जीती थीं. इसका मतलब कि बीजेपी को 2022 के चुनाव में करीब 15 सीटों का नुकसान झेलना पड़ा था. इस बार आरएलडी एनडीए गठबंधन का हिस्सा है.
सपा भी गढ़ाए हैं नजर
वेस्ट यूपी के इन दलित वोटरों पर बीजेपी के अलावा समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी की भी नजर है. अखिलेश यादव 15 नवंबर को वेस्ट यूपी में दलित सम्मेलन करने जा रहे हैं. सपा इन सम्मेलनों से दलित वोटरों को जोड़ने की कोशिश करेगी. सपा इस सम्मेलन से दलित समाज के बीच अपना राजनीतिक संदेश पहुंचाना चाहती है. सपा का कहना है कि दलितों के मान-सम्मान और अधिकारों के मुद्दे पर वह उनके साथ है. अखिलेश यादव ने इसके लिए राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन को कमान सौंपी हैं. वह पश्चिमी यूपी में दलित उत्पीड़न के मुद्दे उठाते रहे हैं.