)
Nana Patekar Death News: अपनी दमदार आवाज और अदायगी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले बॉलीवुड एक्टर नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे. 75 साल की उम्र में गोवा के मणिपाल अस्पताल में उनका निधन हो गया है. बताया जा रहा है कि गुरुवार सुबह 5.30 बजे नाना पाटेकर को कार्डियक अरेस्ट आया था. उनके निधन की खबर से पूरा देश, बॉलीवुड और उनके प्रशंसक गहरे शोक में डूब गए हैं. नाना पाटेकर के निधन पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त किया है.
उन्होंने एक्स पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि पद्म श्री नाना पाटेकर जी का निधन कला जगत की अपूरणीय क्षति है. सीएम योगी ने उनके अभिनय के साथ-साथ उनके सामाजिक सरोकारों और 'नाम फाउंडेशन' के जरिए किसानों के लिए किए गए निस्वार्थ सामाजिक कार्यों की भी सराहना की. इसके साथ ही, उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की.
लखनऊ में की थी सीएम योगी की तारीफ
नाना पाटेकर हाल ही में लखनऊ आए थे, जहां उन्होंने यूपी पुलिस के विशेष गीत 'खाकी का सितारा' के लॉन्चिंग कार्यक्रम में शिरकत की थी. इस दौरान एक्टर ने उत्तर प्रदेश की मजबूत कानून-व्यवस्था की जमकर सराहना की थी. उन्होंने कहा था कि करीब 25 करोड़ की आबादी वाले इतने बड़े राज्य में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना आसान काम नहीं है. इसके लिए एक दृढ़ इच्छाशक्ति, स्पष्ट नीति और मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता होती है, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में देखने को मिली है.
लखनऊ दौरे पर की थी यूपी पुलिस
एक्टर ने कहा था कि पिछले कई दशकों में उन्होंने उत्तर प्रदेश में काफी बदलाव देखा है. योगी सरकार के नेतृत्व में पुलिस को आधुनिक संसाधन, नई तकनीक और आत्मविश्वास मिला है. वहीं, सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी एक्टर की खूब तारीफ की थी. मुख्यमंत्री ने कहा था कि जब नाना पाटेकर किसानों के लिए काम करते हुए उनसे मिलने आए और अपना परिचय दिया, तो उन्हें हैरानी हुई.
मुख्यमंत्री ने भी की थी एक्टर की तारीफ
सीएम योगी ने कहा था कि मैं हैरान था. इतना बड़ा एक्टर किसानों के लिए काम कर रहा है, लेकिन ये सच है. उन्होंने यह भी कहा था कि नाना पाटेकर ने सब काम बिना किसी पब्लिसिटी या दिखाने के चुपचाप किया.
नाना पाटेकर ने न केवल फिल्मों में अपनी अदाकारी से लोहा मनवाया, बल्कि वास्तविक जीवन में भी उन्होंने बिना किसी पब्लिसिटी के किसानों और जरूरतमंदों के लिए काम किया. उनका चले जाना भारतीय कला और सामाजिक क्षेत्र के लिए एक ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसे भर पाना नामुमकिन है.