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BJP vs BJP in Gorakhpur/ नागेन्द्र मणि त्रिपाठी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर में मूसलाधार बारिश के बाद जलभराव की समस्या अब केवल जनता की परेशानी तक सीमित नहीं रही, बल्कि जनप्रतिनिधियों के बीच खुली तकरार की वजह बन गई है. शहर के बेतियाहाता समेत कई इलाकों में पानी भरने और जलनिकासी न होने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदर सांसद रवि किशन और बीजेपी के ही स्थानीय पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी के बीच फोन पर हुई तीखी बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
राजनीतिक तंज में बदली जलनिकासी की शिकायत
जानकारी के अनुसार, वार्ड नंबर 26 बेतियाहाता के भाजपा पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने शहर के जलभराव, बंद पड़े पंपिंग सेट और रेगुलेटरों की स्थिति को लेकर सांसद रवि किशन को फोन किया था. पार्षद जब शहर में पानी भरने और नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे थे, तभी बातचीत का रुख अचानक राजनीतिक छींटाकशी में बदल गया. वायरल वीडियो के दावों के मुताबिक, सांसद रवि किशन ने नाराजगी में पार्षद से पूछ लिया, 'सपा ज्वाइन कर लिए क्या?' इस पर पलटवार करते हुए पार्षद ने तुरंत कहा, 'सांसद जी, आप बसपा ज्वाइन कर लिए क्या?' इसके बाद दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा.
नौका विहार पहुंचे पार्षद, सांसद पर लगाया अनुपस्थिति का आरोप
फोन पर हुई इस बहस के बाद मामला यहीं शांत नहीं हुआ. पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी खुद नौका विहार इलाके में पहुंचे और वहां से एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया. वीडियो में पार्षद ने दावा किया कि वे सांसद से मिलने पहुंचे हैं, लेकिन सांसद मौके पर मौजूद नहीं हैं. पार्षद ने मीडिया के सामने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जनप्रतिनिधि जलभराव और राहत कार्यों को लेकर जनता और आला अधिकारियों को गलत जानकारी दे रहे हैं.
देर रात महापौर संग सड़कों पर उतरे रवि किशन
दूसरी तरफ, विवाद के तूल पकड़ने के बाद सदर सांसद रवि किशन देर रात भारी बारिश के बीच खुद जलभराव वाले इलाकों का जायजा लेने निकले. उन्होंने गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और नगर निगम की प्रशासनिक टीम के साथ बाढ़ व जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया. सांसद ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को जलनिकासी की गति बढ़ाने और त्वरित राहत पहुंचाने के कड़े निर्देश दिए.
गोरखपुर में लगातार हो रही बारिश ने नगर निगम और ड्रेनेज सिस्टम के दावों की हवा निकाल दी है. एक तरफ जहां आम जनता घरों और सड़कों पर भरे पानी से त्रस्त है, वहीं सत्ताधारी दल के ही सांसद और पार्षद के बीच हुई इस नोकझोंक ने जिले की सियासत को गरमा दिया है. अब सवाल केवल पानी निकलने का नहीं, बल्कि यह भी है कि नेताओं की इस आपसी खींचतान के बीच बेहाल जनता को धरातल पर कब तक राहत मिल पाती है.