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मां विंध्यवासिनी धाम मिर्जापुर: मां ब्रह्मचारिणी के दिव्य स्वरूप के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु, नौ दिनों के कल्पवास से गूंजा विंध्य क्षेत्र

Maa Vindhyavasini Temple Mirzapur: अनादिकाल से जन-जन की आस्था का केंद्र रहे प्रसिद्ध सिद्धपीठ विंध्याचल में शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन भक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा है. मां गंगा और पावन विंध्य पर्वत के सुरम्य संगम तट पर विराजमान मां विंध्यवासिनी की नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी के दिव्य रूप में पूजा-अर्चना और आराधना की जा रही है.

Edited By Preeti Chauhan
Published: Oct 12, 2026, 06:34 AM IST | Updated: Oct 12, 2026, 06:51 AM IST
Image Credit: Shardiya Navratri 2026
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राजेश मिश्र/मीरजापुर: शारदीय नवरात्र में आदिशक्ति माता विंध्यवासिनी के नौ रूपों की आराधना की जाती है.  पहले दिन हिमालय की पुत्री पार्वती अर्थात शैलपुत्री के रूप में माँ का पूजन करने का विधान है, वहीं दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजन किया जाता है . प्रत्येक प्राणी को सदमार्ग पर प्रेरित वाली माँ का यह स्वरूप बड़ा दिव्य है.  माता सफेद वस्त्र धारण कर एक हाँथ में कमंडल और दूसरे हाथ में माला लिए हुए सभी के लिए आरध्यनीय है. विन्ध्य और माँ गंगा के तट पर विराजमान माँ विंध्यवासिनी ब्रह्मचारिणी के रूप सभी भक्तों का कष्ट दूर करती है. धाम में तड़के से ही 'जय माता दी' और 'हर-हर महादेव' के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान है.

अनादिकाल से आस्था का केंद्र रहे विन्ध्याचल में विन्ध्य पर्वत व पवन पावनी मां भागीरथी के संगम तट पर विराजमान मां विंध्यवासिनी का दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजन व अर्चन किया जाता है. विन्ध्यक्षेत्र में मां को विन्दुवासिनी अर्थात विंध्यवासिनी के नाम से भक्तों के कष्ट को दूर करने वाला माना जाता है. प्रत्येक प्राणी को सदमार्ग पर प्रेरित वाली मां ब्रह्मचारिणी सभी के लिए आराध्य है. नवरात्रि के नौ दिनों मां सभी भक्तों के मनोकामना को पूरा करती हैं. इस गृहस्थ जीवन में जिस-जिस वस्तुओं की जरूरत प्राणी को होता है वह सभी प्रदान करती है. मां की सविधि पूजा अर्चना कर जप करने वाले भक्तो की सारी मनोकामना पूरी होती है.

माँ ब्रह्मचारिणी के दिव्य स्वरूप का महत्व
सनातन परंपरा में नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष विधान है. माता का यह स्वरूप अत्यंत दिव्य, भव्य और सौम्य है। श्वेत वस्त्र धारण किए माता के एक हाथ में जप की माला और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित है.  मान्यता है कि प्रत्येक प्राणी को सन्मार्ग पर अग्रसर करने वाली मां ब्रह्मचारिणी की साधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. स्थानीय विद्वान आचार्य अगस्त द्विवेदी बताते हैं कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां के इस रूप की सविधि पूजा और जप करते हैं, उन्हें गृहस्थ जीवन के लिए आवश्यक सभी सुख-समृद्धि और मनोकामनाएं प्राप्त होती हैं.

9 दिनों के अनुष्ठान में लीन हुए दूर-दराज से आए श्रद्धालु
मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन के लिए देश भर से श्रद्धालु मिर्जापुर पहुंच रहे हैं.  बहुत से भक्त ऐसे हैं जो पूरे 9 दिनों तक विंध्याचल क्षेत्र में ही कल्पवास (निवास) कर पूरे तन-मन से मां की कठिन साधना और अनुष्ठान करते हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि मां विंध्यवासिनी के मनोहारी रूप के दर्शन मात्र से ही शरीर में नई ऊर्जा, नए उत्साह और सद्विचारों का संचार होता है.  श्रद्धालुओं का कहना है कि नवरात्रि में नौ दिन मां के अलग अलग रूपों की पूजा कर भक्त सभी कष्टों से छुटकारा पाते हैं. माता के किसी भी रूप में दर्शन करने मात्र से प्राणी के शरीर में नयी उर्जा, नया उत्साह व सदविचार का संचार होता है

नवरात्र के इस पावन अवसर पर विंध्य क्षेत्र में सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुलिस व प्रशासन द्वारा चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है, जिससे भक्त सुलभता से दर्शन कर पुण्य के भागी बन रहे हैं.

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About the Author

प्रीति चौहान जीन्यूज में पत्रकार हैं, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड डिजीटल टीम में  ब्रेकिंग, हाइपरलोकल, क्राइम, और अन्य मुद्दों को लेकर खबरें लिखती हैं. 
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