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Azamgarh Murder Case/ वेदेन्द्र प्रताप शर्मा: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने पूरे पुलिस महकमे की सांसें अटका दीं. एक सिरफिरे शख्स ने पूजा के दौरान हुए मामूली विवाद में अपनी पत्नी, 10 साल के मासूम बेटे और दो पुजारियों की बेरहमी से हत्या कर दी. इसके बाद अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर के साथ अपने ही तीन बच्चों को घर में बंधक बनाकर बैठ गया. करीब 8 घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे, मान-मनौव्वल, टियर गैस, स्टन ग्रेनेड और आखिरकार एनकाउंटर के साथ इस खौफनाक ऑपरेशन का अंत हुआ.
आइए समझते हैं कि आखिर काली रात में क्या-क्या हुआ और पुलिस ने किस तरह इस बेहद चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को अंजाम दिया?
पूजा के दौरान विवाद से हुई खूनी खेल की शुरुआत
घटनाक्रम की शुरुआत घर में चल रही एक पूजा से हुई. तीन-चार दिन से अरविंद सिंह के घर में पूजा चल रही थी. मंगलवार की शाम को घर में चार पंडित, अरविंद की पत्नी बबीता और उनके बच्चे मौजूद थे. शाम करीब 6-7 बजे अरविंद बाजार से घर पहुंचे, जहां घर में पूजा होते देखकर उन्होंने पंडितों से जानकारी ली.
इसके बाद बौखला कर पंडितों से आधार कार्ड मांगना शुरू कर दिया. इसी बात को लेकर उनके बीच बहस होने लगी. आरोप है कि विवाद के दौरान अरविंद ने लाइसेंसी पिस्टल निकालकर फायरिंग कर दी. गोली लगने से उनकी पत्नी बबीता और दो पंडित घायल हो गए, जहां कुछ देर बाद तीनों की मौत हो गई.
डिप्रेशन में था अरविंद
फायरिंग होते ही पूजा में शामिल अन्य पंडित मौके से भाग निकले. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल की जांच में लगे. वहीं तीनों डेड बॉडी को पुलिस कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. बताया जा रहा कि आरोपी अरविंद सिंह के बड़े भाई गुड्डू सिंह का कई साल पहले आपसी रंजिश को लेकर मर्डर हुआ था, जिसके चलते अरविंद डिप्रेशन में चल रहे थे. जहां उनकी पत्नी शांतिपाठ व अन्य पूजा करवाना चाह रही थीं, जिसका वह विरोध कर रहे थे.
बेटे को भी मारी गोली, 3 बच्चों को बनाया बंधक
तीन लोगों का कत्ल करने के बाद भी अरविंद का सिरफिरापन शांत नहीं हुआ. उसने अपने 10 साल के बेटे पर भी गोली चला दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. इसके बाद वह अपने तीनों बच्चों को लेकर कमरे के अंदर बंद हो गया. बाहर पुलिस का कड़ा पहरा था और अंदर 6 राउंड की रिवॉल्वर लिए सनकी पिता.
घंटों की मान-मनौव्वल और पुलिस का सब्र
सूचना मिलते ही पुलिस और जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे. सबसे बड़ी चुनौती घर के अंदर बंद तीन मासूमों की जान बचाना थी. पुलिस ने संयम बनाए रखा और लगातार लाउडस्पीकर व बातचीत के जरिए अरविंद को समझाने और बच्चों को बाहर भेजने की अपील की, लेकिन 7 घंटे तक वह किसी की बात सुनने को तैयार नहीं हुआ.
अंदर से चली गोली और बदला ऑपरेशन का रुख
7 घंटे से अधिक का समय बीतने के बाद अचानक घर के अंदर से फायरिंग की तेज आवाज आई. पुलिस को लगा कि अब अगर देर की तो अंदर बंद मासूमों की जान चली जाएगी. इसके बाद एडीजी वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा के नेतृत्व में पुलिस ने तुरंत 'फोर्सफुल एंट्री' का फैसला लिया.
स्टन ग्रेनेड, टियर गैस और बेटी को बनाया ढाल
पुलिस ने आरोपी का ध्यान भटकाने और उसे पस्त करने के लिए खिड़कियों के जरिए स्टन ग्रेनेड (Stun Grenade) और टियर गैस (आंसू गैस) के गोले दागे. जैसे ही पुलिस ने दरवाजा तोड़कर एंट्री की, आरोपी अरविंद ने अंधाधुंध अपनी रिवॉल्वर की सभी 6 गोलियां पुलिस टीम पर चला दीं. हद तो तब हो गई, जब उसने अपनी बड़ी बेटी को अपने सामने ढाल (Human Shield) की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जबकि छोटी बेटी हाथ से नीचे गिर गई.
जवाबी कार्रवाई में एनकाउंटर और रेस्क्यू
पुलिस ने जैसे-तैसे मासूम बच्चों को बचाते हुए 3-4 राउंड जवाबी फायरिंग की. इस फायरिंग में आरोपी अरविंद सिंह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा. इसके बाद पुलिस ने तुरंत तीनों बच्चों को रेस्क्यू किया. गोली लगने से घायल 10 साल के मासूम को तुरंत अस्पताल भेजा गया, जबकि अन्य दो बच्चियां डिहाइड्रेशन और गहरे ट्रॉमा का शिकार थीं, उन्हें भी तुरंत चिकित्सा सुविधा दी गई. अस्पताल ले जाने के दौरान घायल आरोपी अरविंद की भी मौत हो गई.
क्या बोले वाराणसी जोन के एडीजी?
घटना की गंभीरता को लेकर वाराणसी जोन के एडीजी नवीन अरोड़ा ने बताया कि पुलिस ने पूरे संयम का परिचय दिया, कमांडो के जरिए रेस्क्यू करने की कोशिश की गई. इसी बीच एसएसपी की टीम जब बातचीत करने अंदर पहुंची तो आरोपी ने अपने बेटे को गोली मार दिया. ऐसी स्थिति में पुलिस के पास कोई चारा नहीं था, पुलिस बंधक बच्चों को बचाने का प्रयास कर ही रही थी. जैसे ही पुलिस बच्चों को बचाने के लिए आगे बढ़ी उसने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग की. इसके जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग किया, जिसमें आरोपी अरविंद गंभीर रूप से घायल हुआ. जिसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां उसकी मौत हो गई है.
पूजा के मामूली विवाद से शुरू हुआ यह मामला चार मौतों, तीन मासूमों के बंधक बनने और एक एनकाउंटर पर जाकर खत्म हुआ. लगभग 8 घंटे तक आजमगढ़ में दहशत और तनाव का माहौल बना रहा. हालांकि, पुलिस की सूझबूझ, धैर्य और सटीक रणनीति के चलते दो मासूम बच्चियों को सुरक्षित बचाया जा सका, वरना यह त्रासदी और भी भयावह हो सकती थी.