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लखनऊ ट्रिपल मर्डर केस में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. तीनों शवों का अंतिम संस्कार होने के बाद जहां एक तरफ आरोपियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस की घोर लापरवाही पर भी बड़ा एक्शन हुआ है. इस केस के मुख्य आरोपी ऋषभ शुक्ला के खिलाफ लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और नगर निगम ने संयुक्त कार्रवाई की. एलडीए की टीम ने आरोपी के मकान को सील कर दिया. इसके बाद नगर निगम ने अवैध निर्माण व बाउंड्री वॉल को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया गया.
पुलिस ने आरोपी की कार को भी क्रेन से उठवाकर सआदतगंज थाने पहुंचा दिया है. पुलिस ने इस केस के मुख्य आरोपी ऋषभ शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया था. उसके पास से एक देसी पिस्टल, छह कारतूस, छह खोखे और दो मैगजीन बरामद हुई हैं. इसके अलावा उसके पिता दिनेश शुक्ला, चाचा सतीश व गिरिश शुक्ला, और बहनें प्रिया व अदिति को भी गिरफ्तार कर प्रभारी सीजीएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया है. फरार दो अन्य चाचा की तलाश में पुलिस की दो विशेष टीमें गठित की गई हैं.
इस वारदात से पहले पुलिस में शिकायत के बावजूद कार्रवाई न करने पर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश था. मामले को तूल पकड़ता देख पुलिस आयुक्त तरुण गाबा ने सआदतगंज के इंस्पेक्टर संतोष कुमार आर्य और कश्मीरी मोहल्ला चौकी प्रभारी दरोगा अजय कुमार चौरसिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.
घटना के बाद उपजे जनाक्रोश और अशरफाबाद चौराहे पर लगे जाम के बीच डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की. उन्होंने परिवार के एक सदस्य को नगर निगम में ओएसडी (OSD) की नौकरी, पीड़ित बेटी की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने और आजीवन सुरक्षा व आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. डिप्टी सीएम के आश्वासन के बाद परिजन शवों के अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए, जिसके बाद गुलालाघाट पर कड़ी सुरक्षा के बीच तीनों शवों का अंतिम संस्कार किया गया.
(लखनऊ से नंदन श्रीवास्तव की रिपोर्ट)