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Kashi Vishwanath Temple Assault Case/ जयपाल: विश्व प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व एसडीएम शंभूशरण की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के साथ गाली-गलौज, मारपीट और प्राइवेट बाउंसरों से पिटवाने के गंभीर मामले में विशेष SC/ST कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने पीड़ित की याचिका को परिवाद (Complaint Case) के रूप में स्वीकार किया है. इसके साथ ही, पूर्व एसडीएम शंभूशरण को 3 नवंबर को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का समन जारी किया है. कोर्ट के इस सख्त आदेश के बाद वाराणसी के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.
गला दबाने और सार्वजनिक अपमान का आरोप
पूरा मामला 16 फरवरी का है, जब काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में दर्शन के दौरान अचानक धक्का-मुक्की और विवाद शुरू हो गया था. आरोप है कि तत्कालीन एसडीएम शंभूशरण ने श्रद्धालुओं के साथ न केवल अभद्र भाषा और गाली-गलौज का प्रयोग किया, बल्कि प्राइवेट बाउंसरों से उनकी बेरहमी से पिटाई भी करवा दी. पीड़ित श्रद्धालु का आरोप है कि उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और उनका गला दबाया गया. जब उनके एक साथी ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उसके साथ भी मारपीट की गई, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था.
प्रशासनिक अनदेखी के बाद खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
घटना के तुरंत बाद पीड़ित ने स्थानीय पुलिस थाने और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से लिखित शिकायत की थी. हालांकि, आरोपी के प्रभावशाली पद पर होने के कारण पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की और केस दर्ज करने से इनकार कर दिया. इसके बाद पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाते हुए अदालत का रुख किया. पीड़ित ने अपनी याचिका के साथ अस्पताल के मेडिकल पर्चे, जाति प्रमाण पत्र और घटना के दौरान की सीसीटीवी फुटेज साक्ष्य (Evidence) के रूप में कोर्ट में पेश किए.
पुलिस पर लगे ये संगीन आरोप
पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि थाने में शिकायत देने के बावजूद मामले में कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद 10 मार्च 2026 को रजिस्टर्ड डाक के जरिए भी पुलिस को शिकायत भेजी गई, लेकिन फिर भी कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद बाबूलाल सोनकर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच कराने की मांग की. इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट सुधाकर राय की अदालत में हुई.
कोर्ट की सख्ती से मचा हड़कंप
साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद विशेष SC/ST कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझा और याचिका को परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया. अदालत ने आरोपी पूर्व एसडीएम को 3 नवंबर को हर हाल में कोर्ट के समक्ष हाजिर होने के निर्देश दिए हैं.