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ससुर की हत्या से पहले नौकर से 330 बार बात! क्या पति सुब्रत भी था शालू के खेल का हिस्सा?

Kanpur Vineet Minocha CDR Call History: कत्ल से ठीक 21 दिन पहले तक बहू शालू और उसके पति ने घर के पूर्व नौकर विशाल से 330 बार फोन पर बात की. आखिर एक नौकर से दिन-रात इतनी बातचीत क्यों हो रही थी? क्या कॉल पर कत्ल की टाइमिंग, डुप्लीकेट चाबी और 6 लाख की सुपारी की डील फाइनल हो रही थी?

Written By Preeti Chauhan
Published: Sep 08, 2026, 01:35 PM IST | Updated: Sep 08, 2026, 01:57 PM IST
Image Credit: Kanpur Murder Case CDR Angle
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Kanpur Murder Case CDR Angle: कानपुर के चर्चित करोड़पति दवा व्यापारी विनीत मनोचा हत्याकांड में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। ससुर के कत्ल की साजिश रचने वाली बहू शालू मनोचा और उसके पति सुब्रत की पिछले 21 दिनों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) ने पुलिस के होश उड़ा दिए हैं.कत्ल से ठीक पहले के 3 हफ्तों में मनोचा परिवार और आरोपी नौकर विशाल गौतम के बीच 330 बार फोन पर बातचीत हुई थी.  अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर 21 दिनों में 330 बार फोन पर क्या बातें हो रही थीं और 6 लाख की सुपारी का चक्रव्यूह कैसे बुना गया?

21 दिन, 330 कॉल और कत्ल की टाइमिंग 
शालू और विशाल के बीच 30 डायरेक्ट कॉल: बहू शालू और सुपारी किलर विशाल गौतम के बीच 21 दिनों में करीब 30 बार सीधे बातचीत हुई। पुलिस के मुताबिक, इन्हीं कॉल्स पर कत्ल का प्लान, 5 सितंबर की तारीख और 6 लाख रुपये की सुपारी (2 लाख एडवांस, 4 लाख काम के बाद) तय हुई.  जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में बातचीत किस वजह से हुई.

वारदात की रात 14 बार बातचीत
5 सितंबर की खौफनाक रात, जब शालू परिवार के साथ पार्टी में बाहर थी, तब भी उसके और विशाल के बीच 14 बार फोन पर संपर्क हुआ. शालू फोन और मैसेज से अपडेट ले रही थी कि— "घर खाली है, अब अंदर घुस जाओ"।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, कॉल्स का सिर्फ आंकड़ा ही नहीं, बल्कि उनका समय और पैटर्न भी खंगाला जा रहा है. जांचकर्ताओं की नजर इस बात पर है कि वारदात से पहले किन-किन दिनों में बातचीत ज्यादा हुई और क्या इन कॉल्स का कोई संबंध हत्या की कथित साजिश से था.

परिवार में पहले काम करता था विशाल

 हालांकि, सुब्रत ने पूछताछ में दावा किया है कि विशाल उनके परिवार के लिए छोटे-मोटे काम करता था. इसी कारण उससे लगातार संपर्क बना रहता था.  लेकिन पुलिस इस दावे की पुष्टि अन्य सबूतों और बयानों से करने में जुटी है. विशाल गौतम पहले विनीत मनोचा के यहां काम कर चुका था और परिवार से उसकी पुरानी पहचान थी. हत्या के बाद जब पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं तो विशाल का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को खंगालना शुरू किया.

 21 दिनों में हुई 330 कॉल्स महज संयोग नहीं-पुलिस को शक

जांच अधिकारियों का मानना है कि 21 दिनों में हुई 330 कॉल्स महज संयोग नहीं हो सकतीं. यही वजह है कि अब हर कॉल के समय, अवधि और परिस्थितियों की जांच की जा रही है. पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बातचीत सामान्य कामकाज से जुड़ी थी या फिर इसके पीछे कोई और वजह थी. फिलहाल इस सवाल का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन एक बात तय है कि 21 दिन में हुई 330 कॉल्स अब कानपुर के इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की सबसे अहम कड़ी बन चुकी हैं.

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About the Author

प्रीति चौहान जीन्यूज में पत्रकार हैं, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड डिजीटल टीम में  ब्रेकिंग, हाइपरलोकल, क्राइम, और अन्य मुद्दों को लेकर खबरें लिखती हैं. 
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