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चैंपियन की 'नर्सरी' बर्बाद: जिस मैदान ने दिया इंटरनेशनल एथलीट, वो झाड़ियों में क्यों खोया? जानिए भटेवरा मिनी स्टेडियम की बदहाली की कहानी

Jaunpur Bhatewara Mini Stadium: भटेवरा मिनी स्टेडियम आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. मैदान में जगह-जगह ऊंची-ऊंची घास और झाड़ियां उग आई हैं. टूटी बाउंड्री, खराब स्ट्रीट लाइट और बरसात में टपकते भवनों ने उसके रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हैरानी की बात यह है कि इसी मैदान पर एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाले जैवलिन थ्रो प्लेयर रोहित यादव भी अभ्यास किया करते थे.

चैंपियन की 'नर्सरी' बर्बाद: जिस मैदान ने दिया इंटरनेशनल एथलीट, वो झाड़ियों में क्यों खोया? जानिए भटेवरा मिनी स्टेडियम की बदहाली की कहानी

Jaunpur Bhatewara Mini Stadium/ अजीत सिंह: ग्रामीण इलाकों की छिपी हुई खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए भटेवरा मिनी स्टेडियम बनाया गया, लेकिन आज यह मिनी स्टेडियम खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. जिस मैदान ने कभी देश को इंटरनेशनल लेवल का जैवलिन थ्रो प्लेयर रोहित यादव जैसा सितारा दिया, वह मैदान आज अव्यवस्था, घनी झाड़ियों और बदहाली का शिकार है.

आलम यह है कि यहां अभ्यास करने आने वाले नौनिहाल और युवा खिलाड़ियों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है.

टूटी बाउंड्री, टपकती छतें और खारा पानी
मछलीशहर विकासखंड के भटेवरा गांव में बने इस स्टेडियम से कठार, ऊंचडीह, बामी और चितांव जैसे आसपास के कई गांवों के युवा और बच्चे जुड़े हुए हैं, लेकिन मौजूदा वक्त में मैदान में दौड़ना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल है. यहां मैदान पर जगह-जगह ऊंची-ऊंची घास और झाड़ियां उग आई हैं, जिससे जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा रहता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित सफाई नहीं होने से स्थिति लगातार खराब होती गई. घास और झाड़ियों के बीच जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना रहता है. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता स्वाभाविक है.

अभ्यास के लिए पहुंचे बच्चे, लेकिन मैदान देखकर लौटे निराश
स्टेडियम की स्थिति का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि कुछ बच्चे अभ्यास करने के इरादे से मैदान पर पहुंचे, लेकिन चारों तरफ फैली ऊंची घास और अव्यवस्था देखकर उन्हें निराशा हुई. बच्चों ने सरकार और संबंधित विभाग से मैदान की सफाई कराने की मांग की, ताकि वे सुरक्षित वातावरण में खेलों का अभ्यास कर सकें.

बच्चों का कहना है कि स्टेडियम परिसर में बने भवनों की छतें बरसात के दौरान टपकती हैं. मैदान में पानी भर जाने के कारण खेलना भी मुश्किल हो जाता है. उनका कहना है कि अगर मैदान की नियमित सफाई और मरम्मत करा दी जाए तो क्षेत्र के युवाओं को अभ्यास के लिए बेहतर जगह मिल सकती है.

डेढ़ साल से खराब स्ट्रीट लाइट, पीने के पानी की भी समस्या
स्टेडियम में तैनात पीआरडी जवान ने भी व्यवस्थाओं को लेकर कई समस्याएं बताईं. उनके मुताबिक, परिसर में लगी स्ट्रीट लाइट करीब डेढ़ साल से खराब पड़ी है. इसकी शिकायत कई बार की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. पीआरडी जवान ने बताया कि स्टेडियम में पीने के लिए जो नल लगा है, उसमें भी खारा पानी आता है. ड्यूटी करने वाले जवानों को पीने का पानी भी अपने घर से लाना पड़ता है.

उनका कहना है कि परिसर के भवन बरसात में टपकते हैं और बाउंड्री वॉल का एक हिस्सा भी गिर चुका है. मैदान की बदहाली के कारण यहां उपलब्ध खेल सामग्री भी खराब हो रही है.

रोहित यादव भी इसी मैदान पर करते थे अभ्यास
भटेवरा मिनी स्टेडियम की मौजूदा स्थिति इसलिए भी चर्चा का विषय है, क्योंकि क्षेत्र के इंटरनेशनल लेवल के प्लेयर रोहित यादव इसी मैदान पर अभ्यास करने आया करते थे. पीआरडी जवान के मुताबिक, रोहित यादव का गांव भी यहां से करीब तीन किलोमीटर दूर है.

जिस मैदान पर अभ्यास कर एक खिलाड़ी ने अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया, उसी मैदान की वर्तमान स्थिति ग्रामीण खेल सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मैदान को व्यवस्थित रखा जाए तो यहां से और भी प्रतिभाएं आगे बढ़ सकती हैं.

50 लाख के बजट का दावा, लेकिन धरातल पर सवाल
इस मामले को लेकर जब खेल एवं युवा कल्याण मंत्री गिरीश चंद्र यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले स्टेडियम के पुनर्जीवित के लिए 50 लाख रुपये दिए गए थे. मंत्री ने स्टेडियम को साफ-सुथरा बताया और कहा कि बरसात में कुछ घास फूस उग आई होगी उसे भी सही कराया जाएगा. इसके साथ ही अगर कहीं किसी प्रकार की समस्या है तो उसे भी ठीक करा लिया जाएगा. स्टेडियम में लगी स्ट्रीट लाइट भी जल्द ठीक कराया जाएगा.

हालांकि, स्थानीय लोगों की शिकायतों और सामने आई तस्वीरों में दिखाई दे रही स्थिति के बीच सवाल उठ रहे हैं कि अगर रखरखाव के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है, तो मैदान में इतनी बड़ी-बड़ी झाड़ियां क्यों उगी हैं? स्ट्रीट लाइट, पेयजल, भवनों की मरम्मत और बाउंड्री वॉल की समस्या अब तक क्यों बनी हुई है?

नियमित सफाई और जवाबदेही तय करने की मांग
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से मिनी स्टेडियम की तत्काल सफाई कराने, जलभराव की समस्या दूर करने, क्षतिग्रस्त बाउंड्री वॉल की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट चालू कराने और पेयजल की व्यवस्था करने की मांग की है. इसके साथ ही, ओपन जिम और खेल सामग्री को भी उपयोग के योग्य बनाने की जरूरत बताई है.

लोगों का सुझाव है कि मछलीशहर विकासखंड में तैनात ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की समूहवार ड्यूटी लगाकर स्टेडियम की नियमित सफाई कराई जा सकती है. अब देखना यह है कि संबंधित विभाग कब तक इन समस्याओं का समाधान कर मैदान को फिर से खिलाड़ियों के अभ्यास योग्य बनाता है.  

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Pooja Singh

Pooja Singh

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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