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Varanasi Shinzo Abe Corridor: काशी में जब दोस्ती की मिसाल और रिश्तों की मिठास घुली, तो माहौल पूरी तरह भावुक हो उठा. वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में 'आबे मेमोरियल कॉरिडोर' के उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया. इस मौके पर जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की पत्नी आकिए आबे अपने पति को याद करते हुए अपने आंसू नहीं रोक सकीं.
शिंजो आबे की पत्नी के छलके आंसू
समारोह को संबोधित करते हुए आकिए आबे बेहद भावुक नजर आईं. उन्होंने कहा कि 2015 में जब मेरे पति काशी यात्रा से लौटे थे, तो वे अक्सर मुझसे यहां की गंगा आरती और बनारस की सुंदर यादें साझा करते थे. उसी समय से मेरे मन में भी काशी को देखने की इच्छा थी. आज अगर मेरे पति जीवित होते, तो अपने नाम पर बने इस स्मारक को देखकर बहुत खुश होते. यह कहते हुए उनकी आंखें भर आईं. उन्होंने रुद्राक्ष सेंटर की वास्तुकला की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसकी दीवारों पर जड़े 108 रुद्राक्ष भारत और जापान के बीच के सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाते हैं.
आंखों में उमड़े आंसुओं को पोंछते हुए जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की पत्नी ने कहा कि उनके पति का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सिर्फ राजनीतिक संबंध नहीं, बल्कि एक गहरा आत्मीय लगाव था. उन्हें इस तरह भावुक होता देख मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें ढांढस बंधाया और सांत्वना दी.
पद बदलते रहे, पर दोस्ती नहीं बदली- सीएम योगी
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आकिए आबे के साथ मिलकर कॉरिडोर का अनावरण किया. सीएम योगी ने कहा कि 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और आज उनके जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने पर उनके प्रिय मित्र शिंजो आबे की याद में इस कॉरिडोर का बनना एक अद्भुत संयोग है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह रिश्ता किसी पद या औपचारिकता का नहीं था, बल्कि सच्चे विश्वास का था. दुनिया अक्सर लाभ और हानि देखकर संबंध बनाती है, लेकिन भारत और जापान का यह ऐतिहासिक रिश्ता 'इंटरेस्ट' नहीं, बल्कि 'ट्रस्ट' यानी अटूट विश्वास की नींव पर खड़ा है. उन्होंने 2007 में दोनों नेताओं की पहली मुलाकात, 2015 की काशी यात्रा और 2017 के बुलेट ट्रेन शिलान्यास का विशेष जिक्र किया.
व्यापार से लेकर आस्था का अनूठा मेल
सीएम योगी ने बताया कि जापान 'उगते सूरज की भूमि' है और उत्तर प्रदेश 'सूर्यवंश की पावन धरा' है. उन्होंने कहा कि नोएडा में 500 एकड़ में 'जापानी सिटी' का निर्माण हो रहा है और यूपी में जापानी कंपनियों के लिए विशेष डेस्क बनाई गई है, जो दोनों देशों के आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी.
एक जीवंत क्लासरूम के रूप में अमर हुई दोस्ती
काशी की धरती पर बना यह 'आबे मेमोरियल कॉरिडोर' सिर्फ दो देशों के राजनीतिक संबंधों की दास्तान नहीं है, बल्कि यह दो सच्चे दोस्तों के उस आत्मीय बंधन का गवाह है जो समय और सीमाओं से परे है. यह कॉरिडोर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसा क्लासरूम साबित होगा, जो सिखाएगा कि जब दो दूरदर्शी मित्र निस्वार्थ भाव से हाथ मिलाते हैं, तो इतिहास का रुख बदल जाता है.