Explainer: जालौन किसान हत्याकांड: पांच दोषियों को उम्रकैद, जानिए अपहरण से अदालत के फैसले तक पूरी कहानी
Jalaun Prem Babu Murder Case: उत्तर प्रदेश के जालौन में किसान प्रेमबाबू के अपहरण व हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया. 11 सितंबर 2026 को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने दोषी पाए गए फूल सिंह, शत्रुघन, मोहित, आरिफ और अतर सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
Prem Babu Kidnapping Jalaun: उत्तर प्रदेश के जालौन में करीब साढ़े तीन साल पुराने किसान प्रेमबाबू के अपहरण और हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सतीश चंद्र द्विवेदी की अदालत ने मामले में दोषी पाए गए पांच आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने सभी दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है. फैसला 11 सितंबर 2026 को सुनाया गया.
यह मामला जालौन के डकोर कोतवाली क्षेत्र के डकोर गांव का है. अदालत के फैसले के बाद जमानत पर चल रहे सभी दोषियों को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया और उन्हें जिला कारागार भेज दिया गया. इस मामले में अदालत ने हत्या के अपराध को गंभीर माना, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए मृत्यु दंड के बजाय आजीवन कारावास को उचित सजा माना.
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, यह मामला वर्ष 2023 का है. डकोर गांव निवासी प्रेमबाबू के बेटे समरजीत सिंह ने 4 मार्च 2023 को डकोर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने पुलिस को बताया था कि उनके पिता प्रेमबाबू को गांव के ही कुछ लोग मोटरसाइकिल से अपने साथ ले गए हैं. परिवार के मुताबिक, प्रेमबाबू को जिस तरह से ले जाया गया था, उससे उनके अपहरण की आशंका थी. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज किया और मामले की जांच शुरू कर दी. शुरुआत में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रेमबाबू को तलाशना और यह पता लगाना था कि आखिर उन्हें कौन लोग अपने साथ लेकर गए हैं.
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को इस मामले में अहम सुराग मिला. विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपित मोहित कुमार की निशानदेही पर प्रेमबाबू के शव को बरामद किया. 6 मार्च 2023 को यमुना नदी के बीहड़ इलाके में स्थित एक गंदे नाले से शव मिला था. इसके बाद समरजीत ने शव की पहचान अपने पिता प्रेमबाबू के रूप में की. शव मिलने के बाद यह साफ हो गया कि मामला केवल अपहरण का नहीं बल्कि हत्या का भी है. इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाई.
जांच में सामने आए पांच नाम
पुलिस की विवेचना के बाद फूल सिंह, शत्रुघन उर्फ रामसहोदर, मोहित कुमार, आरिफ और अतर सिंह को इस मामले में आरोपित बनाया गया. पुलिस ने इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 364, 34, 302 और 120बी के तहत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया. इन धाराओं में हत्या, अपहरण, आपराधिक साजिश और अन्य आरोप शामिल थे. पुलिस की जांच का आधार यह था कि प्रेमबाबू का अपहरण योजनाबद्ध तरीके से किया गया और इसके बाद उनकी हत्या कर शव को यमुना के बीहड़ इलाके में फेंक दिया गया. मामला अदालत पहुंचने के बाद इसकी सुनवाई सत्र परीक्षण संख्या 141/2023 के तहत हुई. अदालत में अभियोजन पक्ष ने पुलिस की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपना पक्ष रखा.
अदालत में कैसे आगे बढ़ी सुनवाई?
मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश सतीश चंद्र द्विवेदी की अदालत में हुई. अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी हृदेश पांडेय ने पैरवी की. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने मामले से जुड़े साक्ष्य और गवाह पेश किए. अभियोजन का कहना था कि पांचों आरोपितों ने मिलकर प्रेमबाबू के अपहरण की योजना बनाई और बाद में उनकी हत्या कर दी. हत्या के बाद शव को यमुना नदी के बीहड़ क्षेत्र में फेंक दिया गया. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और पेश किए गए सबूतों पर विचार किया. न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष पांचों आरोपितों के खिलाफ लगाए गए हत्या और अपहरण के आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में सफल रहा है. यही वजह रही कि अदालत ने फूल सिंह, शत्रुघन उर्फ रामसहोदर, मोहित कुमार, आरिफ और अतर सिंह को दोषी करार दिया.
मृत्यु दंड की मांग के बावजूद उम्रकैद क्यों?
मामले में सजा पर बहस के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपराध को गंभीर और जघन्य बताते हुए अधिकतम सजा देने की मांग की. अभियोजन ने अदालत के सामने कहा कि यह घटना अचानक नहीं हुई थी, बल्कि आरोपितों ने कथित तौर पर योजना बनाकर पहले प्रेमबाबू का अपहरण किया और फिर उनकी हत्या की. दूसरी तरफ बचाव पक्ष ने दोषियों की आर्थिक स्थिति, उनके पहले किसी अपराध में शामिल न होने और परिवार की जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए कम सजा देने की मांग की.
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की परिस्थितियों, अपराध की प्रकृति, घटना को अंजाम देने के तरीके, दोषियों की उम्र, चरित्र और उनके सामाजिक परिवेश समेत अन्य पहलुओं पर विचार किया. इसके बाद अदालत ने हत्या के मामले में मृत्यु दंड के बजाय आजीवन सश्रम कारावास को उचित माना.
पांचों दोषियों को क्या सजा मिली?
अदालत ने पांचों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के साथ धारा 120बी के तहत आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है. अर्थदंड नहीं देने पर प्रत्येक को छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. इसके अलावा अदालत ने अपहरण के अपराध में भी पांचों दोषियों को दोषी माना. धारा 364 के साथ धारा 120बी के तहत सभी को 10-10 वर्ष के कारावास की सजा दी गई. इस अपराध के लिए प्रत्येक पर पांच-पांच हजार रुपये का अतिरिक्त अर्थदंड लगाया गया है. अगर कोई दोषी यह अर्थदंड जमा नहीं करता है तो उसे तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि हत्या और अपहरण के मामले में सुनाई गई दोनों सजाएं एक के बाद एक नहीं, बल्कि साथ-साथ चलेंगी. यदि किसी दोषी ने इस मामले में पहले ही जेल में कुछ समय बिताया है तो नियमानुसार उस अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा.
फैसला आते ही सभी दोषी जेल भेजे गए
अदालत का फैसला आने के समय सभी पांचों दोषी जमानत पर बाहर थे. जैसे ही अदालत ने उन्हें दोषी करार देकर सजा सुनाई, उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया गया. इसके बाद न्यायालय ने दोषसिद्धि वारंट तैयार कर सभी दोषियों को जिला कारागार भेजने के निर्देश दिए. अदालत ने फैसले की एक प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उरई को भी भेजने का आदेश दिया है. इस तरह करीब साढ़े तीन साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद प्रेमबाबू के अपहरण और हत्या के मामले में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया.
इस मामले का सबसे अहम पहलू क्या रहा?
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि एक किसान के अपहरण की शिकायत से शुरू हुई पुलिस जांच कुछ ही दिनों में हत्या के मामले तक पहुंच गई. 4 मार्च 2023 को अपहरण की शिकायत दर्ज हुई और 6 मार्च को पुलिस ने प्रेमबाबू का शव बरामद कर लिया. इसके बाद पुलिस की जांच में पांच लोगों को आरोपित बनाया गया और मामला अदालत में पहुंचा. लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने तर्क रखे. आखिरकार अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पांचों को हत्या और अपहरण का दोषी माना.
करीब साढ़े तीन साल बाद आया फैसला
प्रेमबाबू की हत्या का मामला वर्ष 2023 में सामने आया था और अब 11 सितंबर 2026 को अदालत ने इसमें फैसला सुनाया है. इस दौरान पुलिस जांच से लेकर आरोप पत्र दाखिल होने और फिर अदालत में गवाहों व साक्ष्यों की जांच तक लंबी कानूनी प्रक्रिया चली. अंत में अदालत ने फूल सिंह, शत्रुघन उर्फ रामसहोदर, मोहित कुमार, आरिफ और अतर सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई. अदालत के आदेश के बाद पांचों दोषियों को जेल भेज दिया गया है.