कैग रिपोर्ट से खुली पोल, ड्रोन-सैटेलाइट से मिले सुबूत: दिवंगत BSP विधायक उमाशंकर सिंह की कंपनियों से 400 करोड़ वसूलेगा IT!
BSP MLA Umashankar Singh News: बसपा के दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह की कंपनियों पर आयकर विभाग का शिकंजा कस गया है. आयकर विभाग 400 करोड़ रुपये से अधिक टैक्स वसूलेगा. सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट में खनन विभाग के कई अधिकारियों की भूमिका का भी जिक्र है.
BSP MLA Umashankar SinghNews: बहुजन समाज पार्टी (BSP) के दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह की कंपनियों पर आयकर विभाग (Income Tax Department) अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करने जा रहा है. विभाग उनकी कंपनियों से 400 करोड़ रुपये से अधिक के बकाए टैक्स और जुर्माने की वसूली की तैयारी में है. उनके ठिकानों पर मारे गए छापों में मिले पुख्ता सबूतों और टैक्स चोरी के दस्तावेजों का विश्लेषण करने के बाद विभाग की इंवेस्टीगेशन विंग ने रिपोर्ट तैयार कर ली है.
अब इस रिपोर्ट को अंतिम मुहर के लिए नई दिल्ली में आयकर मुख्यालय (IT Headquarters) भेजा जाएगा. सूत्रों की मानें तो आरोपी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया था, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हुई थी. इतना ही नहीं, आयकर विभाग को भी टैक्स नहीं दिया गया.
30 से ज्यादा ठिकानों पर पड़ा था छापा
दरअसल, बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक रहे उमाशंकर सिंह का 6 अगस्त 2026 को निधन हो गया था. इससे पहले फरवरी में आयकर विभाग की टीम ने उनके लखनऊ, बलिया, सोनभद्र, मिर्जापुर, कौशांबी और प्रयागराज के 30 से अधिक ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की थी. इस बड़ी कार्रवाई के दौरान विभाग के हाथ अवैध खनन और बेनामी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज लगे थे. साथ ही मौके से 10 करोड़ रुपये नकदी भी जब्त की गई थी.
छात्रशक्ति कंस्ट्रक्शन और साईं राम इंटरप्राइजेज पर गाज
आयकर विभाग की यह पूरी जांच छात्रशक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी और साईं राम इंटरप्राइजेज के इर्द-गिर्द थी. ये कंपनियां बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण, बुनियादी ढांचे और खनन के कारोबार से जुड़ी हुई थीं. जांच का सिलसिला तब शुरू हुआ, जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में सोनभद्र जिले में अवैध खनन के कारण राज्य सरकार को लगभग 60 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का खुलासा हुआ था. सबूतों को और मजबूत करने के लिए आयकर विभाग ने पहली बार मिर्जापुर और सोनभद्र के खनन क्षेत्रों में ड्रोन और सैटेलाइट इमेजिंग तकनीक का सहारा लिया, जिससे अवैध खनन की परतें उधड़ती चली गईं.
खनन अधिकारियों और नौकरशाहों पर भी आंच
विभाग की जांच रिपोर्ट केवल कंपनियों तक ही सीमित नहीं है, इसमें खनन विभाग के कई बड़े अधिकारियों और नौकरशाहों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों ने अवैध खनन पर जानबूझकर आंखें मूंद रखी थीं और कंपनियों से अनुचित लाभ लेते रहे. जांच के दौरान कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जो अधिकारियों और नौकरशाहों को कटघरे में खड़े कर रहे हैं.