SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

'नटराज' से 'काली सरकार' बनने का तिलिस्म: ढाई दशक तक पुलिस को छकाया, जानिए हरदोई का वांटेड कैसे बना 'सिद्ध बाबा'?

Hardoi historysheeter Natraj Shukla: हरदोई में कभी 'नटराज' के नाम से पहचान रखने वाला प्रदीप शुक्ला उर्फ नटराज शुक्ला करीब ढाई दशक तक पुलिस की पहुंच से दूर रहा और झांसी में 'काली सरकार' के नाम से अपनी अलग पहचान बना ली. उसका आपराधिक रिकॉर्ड 1987 से जुड़ा है. पुलिस रिकॉर्ड में 1987 से अब तक 13 मुकदमों का जिक्र है. जानिए कैसे खुला यह राज?

Written By Pooja Singh
Published: Oct 12, 2026, 07:02 AM IST | Updated: Oct 12, 2026, 07:34 AM IST
Join

Hardoi historysheeter Natraj Shukla/ आशीष द्विवेदी: अपराध की दुनिया से निकलकर साधु-संत का चोला ओढ़ने की फिल्मी कहानियां आपने कई बार सुनी होंगी, लेकिन उत्तर प्रदेश की यह असल दास्तान किसी भी पटकथा से कम रोमांचक नहीं है. यह कहानी है हरदोई के प्रदीप शुक्ला उर्फ 'नटराज' की, जिसके काले कारनामों की शुरुआत साल 1987 में हुई थी.

पुलिस के शिकंजे से बचने के लिए उसने शहर बदले, भेष बदला और आखिरकार झांसी में 'काली सरकार' बनकर ऐसा साम्राज्य खड़ा कर दिया, जहां देश-विदेश के लाखों लोग उसके भक्त बन गए, लेकिन अतीत के साये और कानून के लंबे हाथ आखिरकार उस तक पहुंच ही गए.

हरदोई के 'नटराज' का काला इतिहास
हरदोई के शहर कोतवाली क्षेत्र के चौहान थोक निवासी प्रदीप शुक्ला का आपराधिक सफर साल 1987 में शुरू हुआ था. पुलिस रिकॉर्ड के पन्ने पलटें तो उस पर लूट, हत्या के प्रयास, अपहरण, यौन शोषण के प्रयास, अवैध हथियार रखने, मारपीट और धमकी जैसे 13 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं. 1987 और 1988 के अलावा 1996 और 1997 में भी उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए. उसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 34A है. 2002 में धारा 110G जाब्ता फौजदारी के तहत मुकदमा संख्या 68/02 का जिक्र है. इसके बाद पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीशीट खोल दी.

हरदोई पुलिस की पकड़ से गायब
इसके बाद से ही 'नटराज' हरदोई पुलिस की पकड़ से हमेशा के लिए गायब हो गया और उसने कानून की आंख में धूल झोंकना शुरू कर दिया. साल 2002 के बाद उसके हरदोई छोड़ने की सटीक तारीख और बीच के घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है. 2014 में उसके खिलाफ लूट का मुकदमा दर्ज हुआ, जिसमें गिरफ्तारी के बाद उसे जेल भेजा गया. 2018 में मारपीट के मामले में जमानत के बाद फिर वह कभी वापस नहीं लौटा और लापता हो गया. अदालत ने उसके खिलाफ स्थाई वारंट जारी किया था.

झांसी में 'काली सरकार' का अवतार
हरदोई छोड़ने के बाद प्रदीप पहले कानपुर पहुंचा, जहां उसने नगों यानी रत्नों के कारोबार में हाथ आजमाया. इसी दौरान वह साधु-संतों के संपर्क में आया और धीरे-धीरे उसने अपनी पहचान बदलने की चाल चली. वह बुंदेलखंड के झांसी जिले के मऊरानीपुर के कुरैंचा गांव जा पहुंचा, जहां उसने सत्यानंद शुक्ला उर्फ 'काली सरकार' के नाम से एक नया और चमत्कारी व्यक्तित्व गढ़ लिया.

सोशल मीडिया का जादू
सेना जैसी खाकी-हरी वर्दी, माथे पर बड़ा सा तिलक और तंत्र-मंत्र की आभा उसके व्यक्तित्व का हिस्सा बन गई. वह बीमारियां ठीक करने, लोगों की परेशानियां दूर करने और पर्ची निकालकर भविष्य बताने का दावा करने लगा. बुधवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार को उसके दरबार में भक्तों का सैलाब उमड़ने लगा. तकनीक के इस दौर में उसने इंस्टाग्राम का सहारा लिया, जहां उसके एक लाख से अधिक फॉलोअर्स बन चुके थे.

एक झटके में खत्म हुआ साम्राज्य
भक्तों की भीड़, इंस्टाग्राम की चमक और 'काली सरकार' के मुखौटे के पीछे बैठा प्रदीप शायद यह भूल चुका था कि कानून की फाइलें कभी दफन नहीं होतीं. अदालत से उसके खिलाफ स्थाई वारंट जारी हो चुके थे. 10 अक्टूबर 2026 को हरदोई शहर कोतवाली और झांसी की मऊरानीपुर पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन के तहत कुरैंचा मंदिर में छापा मारा. जैसे ही पुलिस ने दरबार के भीतर प्रवेश किया, ढोंग और आस्था का सारा पर्दाफाश हो गया.

'काली सरकार' के रूप में बैठा शख्स कोई और नहीं बल्कि ढाई दशक से फरार हरदोई का वही पुराना हिस्ट्रीशीटर 'नटराज' निकला. पुलिस ने उसे धर दबोचा और हरदोई ले आई. इस तरह अपराध से शुरू हुई एक शातिर फरारी की कहानी आखिरकार हथकड़ियों के साथ अपने अंजाम तक पहुंच गई.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES