बेजुबान से बेइंतहा मोहब्बत: पालतू कुत्ते की मौत पर छपवाए शोक संदेश के कार्ड, मालिक ने इंसानों की तरह निभाई अंतिम रस्म!
Gorakhpur Pet Dog Brahmbhoj: गोरखपुर में एक परिवार ने अपने पालतू कुत्ते के निधन के बाद जिस तरह उसे याद किया, उसकी चर्चा अब इलाके में हो रही है. दरअसल, परिवार ने अपने पालतू कुत्ते के निधन के बाद श्रद्धांजलि देने के लिए बाकायदा कार्ड छपवाया और ब्रह्मभोज का आयोजन कर दिया.
Gorakhpur Pet Dog Brahmbhoj/ नागेन्द्र मणि त्रिपाठी: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के आजाद नगर से इंसान और बेजुबान के बीच प्यार की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो भावुक करने के साथ ही लोगों का ध्यान भी खींच रही है. यहां एक परिवार ने अपने पालतू कुत्ते की मौत के बाद उसे श्रद्धांजलि देने के लिए बाकायदा कार्ड छपवाया. कार्ड पर कुत्ते की तस्वीर के साथ 'विनम्र श्रद्धांजलि' लिखा गया और ब्रह्मभोज का निमंत्रण भी दिया गया.
यह कहानी है आजाद नगर के अनिल मिश्रा और उनके पालतू कुत्ते बफी की, जो परिवार के लिए महज एक जानवर नहीं, बल्कि घर का अभिन्न हिस्सा बन चुका था. बफी के निधन के बाद परिवार ने जिस तरह उसे याद किया, उसकी चर्चा अब इलाके में हो रही है.
बफी के लिए छपवाया श्रद्धांजलि कार्ड
जानकारी के मुताबिक, अनिल मिश्रा के पालतू कुत्ते बफी का परिवार के हर सदस्य से गहरा लगाव था. बफी घर में रहते-रहते परिवार की दिनचर्या का हिस्सा बन गया था. परिवार के सदस्यों के साथ-साथ रिश्तेदार भी उसे बहुत प्यार करते थे. उसके निधन के बाद परिवार ने उसकी याद में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया. इसके लिए बाकायदा श्रद्धांजलि कार्ड छपवाया गया, जिसमें बफी की तस्वीर को सुनहरे रंग की सजावट के बीच जगह दी गई.
कार्ड पर लिखा 'विनम्र श्रद्धांजलि'
इस कार्ड में सबसे ऊपर बड़े अक्षरों में 'विनम्र श्रद्धांजलि' लिखा गया है. इसके नीचे 'स्व. बफी के ब्रह्मभोज पर आमंत्रण' का संदेश दिया गया है. कार्ड पर बफी की तस्वीर के साथ कार्यक्रम का निमंत्रण भी छापा गया. ब्रह्मभोज का आयोजन गोरखपुर के आजाद नगर स्थित मकान नंबर 454 बी में किया गया. एक पालतू कुत्ते की याद में इस तरह श्रद्धांजलि कार्ड छपवाना और कार्यक्रम आयोजित करना दिखाता है कि परिवार के लिए बफी कितना खास था.
बेजुबान से बना परिवार का सदस्य
दरअसल, पालतू जानवरों के साथ रहने वाले परिवारों के लिए उनका रिश्ता केवल देखभाल तक सीमित नहीं रहता. समय के साथ वे परिवार के सदस्यों की आदतों, भावनाओं और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं. उनके निधन से घर में खालीपन महसूस होना स्वाभाविक है. अनिल मिश्रा और उनके परिवार के लिए भी बफी ऐसा ही साथी था. उसके जाने के बाद परिवार ने उसकी यादों को संजोने और अपने स्नेह को व्यक्त करने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया.
अनिल ने बफी के साथ बिताए समय, परिवार के लगाव और उसके निधन के बाद श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करके एक जानवर के प्रति इंसानियत के लगाव की मिसाल पेश की है.
रिश्ते की गहराई बयां करता है परिवार का फैसला
गोरखपुर की यह कहानी एक बार फिर बताती है कि प्यार और अपनापन केवल इंसानों के बीच ही नहीं, बल्कि इंसान और बेजुबान जानवरों के बीच भी गहरा रिश्ता बना सकता है. भले ही बफी अब इस परिवार के बीच मौजूद नहीं है, लेकिन उसकी यादें आज भी परिवार के लिए खास हैं. श्रद्धांजलि कार्ड और ब्रह्मभोज का आयोजन उसी भावनात्मक जुड़ाव की एक मिसाल है, जिसने बफी को परिवार के लिए खास बना दिया था.
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