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Ghazipur Monkey Viral News/ आलोक त्रिपाठी: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक ऐसा भावुक करने वाला मामला सामने आया है, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं. एक गरीब महिला की अंतिम विदाई के दौरान जो हुआ, उसे देखकर किसी को भी अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ. अर्थी के पास अचानक एक बंदर पहुंचा, उसने मृतका का कफन हटाया, उनके पैरों को छुआ और कुछ देर वहां चुपचाप बैठा रहा.
इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जो हर देखने वाले को भावुक कर रहा है. हालांकि, ज़ी मीडिया वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है.
गरीबी की बेबसी, अंतिम विदाई की तैयारी
दिल को झकझोर देने वाली यह पूरी घटना गाजीपुर के सदर कोतवाली क्षेत्र के सरैया छावनी लाइन इलाके की है. यहां रहने वाले दुखंती कुशवाहा की पत्नी सुशीला लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं. रविवार को उनका निधन हो गया. परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उनके पास अंतिम संस्कार करने तक के लिए पैसे नहीं थे. अपनों को खोने के गम के साथ-साथ गरीबी की इस मजबूरी ने परिवार को बुरी तरह तोड़ दिया था. ऐसे में गांव के कुछ लोग फरिश्ता बनकर आगे आए और उन्होंने आपसी सहयोग से मृतका के अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी संभाली.
अर्थी के पास अचानक पहुंचा बंदर
सोमवार को जब अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही थीं और लोग मृतका की अर्थी को श्मशान घाट ले जाने की तैयारी में थे, तभी एक अजीब वाकया हुआ. पास के ही एक पेड़ पर बैठा बंदर अचानक नीचे उतरा और सीधा अर्थी के पास पहुंच गया. वहां मौजूद लोग एक पल के लिए सहम गए कि कहीं बंदर कोई नुकसान न पहुंचा दे, लेकिन बंदर की हरकत ने सबको अचरज में डाल दिया. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बंदर ने मृतका का कफन हटाया. उनके पैरों को छुआ और फिर वापस पेड़ पर जाकर बैठ गया.
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
इस पूरे घटनाक्रम को वहां मौजूद कुछ लोगों ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया. फिर उस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया. देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. जिसपर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.
एक तरफ परिवार की गरीबी और किसी अपने को हमेशा के लिए खोने का गम, तो दूसरी तरफ बेजुबान का इस तरह अंतिम विदाई में शामिल होकर श्रद्धांजलि देना हर किसी को अचरज में डाल रहा है. अब यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. यह घटना इलाके में संवेदना और सहानुभूति की एक अलग ही मिसाल पेश कर रही है.