100 करोड़ की साइबर ठगी के नेटवर्क का पर्दाफाश, दुबई में बैठे ठग सुल्तान मिर्जा के 3 गुर्गे गिरफ्तार; 23 बैंक कर्मचारी भी शामिल
Kanpur News: कानपुर पुलिस ने दुबई में बैठे साइबर ठग सुल्तान मिर्जा के तीन गुर्गों को गिरफ्तार कर बड़ा खुलासा किया है. अभी तक की जांच के मुताबिक 100 करोड़ की साइबर ठगी को अंजाम देने वाले इस गैंग में 23 बैंक कर्माचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं.
कानपुर/प्रवीण पांडेय: दुबई में बैठे साइबर ठग सुल्तान मिर्जा के तीन गुर्गों को कानपुर की फजलगंज पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया. पकड़े गए आरोपियों ने ऑनलाइन गेमिंग एप, डिजिटल फ्रॉड, म्यूल अकांउट खुलवाकर एक साल में 100 करोड़ के साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया था. पुलिस की छापेमारी के दौरान दो आरोपी फरार हो गए, जिनकी तलाश की जा रही है.
पुलिस को म्यूल खातों के खिलाफ NCRP पोर्टल पर 29 शिकायतें दर्ज मिली है, जिसमें 23 करोड़ का साइबर फ्रॉड किया गया है. पुलिस को आरोपियों के पास से दुबई नंबर के कई एक्टिवेटेड व प्री एक्टिवेटेड सिम भी बरामद हुए हैं. पकड़े गए आरोपी की कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगालने पर 23 प्राइवेट बैंक कर्मचारियों से बातचीत की बात सामने आई है.
सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर ठगी
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि पकड़े गए आरोपी सरकारी योजनाओं और खाते मुहैया कराने के बदले कमीशन देने का झांसा देकर लोगों से अकाउंट खुलवाते थे. सभी बैंकिग डिटेल देश-विदेश में बैठे साइबर फ्रॉड के गिरोह के मेंबरों को उपलब्ध कराई जाती थी. सेविंग खाता उपलब्ध कराने के बदले में 40 व करंट खाता उपलब्ध कराने के एवज में ठगों को 80 हजार रुपए मिलते थे.
फर्जी फर्म बनाकर खुलवाए जाते थे बैंक खाते
आरोपी सेविंग खाते में लेनदेन की लिमिट निर्धारित होने के कारण आरोपी फर्जी फर्म बनाकर प्राइवेट अकाउंट खुलवाते थे. इन बैंक खातों के जरिए विदेश में बैठे साइबर ठगों के जरिए करोड़ों का फ्रॉड किया जाता था. सेविंग अकाउंट में आने वाली ठगी की रकम का 20 प्रतिशत और करंट अकाउंट में फ्रॉड की रकम का 40 प्रतिशत कमीशन आरोपियों के पास हवाला के जरिए आता था.
कमिशन पर बनाए जाते थे शिकार
इन बैंक खातों के जरिए विदेश में बैठे साइबर ठगों के जरिए करोड़ों का फ्रॉड किया जाता था. सेविंग अकाउंट में आने वाली ठगी की रकम का 20 प्रतिशत और करंट अकाउंट में फ्रॉड की रकम का 40 प्रतिशत कमीशन आरोपियों के पास हवाला के जरिए आता था.
पकड़े गए आरोपियों ने अपना नाम फतेहपुर व मूलरूप से कोयला नगर निवासी कपिल वर्मा, कपिल देव उर्फ शंटी, साढ़ निवासी अभय प्रताप व रोहित सिंह उर्फ रुद्र प्रताप सिंह बताया है. पकड़े गए तीनों आरोपी ग्रेजुएट हैं.
फरार साइबर अपराधी से मिले लिंक
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि कपिल वर्मा का फरार साइबर अपराधी से लिंक मिला है. वह सुल्तान के लिए काम करता था. आरोपी करंट अकाउंट को मर्चेंट खाते में स्विच कराते थे. एक करंट अकाउंट की आईडी से तीन मर्चेंट अकाउंट खुलते थे, जिससे एक दिन में आरोपी ठगी से अर्जित तीन लाख तक की रकम निकाल सकता था.
कैसे चलता था ठगी का धंधा
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि शिकायत पर मर्चेंट खाता फ्रीज होने पर अधिकतम 10 दिनों का समय लगता है, जिस पर आरोपी 10 दिनों में 30 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन कर लेते थे. पकड़े गए आरोपी प्रतिमाह 40 से 50 खाते खुलवाने का काम करते थे. आरोपी कपिल वर्मा के मोबाइल में वर्ष 2024 से 23 बैंककर्मियों से बातचीत की डिटेल पुलिस को मिली है. ये बैंककर्मी मिलीभगत से खातों के वेरीफिकेशन करवाने का काम करते थे.
ठगी के लिए मूविंग कॉल सेंटर
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ठगी के लिए बाकायदा मूविंग कॉल सेंटर संचालित करते थे, जो दिल्ली एनसीआर, कानपुर, लखनऊ और आगरा में संचालित होता था. इनके मूविंग सेंटर में 10 से 15 लड़के काम करते थे. लड़के बाकायदा गाड़ियों में बैठ कर लैपटाप के जरिए पैसे ट्रांजेक्शन करते थे. कपिल की मुलाकात कानपुर के अमित सिंह उर्फ जगदीश से दिल्ली एनसीआर में हुई थी, जहां से उसने मूविंग कॉल सेंटर संचालित करने का काम शुरू किया था.
आरोपियों के सिंडिकेट में लखनऊ के राहुल, आगरा के केपी और उन्नाव के आशीष के बारे में जानकारी मिली है. जिनकी तलाश में पुलिस की टीमें लगी है.
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि आरोपी बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, डीसीबी बैंक, सीएसबी बैंक, पीएनबी बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, ओवरसीज बैंक, उज्जीवन फाइनेंस बैंक, जनास्माल बैंक, एयरटेल पेमेंट बैंक कर्मियों की मिलीभगत सामने आई है. इन्हीं बैंकखातों में पकड़े गए आरोपियों ने अकाउंट खुलवाए थे.
आरोपियों के पास से पुलिस ने 3 लैपटाप, 11 मोबाइल फोन, 4 पीओएस मशीन, 85 एटीएम, क्रेडिट कार्ड, 37 सिम कार्ड, 15 चेकबुक, 18 पासबुक, 4 लेखा-जेखा के रजिस्टर, 2 आधार कार्ड की फोटो कॉपी, 4 मोहर व इंकपैड बरामद किया है.