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बिग बॉस (Bigg Boss OTT 3) फेम और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शिवानी कुमारी एक बार फिर सुर्खियों में हैं. दरअसल, उनके विदेशी मेहमान मारविन आची ने शिवानी पर चेहरा काला कर बेइज्जती करने का आरोप लगाते हुए एक वीडियो वायरल किया था. अब पूरे मामले में शिवानी कुमारी ने अपनी सफाई दी है. ऐसे में आइए जानते हैं बुंदेलखंड की सदियों पुरानी झांझी-टेसू की शादी कराने की परंपरा?
पहले जान लेते हैं शिवानी कुमारी ने सफाई में क्या कहा?
शिवानी कुमारी ने कहा कि मारविन आची भाई को मैंने टेसू बनाया था. मेरे यहां टेसू का बहुत ही अच्छा कार्यक्रम होता है. मैं हर साल करती हूं, जो मैंने टेसू का रूप भाई को धारण करवाया था, वो मैंने उनसे पूछकर ही करवाया था, कोई आपत्ति नहीं थी, जिस टाइम हमने बनाया, यहां से हंसी-खुशी से चले गए, कोई दिक्कत नहीं थी. दूसरे दिन भी हमने पूछा कैसा लगा? तो उन्होंने बताया मुझे बहुत अच्छा लगा. शिवानी ने बताया कि गांव से जाने के बाद मारविन आची ने उनके खिलाफ वीडियो बनाया कि शिवानी ने मेकअप करके मेरे मुंह पर रंग लगाया है, मेरी बेइज्जती की है.
मारविन आची का क्या आरोप है?
वहीं, अमेरिकी इन्फ्लुएंसर मारविन आची का आरोप है कि शिवानी कुमारी ने मेकअप करके मेरे मुंह पर कलर लगाया है, मेरी बेइज्जती की है. मारविन आची के आरोपों पर शिवानी कुमारी ने कहा कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं किया. वो मेरे साथ 15 दिन तक अबकी बार रहे हैं, पिछली साल 2 दिन रहे थे. अगर मैंने अपमान किया होता तो ऑडियंस को भी खराब लगता. हमारे यहां झांझी-टेसू की शादी करनी की परंपरा है. बस टेसू बनाने पर इतना बड़ा बवाल कर दिया? इससे अच्छा अपने घर में ही किसी को बना लेते. हम हर साल ये कार्यक्रम करते हैं. इतनी बड़ी शादी इस बार इसलिए की, ताकि उनको दिखा सकूं कि मेरे इंडिया में ऐसी संस्कृतियां हैं.
भारत की संस्कृति से रूबरू करवाने की बात कही
अमेरिकी इन्फ्लुएंसर को लोगों ने कमेंट किया कि आपको मुंह काला करके घुमाया है, इस चक्कर में उनको खराब लगा और भड़का कर मेरे खिलाफ वीडियो बना दी. अगर खराब लगा था तो एक बार हमसे बात कर लेते. शिवानी कुमारी का कहना है कि उन्होंने टेसू परंपरा को दिखाने के लिए, भारत की संस्कृति से रूबरू कराने के लिए मारविन आची को टेसू बनाया था, न कि उनकी बेइज्जती के लिए. शिवानी ने इसे भारतीय लोक-संस्कृति का हिस्सा बताया है.
जानिए सदियों पुरानी ये परंपरा?
दरअसल, टेसू-झांझी की शादी पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड की एक प्राचीन लोक परंपरा है. यह पर्व मुख्य रूप से शारदीय नवरात्रि से लेकर शरद पूर्णिमा के बीच मनाया जाता है. कम उम्र के लड़के और लड़कियां इस उत्सव में भाग लेते हैं. इसमें लड़के बांस और लकड़ी की मदद से 'टेसू' नाम का एक पुतला बनाते हैं, जिसे महाभारत के पात्र भीम के पौत्र बर्बरीक का प्रतीक कहा जाता है. वहीं, लड़कियां एक छोटी मिट्टी की मटकी (जिसमें कई छेद होते हैं और उसके अंदर दीपक जलता है) को सजाकर 'झांझी' या 'झिंझिया रानी' बनाती हैं. शरद पूर्णिमा की रात को पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ टेसू और झांझी का विवाह कराया जाता है.
(औरैया से गौरव श्रीवास्तव की रिपोर्ट)