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Balrampur School Girl Death Case/ पवन कुमार तिवारी: एक मासूम की हंसी, किताबों के पन्ने और एक बेकाबू DJ का कानफोड़ू शोर... उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से आई एक खबर ने हर माता-पिता का दिल दहला दिया है. जिले के 'डिवाइन पब्लिक स्कूल' में दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली एक नन्हीं बच्ची की क्लासरूम में ही अचानक तबीयत बिगड़ी और देखते ही देखते उसकी सांसें थम गईं. इस खौफनाक मंजर का करीब 3 मिनट 2 सेकंड का सीसीटीवी फुटेज जब सामने आया, तो हर किसी की रूह कांप गई.
क्लासरूम में था सन्नाटा, बाहर से आई धमक
सोमवार की सुबह करीब 11 बजे का वक्त था. सोनू तिवारी (जीतू) की मासूम बेटी रोज की तरह स्कूल की पहली मंजिल पर अपनी क्लास में बैठी हुई थी. साथी बच्चे अपनी-अपनी किताबों में मशगूल थे. तभी अचानक स्कूल की इमारत के बाहर से एक विसर्जन जुलूस गुजरने लगा. जुलूस में डीजे इतनी तेज आवाज में बज रहा था कि उसकी धमक से स्कूल में महसूस हो रही थी.
CCTV में कैद खौफनाक मंजर
वायरल फुटेज में साफ दिख रहा है कि तेज आवाज सुनते ही कई बच्चे चौंककर खिड़की और दरवाजे की ओर देखने लगते हैं. इसी बीच, उस मासूम की गतिविधियों में अचानक असहजता दिखाई देने लगती है. परिजनों का कहना है कि इसी दौरान उसकी तबीयत बिगड़ने लगी थी. इसके बाद क्लास में मौजूद लोगों के बीच हलचल दिखाई देती है. परिजनों के मुताबिक, बच्ची को तीन बार अटैक आया और तीसरे अटैक के बाद उसकी हालत गंभीर हो गई. बाद में उसकी मौत हो गई.
स्कूल प्रबंधक ने भी माना- 'डीजे का शोर ही बना काल'
घटना के बाद स्कूल परिसर में कोहराम मच गया. आनन-फानन में बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. इस पूरी घटना पर डिवाइन पब्लिक स्कूल के प्रबंधक आशीष उपाध्याय का कहना है कि यह घटना काफी दुखद है. पूरी घटना हमारे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है. उस वक्त सड़क पर अत्यधिक तीव्र ध्वनि में डीजे बजाया जा रहा था, जिसकी वजह से यह घटना हुई है.
जांच के बाद साफ होगा कारण
हालांकि, सीसीटीवी फुटेज में डीजे के शोर और बच्ची की तबीयत बिगड़ने का क्रम एक साथ दिखाई दे रहा है, लेकिन क्या वाकई मौत का सीधा कारण डीजे का शोर ही था? इसका आधिकारिक चिकित्सकीय खुलासा पोस्टमार्टम और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा.
उठे गंभीर सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है. वहीं इस घटना ने शहर में ध्वनि प्रदूषण के तय मानकों, साइलेंस जोन (स्कूलों के आसपास) में बेकाबू डीजे बजाने की छूट और पुलिस-प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.