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EXPLAINER: यूपी में चिराग पासवान की एंट्री से बीजेपी की बढ़ेगी टेंशन? 108 सीटों पर LJP की नजर, समझिए पूरा सियासी गणित

UP Election 2027: चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने यूपी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए 108 सीटों को चिह्नित किया है. पार्टी का फोकस पासी-पासवान बहुल सीटों और युवाओं से संवाद पर है. हालांकि, पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी और गठबंधन के साथ उसका रुख क्या होगा, यह अभी साफ नहीं है.

EXPLAINER: यूपी में चिराग पासवान की एंट्री से बीजेपी की बढ़ेगी टेंशन? 108 सीटों पर LJP की नजर, समझिए पूरा सियासी गणित
Image Credit: chirag paswan

मोहम्मद गुफरान/प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. बिहार में NDA के सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी यूपी के चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है. उनकी पार्टी की नजर राज्य की 108 विधानसभा सीटों पर है. इनमें ऐसी सीटें शामिल बताई जा रही हैं.. जहां पासी और पासवान समाज के एक लाख से ज्यादा मतदाता हैं. पार्टी ने करीब 25 सीटों पर अपने प्रभारियों की भी घोषणा की है. चिराग पासवान की इस तैयारी से यूपी में NDA के भीतर सीटों को लेकर चर्चा तेज हो सकती है. ऐसे में सवाल है कि चिराग पासवान यूपी में क्या हासिल करना चाहते हैं? उनकी पार्टी का फोकस किन सीटों पर है और इससे बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के सामने क्या स्थिति बन सकती है?

108 सीटों पर LJP की नजर

लोक जनशक्ति पार्टी ने यूपी की 108 विधानसभा सीटों को चिह्नित किया है. खबर के मुताबिक पार्टी ने उन सीटों पर फोकस किया है, जहां पासी और पासवान समाज के एक लाख से ज्यादा मतदाता हैं. हालांकि इन सीटों पर पार्टी कितनी मजबूती से चुनाव लड़ सकती है और कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी, यह अभी साफ नहीं है. 108 सीटों को चिह्नित करने का मतलब यह नहीं है कि पार्टी इन सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी. फिलहाल इसे पार्टी की शुरुआती चुनावी तैयारी के तौर पर देखा जा सकता है.

पूर्वांचल पर क्यों है फोकस?

चिराग पासवान की पार्टी का ज्यादा जोर पूर्वांचल की उन सीटों पर बताया जा रहा है, जहां पासी और पासवान समाज के मतदाताओं की संख्या अधिक है. पार्टी की रणनीति इन समुदायों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ बनाने की हो सकती है. हालांकि, किसी भी विधानसभा सीट पर चुनावी नतीजे सिर्फ एक समुदाय के मतदाताओं के आधार पर तय नहीं होते. उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे, संगठन और गठबंधन भी अहम भूमिका निभाते हैं. इसलिए इन सीटों पर LJP की तैयारी को चुनावी नतीजों से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी.

25 सीटों पर प्रभारी घोषित

लोक जनशक्ति पार्टी ने करीब 25 पासी और पासवान बहुल सीटों पर अपने प्रभारी घोषित किए हैं. माना जा रहा है कि आगे चलकर इनमें से कुछ लोगों को पार्टी का उम्मीदवार बनाया जा सकता है. लेकिन अभी तक इन सीटों पर उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है. पार्टी के प्रभारी घोषित करने का एक मकसद स्थानीय स्तर पर संगठन को सक्रिय करना और चुनाव से पहले अपनी मौजूदगी बढ़ाना भी हो सकता है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी इन सीटों पर संगठन को किस तरह मजबूत करती है.

युवाओं से संवाद पर जोर

चिराग पासवान ने प्रयागराज में 'यूथ बोले तो...' कार्यक्रम के जरिए यूपी में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं. इसके बाद 8 अक्टूबर को लखनऊ में युवाओं से संवाद का कार्यक्रम प्रस्तावित है. गोरखपुर, वाराणसी और आजमगढ़ में भी युवाओं के साथ संवाद करने की तैयारी बताई गई है. इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने और राज्य में संगठन का विस्तार करने की कोशिश कर सकती है. हालांकि, इन कार्यक्रमों से पार्टी को कितना राजनीतिक समर्थन मिलता है, यह आने वाले समय में ही साफ होगा.

BJP के सामने क्या चुनौती?

यूपी में बीजेपी के साथ अपना दल (एस), राष्ट्रीय लोक दल और निषाद पार्टी जैसे सहयोगी दल भी हैं. इन दलों की चुनाव में सीटों को लेकर अपनी-अपनी अपेक्षाएं हो सकती हैं. ऐसे में अगर LJP भी यूपी में चुनाव लड़ने की तैयारी करती है, तो NDA के भीतर सीटों के बंटवारे पर बातचीत का दायरा बढ़ सकता है. लेकिन अभी ऐसा  नहीं कहा जा सकता कि इससे बीजेपी की मुश्किलें बढ़ना तय है. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि LJP कितनी सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है और गठबंधन के भीतर उसे लेकर क्या सहमति बनती है.

क्या NDA में बढ़ेगी खींचतान?

चिराग पासवान की पार्टी बिहार में NDA की सहयोगी है. यूपी में भी पार्टी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या LJP अलग से चुनाव लड़ेगी या NDA के साथ मिलकर मैदान में उतरेगी. प्रयागराज के बीजेपी महापौर गणेश केसरवानी ने चिराग पासवान को NDA का मजबूत और भरोसेमंद सहयोगी बताया है. उनका कहना है कि चिराग पासवान युवाओं से संवाद के जरिए NDA को मजबूत करने का काम कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि एक राजनीतिक दल होने के नाते LJP को चुनाव लड़ने का अधिकार है और अगर चिराग पासवान अपनी बात NDA के शीर्ष नेतृत्व के सामने रखेंगे, तो उसका हल निकल सकता है. इस बयान से साफ है कि बीजेपी की ओर से फिलहाल चिराग पासवान की चुनावी तैयारी को गठबंधन के लिए सीधे टकराव के तौर पर पेश नहीं किया जा रहा है.

यूपी में LJP के सामने क्या हैं सवाल?

चिराग पासवान की पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यूपी में अपना संगठन मजबूत करने की होगी. बिहार में पार्टी की राजनीतिक मौजूदगी को यूपी में उसी तरह दोहराना आसान नहीं होगा. यहां पहले से कई राजनीतिक दल सक्रिय हैं और विधानसभा सीटों पर मुकाबला स्थानीय समीकरणों के आधार पर होता है. LJP को यह तय करना होगा कि वह कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, किन उम्मीदवारों को मैदान में उतारेगी और गठबंधन को लेकर उसका रुख क्या होगा. साथ ही यह भी देखना होगा कि युवाओं से संवाद और पासी-पासवान समाज पर फोकस से पार्टी को कितना समर्थन मिलता है.

क्या है पूरे सियासी घटनाक्रम का मतलब?

यूपी 2027 के चुनाव से पहले चिराग पासवान की पार्टी की सक्रियता राज्य में NDA के भीतर सीटों के बंटवारे की चर्चा को एक नया आयाम दे सकती है. 108 सीटों की पहचान, 25 सीटों पर प्रभारियों की घोषणा और युवाओं से संवाद के कार्यक्रम पार्टी की चुनावी तैयारी के संकेत हैं. लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि LJP कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी और NDA के साथ उसका गठबंधन किस रूप में आगे बढ़ेगा.

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About the Author

Gunateet Ojha

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गुणातीत ओझा ज़ी न्यूज डिजिटल में एसोसिएट न्यूज एडिटर हैं. वर्तमान में ज़ी न्यूज डिजिटल के उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड डिजिटल को लीड कर रहे हैं. वह दिसंबर 2021 में ज़ी न्यूज से जुड़े. देश-दुनिया और राजनीतिक खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं. 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. इससे पहले एनडीटीवी डिजिटल, लाइव हिन्दुस्तान डिजिटल, लोकमत डिजिटल, जागरण डॉट कॉम, राजस्थान पत्रिका डिजिटल, हिन्दुस्तान अखबार, दैनिक जागरण अखबार के साथ भी काम कर चुके हैं.
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